5 बड़े संकेत: Monsoon Update में 111 जिलों पर अल-नीनो का असर, बारिश अब भी कम
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार अगले 2 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। इसके साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी मॉनसून की बढ़त के लिए हालात अनुकूल हैं।

Monsoon Update में सबसे बड़ी चिंता अब सिर्फ देरी नहीं, असर की है। देश में 1 जून से 29 जून तक औसत से 42% कम बारिश हुई है। अल-नीनो के चलते 111 जिलों पर ज्यादा खतरा माना गया है, जबकि दिल्ली में मॉनसून अब भी नहीं पहुंचा है।
Monsoon Update का बड़ा खतरा
देश में बारिश शुरू हो चुकी है, लेकिन तस्वीर पूरी राहत वाली नहीं है। कई शहरों में मौसम बदला है। दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बारिश के बाद गर्मी कम हुई है। फिर भी मॉनसून अपनी सामान्य रफ्तार से पीछे है।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस बार देरी का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं दिख रहा। अल-नीनो की वजह से मॉनसून की चाल धीमी है। बारिश की कमी बढ़ रही है। खेती पर दबाव बन रहा है। सरकार ने 111 जिलों को ज्यादा संवेदनशील माना है।
यही इस Monsoon Update का सबसे अहम हिस्सा है।
दिल्ली में अब भी इंतजार
दिल्ली में अभी मॉनसून नहीं पहुंचा है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले 5 दिनों तक दिल्ली या आसपास के इलाकों में मॉनसून पहुंचने का अनुमान नहीं है। दिल्ली में मॉनसून के पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून मानी जाती है।
इस साल इसमें करीब एक हफ्ते की देरी की संभावना है। मौसम विभाग के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा है कि एक नया सर्कुलेशन पैटर्न विकसित हो रहा है। इससे 5 दिन बाद दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार फिर तेज हो सकती है।
अगर 4 जुलाई के बाद मॉनसून गति पकड़ता है, तो दिल्ली समेत उत्तर-पश्चिम भारत के इलाकों में इसका असर दिख सकता है।
Monsoon Update में कहां तक पहुंचा मॉनसून
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार अगले 2 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। इसके साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी मॉनसून की बढ़त के लिए हालात अनुकूल हैं।
इसके बाद अगले 2 से 3 दिनों में मॉनसून मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दक्षिण-पूर्व राजस्थान और गुजरात के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ सकता है।
इसका मतलब यह है कि मॉनसून पूरी तरह रुका नहीं है। लेकिन इसकी रफ्तार सामान्य नहीं है। यही देरी चिंता बढ़ा रही है।
बारिश में 42% की बड़ी कमी
Monsoon Update की सबसे चिंताजनक बात बारिश का आंकड़ा है। 1 जून से 29 जून के बीच देश में औसत से 42% कम बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 157.7 मिमी बारिश होती है। इस बार 29 जून तक सिर्फ 92.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई।
यह सिर्फ आंकड़ा नहीं है। यह बताता है कि जून का बड़ा हिस्सा कम बारिश के साथ बीता है। यही वजह है कि मॉनसून पर सवाल बढ़ रहे हैं।
बारिश की यह कमी अलग-अलग इलाकों में अलग स्तर पर दिख रही है। कुछ क्षेत्रों में स्थिति और ज्यादा खराब है।
सेंट्रल इंडिया पर सबसे ज्यादा असर
