अमेरिकी AI स्टार्टअप Perplexity ने Google Chrome को खरीदने के लिए $34.5 अरब (करीब 2.88 लाख करोड़ रुपये) का ऑल-कैश ऑफर देकर टेक इंडस्ट्री को हैरान कर दिया है। यह ऑफर तब आया है जब Chrome बिक्री के लिए उपलब्ध भी नहीं है और Perplexity की वैल्यूएशन इससे काफी कम है।
Google के खिलाफ एंटीट्रस्ट केस के बीच प्रस्ताव
यह प्रस्ताव Google की पेरेंट कंपनी Alphabet को ऐसे समय पर भेजा गया है जब अमेरिकी सरकार Google के खिलाफ antitrust battle लड़ रही है। एक संघीय जज ने Google को सर्च मार्केट में अवैध एकाधिकार बनाए रखने का दोषी ठहराया था। संभावित उपायों में Chrome की फोर्स्ड सेल भी शामिल है।
Perplexity कौन है?
2022 में स्थापित San Francisco आधारित Perplexity एक AI-पावर्ड सर्च टूल बनाने वाली कंपनी है, जिसे Nvidia, SoftBank और Jeff Bezos जैसे निवेशकों का समर्थन प्राप्त है। इसके 3 करोड़ मासिक सक्रिय यूजर्स हैं और यह हर महीने 780 मिलियन से ज्यादा क्वेरी प्रोसेस करता है।
Chrome के लिए प्रस्ताव की खास बातें
Chromium को ओपन-सोर्स बनाए रखना।
Google को डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन बनाए रखना, लेकिन यूजर्स को बदलने का विकल्प देना।
अगले 2 साल में Chrome और Chromium में $3 अरब का निवेश।
Chrome की मौजूदा टीम का बड़ा हिस्सा बनाए रखना।
किसी भी प्रकार के छिपे बदलाव न करना।
Google Chrome क्यों अहम है
Chrome के 3 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं और इसका ब्राउज़र मार्केट शेयर 60% से अधिक है। यह Google Search से गहराई से जुड़ा है, जो दुनिया के 90% सर्च मार्केट पर कब्जा किए हुए है। Chrome न केवल वेब एक्सेस का मुख्य साधन है, बल्कि यह यूजर डेटा और AI टूल्स के लिए भी अहम है।
Google एंटीट्रस्ट केस से कनेक्शन
US DOJ के प्रस्तावों में Chrome की बिक्री, Google के सर्च डेटा को प्रतिस्पर्धियों को लाइसेंस करना और डिफॉल्ट सर्च पोजीशन के लिए भुगतान पर रोक शामिल है। जज अमित मेहता ने कोर्ट में Chrome की बिक्री को “क्लीन और एलीगेंट” समाधान बताया था, जबकि Google ने इसका विरोध किया है।
Chrome की वैल्यू और संभावित खरीदार
विश्लेषकों के अनुसार, Chrome की कीमत $20 अरब से $50 अरब तक हो सकती है। Perplexity का ऑफर इस रेंज के बीच में आता है। OpenAI और अन्य टेक कंपनियां भी Chrome में रुचि दिखा सकती हैं।
Perplexity के AI विज़न के लिए Chrome क्यों जरूरी
Perplexity ने हाल ही में Comet नाम का अपना AI-नेटीव ब्राउज़र लॉन्च किया है। Chrome का अधिग्रहण उसे अरबों यूजर्स तक तुरंत पहुंच देगा और Google तथा OpenAI के मुकाबले में इसकी स्थिति मजबूत करेगा।
Perplexity का यह प्रस्ताव न केवल टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा रहा है, बल्कि यह AI और ब्राउज़र मार्केट में पावर बैलेंस को भी बदल सकता है। अगर डील मंजूर हुई, तो यह इंटरनेट इतिहास की सबसे बड़ी ब्राउज़र डील होगी।
Chrome और Chromium में प्रस्तावित निवेश
अगर यह अधिग्रहण सफल होता है, तो Perplexity ने अगले दो वर्षों में $3 अरब का निवेश करने का वादा किया है, जिससे Google Chrome और इसके ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म Chromium को और बेहतर बनाया जा सके। यह निवेश ब्राउज़र की फंक्शनैलिटी बढ़ाने, सिक्योरिटी फीचर्स को मजबूत करने और एडवांस AI features को इंटीग्रेट करने पर खर्च किया जाएगा।
डेवलपर्स के लिए यह एक मौका होगा कि वे और मजबूत व इनोवेटिव प्लेटफॉर्म पर काम कर सकें। वहीं, यूजर्स को इससे ज्यादा सहज, सुरक्षित और स्मार्ट ब्राउज़िंग अनुभव मिलेगा। Perplexity ने Chrome की मौजूदा टीम को बनाए रखने और उनके अनुभव का उपयोग करके भविष्य के अपग्रेड्स में तेजी लाने का भी वादा किया है।
यह निवेश और टैलेंट रिटेंशन पर फोकस इस बात को साबित करता है कि Perplexity, Chrome की ब्राउज़र मार्केट में लीडरशिप को बनाए रखते हुए इसे नए आयामों तक ले जाना चाहती है।
डील को असफल कर सकने वाली चुनौतियां
Perplexity का विज़न भले ही बड़ा हो, लेकिन इसके रास्ते में कई बड़ी चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती है इसके मौजूदा संसाधनों और $34.5 अरब के प्रस्तावित अधिग्रहण मूल्य के बीच का बड़ा अंतर, जिसे पूरा करने के लिए भारी बाहरी फंडिंग की ज़रूरत होगी। इसके अलावा, Chrome बेचने के लिए Google की इच्छा भी साफ नहीं है। भले ही antitrust pressure बढ़ जाए, यह तय नहीं है कि Google, Chrome को ही बेचने का विकल्प चुनेगा।
टेक इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स के लिए यह मामला यह दिखाता है कि बड़े पैमाने पर अधिग्रहण, खासकर रेगुलेटेड मार्केट में, कितने जटिल होते हैं। इस डील का नतीजा भविष्य में हाई-स्टेक टेक अधिग्रहण के लिए एक मिसाल भी बन सकता है।
ब्राउज़र मार्केट के लिए इसका मतलब
Perplexity का यह ऑफर वेब ब्राउज़र इंडस्ट्री में एक टर्निंग पॉइंट हो सकता है, जिसमें AI इंटीग्रेशन एक अहम भूमिका निभाएगा। अगर यह डील सफल रही, तो यह ब्राउज़र्स के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है, जिससे वे और अधिक स्मार्ट, एडैप्टिव और यूजर-सेंट्रिक बनेंगे।
यह कदम इस बात को भी दर्शाता है कि भविष्य की टेक्नोलॉजी में Artificial Intelligence की भूमिका लगातार बढ़ रही है। हालांकि, वित्तीय, कानूनी और रणनीतिक चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन यह प्रस्ताव AI के ज़रिए आने वाली टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन की जबरदस्त संभावनाओं को उजागर करता है।
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