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Cervical Pain को दूर करने में कारगर ये 3 आसन

Cervical Pain का दर्द कंधों और गर्दन में जकड़न पैदा करता है। कई बार यह रीढ़ की हड्डी से होते हुए कमर तक पहुंच जाता है। योग प्राकृतिक रूप से लचीलेपन को बढ़ाकर, मांसपेशियों के तनाव को कम करता है। कई योग हैं जिनका नियमित अभ्यास कंधों और गर्दन के स्वास्थ्य में सुधार करके सर्वाइकल संबंधी दर्द को कम करता है। जानते हैं इनके बारे में।

गौमुखासन (Gaumukhasana for Cervical Pain)

आप दिन में दो बार एक मिनट तक इस मुद्रा में रहने का प्रयास कर सकते हैं। गोमुखासन छाती और कंधों को खींचकर और खोलकर सर्वाइकल दर्द (Cervical Pain in Neck) से राहत दिलाने में मदद करता है, जिससे गर्दन में तनाव कम हो सकता है। इससे पॉश्चर में भी सुधार होता है और गर्दन से लेकर रीढ़ पर तनाव कम होता है। गर्दन और कंधों पर हल्का दबाव ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है। इससे शरीर को आराम मिलता है। इससे भी दर्द में कमी होती है। इसको ऑफिस में भी किया जा सकता है।

योगमुद्रा (Yoga Mudra)

योगमुद्रा बैठकर की जाने वाली योग है। आप दिन में दो बार कर सकते हैं। योगमुद्रा गर्दन, कंधों और पीठ के ऊपरी हिस्से को खींचकर सर्वाइकल पेन घटाता है। आगे की ओर झुकने से गर्दन से लेकर रीढ़ तक में लचीलापन आता है और बांह का बंधन छाती और कंधों को खोलता है। सभी मूवमेंट मिलकर सर्कुलेशन को बढ़ाते हैं, आराम मिलता और गर्दन की मांसपेशियों का तनाव घटता है। हालांकि, यह आसन सर्वाइकल पेन (exercise for cervical pain) से राहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं लेकिन अपने शरीर की क्षमता को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षित योग शिक्षक के निर्देशन में इन्हें किया जाए तो बेहतर होगा।

हस्तपादासन (Hastapadasana)

हस्तपादासन खड़े होकर आगे की ओर झुकने वाला आसन है जो गर्दन सहित पूरी रीढ़ पर असर डालता है। इसमें पैरों को मिलाते हुए खड़े हो जाएं और अपनी एड़ियों को पकड़ने के लिए आगे की ओर झुकें। इसे दिन में दो बार करें। यह पूरी पीठ को धीरे से खींचकर रीढ़-गर्दन में लचीलेपन को बढ़ाता है। गर्दन की मांसपेशियों का तनाव दूर और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करता है। इससे सर्वाइकल पेन घटता है। नियमित अभ्यास से पूरा बॉडी-पॉश्चर सुधरता है। भविष्य में गर्दन की परेशानी नहीं रहती है।

सर्वाइकल पेन (Cervical Pain) में योग फायदेमंद है लेकिन कुछ ऐसे व्यायाम हैं जिनको दर्द होने पर नहीं करना चाहिए। ऐसे पोज से बचें, जिनमें गर्दन पर अत्यधिक खिंचाव पड़ता हो, जैसे हेडस्टैंड, शोल्डर स्टैंड और डीप बैकबेंड। यह सर्वाइकल स्पाइन पर अत्यधिक दबाव डाल सकते हैं और गर्दन का दर्द बढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही सीटिंग का भी ध्यान रखना चाहिए। ऑफिस या सोफा आदि पर सही पॉश्चर में बैठें। बैठते समय रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। इससे समस्या नहीं बढ़ेगी।

 

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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