बारिश की सबसे बड़ी कमी सेंट्रल इंडिया में दर्ज की गई है। यहां 1 जून से 29 जून के बीच औसत से 54% कम बारिश हुई है। यह सबसे बड़ी कमी है।
सेंट्रल इंडिया का असर खेती पर सीधे पड़ता है। इस क्षेत्र में कई जिले ऐसे हैं जहां खेती अब भी मॉनसून पर बहुत ज्यादा निर्भर है। अगर यहां बारिश कम रहती है, तो बुवाई, फसल वृद्धि और बाद की पैदावार तीनों प्रभावित हो सकते हैं।
यही वजह है कि कृषि मंत्रालय की चिंता सबसे ज्यादा इसी दिशा में दिख रही है।
पूर्वी भारत में भी बड़ा दबाव
बारिश की दूसरी सबसे बड़ी कमी पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में दर्ज हुई है। यहां 29 दिनों में औसत से 41% कम बारिश हुई। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में यह कमी 28% रही। उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की कमी 30% तक पहुंच गई है।
यानी देश का कोई बड़ा हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित नहीं दिख रहा। कुछ जगह भारी बारिश की घटनाएं हैं, लेकिन कुल मिलाकर बारिश का वितरण कमजोर है।
Monsoon Update का यही बड़ा संकट है। कहीं-कहीं तेज बारिश हो रही है, लेकिन समग्र तस्वीर कमजोर बनी हुई है।
अल-नीनो क्यों बना बड़ी वजह
इस साल मॉनसून की धीमी चाल के पीछे अल-नीनो को बड़ी वजह माना जा रहा है। अल-नीनो समुद्र और वायुमंडल के पैटर्न को प्रभावित करता है। इसका असर भारत के मॉनसून पर पड़ता है। यही कारण है कि मौसम विभाग और कृषि मंत्रालय दोनों इस पर नजर रख रहे हैं।
अभी की स्थिति में यह साफ दिख रहा है कि मॉनसून की प्रगति सामान्य से पीछे है। बारिश की कमी बड़े हिस्से में दर्ज हो रही है। यही कारण है कि अल-नीनो को इस बार का मुख्य जोखिम माना जा रहा है।
सरकार ने इसी आधार पर संवेदनशील जिलों की पहचान शुरू की है।
111 जिलों पर ज्यादा संकट
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 111 जिलों की पहचान की गई है जहां अल-नीनो का असर ज्यादा पड़ने की आशंका है। उन्होंने यह भी कहा कि असर 300 से ज्यादा जिलों पर पड़ सकता है।
कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR ने मिलकर 315 जिलों का आकलन किया है। इन जिलों में कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा ज्यादा माना गया है। यह मूल्यांकन वैज्ञानिक डेटा के आधार पर किया गया है।
यानी सरकार अब इसे सामान्य मौसम उतार-चढ़ाव की तरह नहीं देख रही। तैयारी बड़े दायरे में शुरू की जा चुकी है।

खेती पर सीधा दबाव
कमजोर मॉनसून का सबसे पहला असर खेती पर पड़ता है। जिन इलाकों में सिंचाई सीमित है, वहां जून और जुलाई की बारिश बेहद महत्वपूर्ण होती है। अगर शुरुआत में बारिश कम रहती है, तो बुवाई प्रभावित होती है। बुवाई लेट हुई तो पूरी फसल चक्र पर असर पड़ता है।
111 जिलों की पहचान इसी वजह से अहम है। ये वे इलाके हैं जहां बारिश की कमी का असर जल्दी दिख सकता है। अगर समय रहते पानी नहीं मिला, तो किसान को फसल बदलनी पड़ सकती है या बोआई कम करनी पड़ सकती है।
Monsoon Update में यह खेती वाला कोण सबसे उपयोगी है, क्योंकि यही आगे खाद्य उत्पादन और ग्रामीण आय दोनों को प्रभावित कर सकता है।
रोजगार की तैयारी भी शुरू
कृषि मंत्री ने राज्यों को कहा है कि जहां खेती या रोजगार में कमी आए, वहां नए “जी राम जी” कानून के तहत प्रभावित लोगों को रोजगार देने के लिए तैयार रहना होगा। यानी सरकार को यह अंदाजा है कि कम बारिश का असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहेगा।
