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गाजियाबाद हादसा : श्मशान में छत गिरने से 21 की मौत; जिसका अंतिम संस्कार, उसके बेटे की भी मलबे के नीचे दबने से मौत

गाजियाबाद हादसा
रेस्क्यू में जुटी NDRF और पुलिस की टीम।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया। यहां मुरादनगर में श्मशान में अंतिम संस्कार के दौरान गैलरी ढहने से कई लोगों की जान चली गई। जानकारी के मुताबिक 21 मारे गए, 24 घायल हुए हैं।  सभी बारिश से बचने के लिए छत के नीचे खड़े हुए थे। इस दौरान जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया गया, उसके एक बेटे की भी दुर्घटना में मृत्यु हो गई है।

गाजियाबाद हादसा

मुरादनगर में व्यवसायी जयराम (65) का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। अंतिम संस्कार के दौरान, हर कोई गेट से सटी गैलरी में खड़ा था। इसी दौरान यह हादसा हुआ। यहां ढाई महीने पहले गैलरी बनाई गई थी। लोगों का आरोप है कि गैलरी बनाने के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।

जयराम के पोते देवेंद्र ने बताया कि जब दादा का अंतिम संस्कार हो रहा था। तब बारिश हो रही थी, तो बहुत सारे लोग शेड के नीचे खड़े हो गए। इसी दौरान छत ढह गई और वहां खड़े सभी लोग दब गए। हादसे में देवेंद्र के चाचा की भी मौत हो गई है। एक भाई मलबे के नीचे दब गया और पिता भी घायल है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने दुख जताया

उत्तर प्रदेश के मुरादनगर में हुए दुर्भाग्यपूर्ण हादसे की खबर से अत्यंत दुख पहुंचा है। राज्य सरकार राहत और बचाव कार्य में तत्परता से जुटी है। इस दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं, साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।

— Narendra Modi (@narendramodi) January 3, 2021

यूपी सरकार ने मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख की मदद देने की घोषणा की

मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज ने जनपद गाजियाबाद के मुरादनगर में छत गिरने की घटना का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए हैं।

— Yogi Adityanath Office (@myogioffice) January 3, 2021

हादसे के बाद एनडीआरएफ की टीम बचाव में लग गई। बारिश के कारण भी उन्हें परेशानी हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के आश्रितों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्देश दिया है। साथ ही, पुलिस और प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई है।

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गैलरी में खड़े लोग मलबे के नीचे दब गए

पास में रहने वाले सुशील कुमार ने बताया कि हादसे के बाद सिर्फ किसी का हाथ दिख रहा था तो किसी का सिर। ऐसा लगता था कि जो भी खड़ा था, वो वीं दफन हो गया। गैलरी के किनारे खड़े लोग भी घायल हो गए।

शोर सुनकर स्थानीय लोग पहुंचे

श्मशान के पास रहने वाले अर्नेस्ट जेम्स ने कहा कि तेज आवाज थी और बारिश में चीख-पुकार मच गई। जब वे घर से बाहर आए तो लोग श्मशान से बाहर भाग रहे थे। स्थानीय लोगों ने पुलिस और बचाव दल को बुलाया। इसके बाद मलबे के नीचे फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू हुआ।

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कुछ लोगों के हाथ और पैर ही नजर आ रहे थे

श्मशान के पड़ोस में रहने वाले, मॉर्गन कहते हैं कि स्थिति को देखकर यह कहना मुश्किल था कि मलबे के नीचे दबे लोग जीवित होंगे। कुछ लोग ऐसे थे, जिनके हाथ और पैर कटे हुए थे। जेसीबी से मलबा हटाकर लोगों को निकाला गया।

महिलाएं भी श्मशान पहुंच गईं

हादसे की खबर मिलते ही जयराम का परिवार भी मौके पर पहुंच गया। सभी का स्वास्थ्य खराब था। कुछ मलबे में अपने भाई की तलाश कर रही थीं, जबकि कुछ रोती बिलखती अपने पिता की तलाश में जुटीं थीं। कौन कहां हैं किसी को पता नहीं चल पा रहा था। हर किसी की जुबां से यही निकल रहा था कि यह क्या हो गया?

ढाई महीने पहले 60 फुट लंबी गैलरी बनाई गई थी

लोगों ने बताया कि ढाई महीने पहले धूप और बारिश से बचाने के लिए श्मशान में 60 फुट लंबी गैलरी बनाई गई थी। इसे बनाते समय गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। जिससे गैलरी ढह गई, इसे बनाने के लिए इस्तेमाल हुई सामग्री चूरे में तब्दील हो गई।

श्मशान में 100 से ज्यादा लोग मौजूद थे

मुरादनगर के श्मशान घाट पर 100 से ज्यादा लोग श्मशान में मौजूद थे। ये सभी फल व्यापारी के अंतिम संस्कार में शामिल होने आए थे। गैलरी गिरने के कारण वहां खड़े लोग मलबे में दब गए और किसी को भी बचने का मौका नहीं मिला।

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