अगर खेती कमजोर होती है, तो खेत मजदूरी भी घटती है। ग्रामीण इलाकों में नकद आमदनी कम होती है। इसी कारण रोजगार से जुड़ी तैयारी भी साथ-साथ शुरू की जा रही है।
यह संकेत है कि सरकार मॉनसून की कमजोरी को ग्रामीण आजीविका के नजरिये से भी देख रही है।
जल संरचनाओं पर फोकस
राज्यों को यह निर्देश भी दिया गया है कि पुरानी वॉटर बॉडीज को समय पर ठीक किया जाए। नई वॉटर बॉडीज बनाई जाएं। छोटी-छोटी जल संरचनाएं तैयार की जाएं। 1 जुलाई से शुरू होने वाले नए “जी राम जी” कानून के तहत जल संरक्षण से जुड़े कामों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा गया है।
यह तैयारी इसलिए जरूरी है क्योंकि अगर बारिश कम भी हो, तो जितना पानी गिरे उसे बेहतर तरीके से रोका जा सके। इससे खेती और पीने के पानी दोनों में मदद मिल सकती है।
सीधी बात यह है कि सरकार अब सिर्फ बारिश का इंतजार नहीं कर रही। वह कम बारिश की स्थिति में पानी बचाने की तैयारी भी कर रही है।
Monsoon Update में भारी बारिश वाले इलाके
कम बारिश की समग्र तस्वीर के बीच कुछ इलाके ऐसे भी हैं जहां बहुत भारी बारिश की आशंका बनी हुई है। 29 जून को सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कई जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई। 29 जून और फिर 2 और 3 जुलाई को कोंकण और गोवा में भी कई जगह बहुत भारी बारिश हो सकती है।
मध्य महाराष्ट्र में 2 और 3 जुलाई को ऐसी ही बारिश का अनुमान है। यानी कुछ क्षेत्र मॉनसून की कमी से नहीं, बल्कि अधिक बारिश से प्रभावित हो सकते हैं।
यही वजह है कि इस Monsoon Update को एकतरफा नहीं पढ़ा जा सकता। देश में एक साथ दो तस्वीरें चल रही हैं।
राजस्थान में मौसम का बदला रंग
राजस्थान में सोमवार सुबह जयपुर और अलवर के कई इलाकों में बारिश हुई। इससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। उदयपुर संभाग के जिलों में भी पिछले दो-तीन दिनों से आंधी-बारिश की वजह से तापमान कम हुआ है।
राज्य में अगले तीन दिन 25 जिलों के लिए आंधी-बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 2 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी है।
लेकिन राहत पूरी नहीं है। रविवार को श्रीगंगानगर का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर, जैसलमेर, जयपुर, जोधपुर, अलवर, पिलानी, करौली और दौसा में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज हुआ। दिन और रात, दोनों समय गर्मी और उमस ने परेशानी बढ़ाई।
देरी और कमी का दोहरा असर
इस बार सबसे बड़ी समस्या यही है कि मॉनसून देरी से भी है और बारिश कुल मिलाकर कम भी है। कई बार मॉनसून देर से आता है, लेकिन बाद में तेजी से कमी पूरी कर देता है। अभी ऐसी स्थिति नहीं बनी है। अभी तक की तस्वीर में कमी साफ है।
अगर जुलाई के पहले हफ्ते से मॉनसून की रफ्तार तेज होती है, तो तस्वीर कुछ बदल सकती है। लेकिन जून के अंत तक जो कमी दर्ज हुई है, वह चिंता की वजह बनी हुई है। खासकर उन जिलों में जहां सिंचाई के विकल्प कमजोर हैं।
Monsoon Update को लेकर इसलिए केवल “बारिश हुई” या “मौसम सुहावना हुआ” जैसी खबरें पूरी तस्वीर नहीं बतातीं। असली सवाल यह है कि कुल बारिश कितनी हुई और कहां हुई।
दिल्ली-एनसीआर के लिए क्या संकेत
दिल्ली-एनसीआर में बारिश के बाद मौसम जरूर सुहावना हुआ है, लेकिन मॉनसून की औपचारिक एंट्री अभी बाकी है। अगले 5 दिनों तक इसके पहुंचने का अनुमान नहीं है। इसलिए दिल्ली में रुक-रुक कर बारिश और बादलों के बावजूद मॉनसून वाली स्थिर बारिश अभी दूर है।
अगर 4 जुलाई के बाद मॉनसून उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ता है, तो दिल्ली को राहत मिल सकती है। फिलहाल वहां इंतजार जारी रहेगा।
यानी राजधानी के लिए Monsoon Update राहत से ज्यादा प्रतीक्षा की खबर है।
राज्यों के लिए अगला कदम
कृषि मंत्रालय ने राज्यों को संवेदनशील इलाकों की जानकारी दे दी है। जल संरक्षण, वॉटर बॉडी मरम्मत, नई संरचनाएं और ग्रामीण रोजगार जैसे उपायों को प्राथमिकता देने को कहा गया है। आने वाले दिनों में राज्य सरकारों की तैयारी बहुत महत्वपूर्ण होगी।
जिन जिलों में कम वर्षा और सिंचाई की कमी दोनों का खतरा है, वहां समय रहते स्थानीय योजना बनानी होगी। अगर यह तैयारी तेज हुई, तो नुकसान कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
अभी फोकस साफ है। मौसम पर नजर, खेत के लिए तैयारी, और पानी बचाने की कोशिश।
आगे क्या देखना होगा
अब सबसे अहम समय अगले 5 से 7 दिन हैं। अगर मॉनसून 4 जुलाई के बाद रफ्तार पकड़ता है, तो उत्तर-पश्चिम भारत को राहत मिल सकती है। अगर बारिश का कुल वितरण बेहतर होता है, तो जून की कमी का कुछ हिस्सा जुलाई में संभल सकता है।
लेकिन अभी तक के आंकड़े कमजोर हैं। 111 जिले ज्यादा जोखिम में हैं। 315 जिलों का आकलन संवेदनशील माना गया है। इसलिए अगले कुछ दिन सिर्फ मौसम की खबर नहीं, खेती और पानी की योजना के लिए भी अहम होंगे।
- FAQs (Hindi) — 10 Questions
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: इस साल मॉनसून की रफ्तार धीमी क्यों है?
उत्तर: इस साल मॉनसून की धीमी रफ्तार की बड़ी वजह अल-नीनो को माना जा रहा है।
प्रश्न 2: 1 जून से 29 जून के बीच देश में कितनी कम बारिश हुई?
उत्तर: इस अवधि में देश में औसत से 42% कम बारिश दर्ज हुई है।
प्रश्न 3: दिल्ली में मॉनसून कब तक पहुंच सकता है?
उत्तर: अगले 5 दिनों तक दिल्ली में मॉनसून पहुंचने का अनुमान नहीं है। 4 जुलाई के बाद इसकी रफ्तार तेज हो सकती है।
प्रश्न 4: दिल्ली में मॉनसून की सामान्य तारीख क्या है?
उत्तर: दिल्ली में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून मानी जाती है।
प्रश्न 5: सबसे ज्यादा बारिश की कमी किस क्षेत्र में दर्ज हुई है?
उत्तर: सेंट्रल इंडिया में सबसे ज्यादा 54% कम बारिश दर्ज की गई है।
प्रश्न 6: अल-नीनो से कितने जिलों पर ज्यादा असर का खतरा है?
उत्तर: 111 जिलों को ज्यादा संवेदनशील माना गया है।
प्रश्न 7: कुल कितने जिलों का आकलन किया गया है?
उत्तर: कृषि मंत्रालय और ICAR ने 315 जिलों का आकलन किया है।
प्रश्न 8: सरकार ने राज्यों को क्या तैयारी करने को कहा है?
उत्तर: सरकार ने पुरानी वॉटर बॉडी ठीक करने, नई जल संरचनाएं बनाने और जल संरक्षण कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा है।
प्रश्न 9: किन इलाकों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है?
उत्तर: सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल, सिक्किम, कोंकण-गोवा और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।
प्रश्न 10: राजस्थान में मौसम की क्या स्थिति है?
उत्तर: जयपुर और अलवर समेत कई इलाकों में बारिश हुई है, लेकिन कई शहरों में तापमान 40 डिग्री से ऊपर बना हुआ है।
ये भी पढ़ें :
Monsoon Update की नई तस्वीर: 22 राज्यों में बारिश, लेकिन कई शहरों में गर्मी अब भी बरकरार
Like and follow us on :
Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | Pinterest | Linkedin