EPFO Pension Update इस बार सिर्फ नियमों की खबर नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की कहानी बनकर सामने आया है जो एक तरफ बेहद कम पेंशन में गुजारा कर रहे हैं और दूसरी तरफ अपने पुराने PF अकाउंट्स में फंसे पैसे तक पहुंच नहीं बना पा रहे थे।
पेंशन और पुराने PF पर एक साथ राहत की उम्मीद क्यों अहम है
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़ी दो खबरें एक साथ सामने आई हैं, और दोनों का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ने वाला है। पहली राहत उन पेंशनर्स के लिए है जो लंबे समय से यह कह रहे हैं कि एंप्लॉई पेंशन स्कीम यानी EPS-95 के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन आज की महंगाई में बेहद कम है। दूसरी राहत उन लोगों के लिए है जिनके पुराने PF अकाउंट बंद हो चुके हैं, निष्क्रिय पड़े हैं या जिनका रिकॉर्ड अब आसानी से हाथ नहीं आता।
इन दोनों मुद्दों को अगर एक साथ देखें, तो तस्वीर साफ होती है कि मामला सिर्फ प्रशासनिक बदलाव का नहीं है। यह बुजुर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी, रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा और उन कर्मचारियों की जमा पूंजी से जुड़ा सवाल है जो नौकरी बदलने, रिकॉर्ड गुम होने या पुराने सिस्टम की वजह से अपने ही पैसे तक नहीं पहुंच पा रहे थे।
यही वजह है कि यह पूरा बदलाव आम कर्मचारियों, पेंशनर्स, उनके परिवारों और उन लाखों खाताधारकों के लिए बड़ा माना जा रहा है जिनकी छोटी-छोटी रकम सालों से अटकी हुई है। अगर पेंशन बढ़ाने और पुराने PF अकाउंट्स तक पहुंच आसान बनाने के दोनों मोर्चों पर ठोस फैसला होता है, तो इसका असर सीधे घर-घर तक दिखाई दे सकता है।
EPS-95 की न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग क्यों तेज हुई
वर्तमान में EPS-95 के तहत रिटायरमेंट के बाद मेंबर्स को न्यूनतम 1000 रुपये प्रति महीना पेंशन मिलती है। कागज पर यह रकम भले मौजूद हो, लेकिन जमीनी हकीकत में यह राशि बेहद कम मानी जा रही है। पेंशनर्स एसोसिएशन और लेबर यूनियंस लगातार यह कहती रही हैं कि बढ़ती महंगाई, दवाइयों का खर्च, घरेलू जरूरतों और बुजुर्गों की बुनियादी जिंदगी को देखते हुए यह रकम पर्याप्त नहीं है।
इसी वजह से लंबे समय से मांग उठ रही है कि इस न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर कम से कम 7500 रुपये प्रति महीना किया जाए। यह मांग किसी अतिरिक्त सुविधा की तरह नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक जीवनयापन की जरूरत के रूप में सामने रखी जा रही है।
जो लोग दशकों तक नौकरी करते रहे, EPF और पेंशन सिस्टम में योगदान देते रहे, रिटायरमेंट के बाद वे यही उम्मीद करते हैं कि उन्हें हर महीने इतनी राशि जरूर मिले जिससे बुनियादी खर्च पूरे हो सकें। 1000 रुपये की मौजूदा न्यूनतम पेंशन इस कसौटी पर कमजोर मानी जा रही है। यही कारण है कि पेंशन बढ़ाने का मुद्दा अब सिर्फ संगठनात्मक मांग नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव का विषय बन चुका है।
क्या 1000 रुपये से 7500 रुपये तक पहुंच सकती है पेंशन
इस समय सबसे बड़ी चर्चा इसी बात पर है कि क्या EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 7500 रुपये किया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पेंशनर्स एसोसिएशन और लेबर यूनियंस लंबे समय से यह मांग कर रही हैं। साथ ही, एक पार्लियामेंट्री कमेटी की ओर से भी पेंशन बढ़ाने की सिफारिश दी गई है।
इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि मामला अब सिर्फ मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति-निर्माण के स्तर पर भी उस पर विचार हो रहा है। कहा जा रहा है कि सरकार इस पर जल्द बड़ा फैसला ले सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह लाखों बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए राहत का बड़ा कदम साबित हो सकता है।
हालांकि अंतिम फैसला आने से पहले सटीक राशि पर मुहर लगना बाकी है, लेकिन 1000 रुपये वाली मौजूदा न्यूनतम सीमा से ऊपर जाने की चर्चा ही पेंशनर्स के बीच उम्मीद जगा रही है। खास तौर पर उन परिवारों में जहां रिटायरमेंट के बाद यही नियमित आय का मुख्य साधन है।
न्यूनतम पेंशन बढ़ने से आम पेंशनर पर क्या असर पड़ेगा
न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर उन पेंशनर्स पर पड़ेगा जिनके पास रिटायरमेंट के बाद आय के ज्यादा साधन नहीं हैं। कई बुजुर्गों की मासिक आर्थिक योजना इसी राशि पर निर्भर करती है। दवा, जांच, बिजली-पानी, राशन, किराया, यात्रा और रोजमर्रा की जरूरतों के सामने 1000 रुपये की राशि प्रतीकात्मक लगती है, व्यावहारिक नहीं।
अगर न्यूनतम पेंशन बढ़ती है, तो इसका असर सीधा जीवनस्तर पर पड़ेगा। बुजुर्गों को हर छोटी जरूरत के लिए परिवार पर निर्भरता कुछ हद तक कम करनी पड़ सकती है। जो लोग अकेले रह रहे हैं या छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में सीमित आय पर गुजर-बसर कर रहे हैं, उनके लिए यह बढ़ोतरी ज्यादा अहम होगी।
यह भी याद रखना चाहिए कि पेंशन का सवाल सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। कई बार पूरा घर उस रकम पर निर्भर होता है। ऐसे में न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी एक सामाजिक राहत की तरह भी देखी जा सकती है।
e-Prapti पोर्टल क्या है और इससे किसे सबसे ज्यादा मदद मिलेगी
EPFO ने दूसरी बड़ी राहत के रूप में ‘ई-प्राप्ति’ नाम का नया पोर्टल लाने की घोषणा की है। इसका पूरा उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जिनके पुराने PF अकाउंट बंद हैं, निष्क्रिय पड़े हैं, रिकॉर्ड अधूरे हैं या जिनके पास UAN नंबर तक उपलब्ध नहीं है।
इस पोर्टल का पूरा नाम ‘EPF Aadhaar Based Access Portal for Tracking In-Operative Accounts’ बताया गया है। आसान भाषा में समझें तो यह उन खाताधारकों के लिए ट्रैकिंग और पहुंच का नया रास्ता होगा जो पुराने सिस्टम में छूट गए थे। खासतौर पर वे लोग जिन्हें नौकरी बदले कई साल हो चुके हैं, जिनका अकाउंट पुराने भौतिक रिकॉर्ड वाले दौर का है, या जिनका PF बैलेंस अटका पड़ा है, उन्हें इससे सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है।
इस पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें आधार के जरिए पहचान सत्यापित की जाएगी। यानी जिन लोगों के पास अब UAN नहीं है या वे पुराने अकाउंट को नए सिस्टम से जोड़ नहीं पा रहे, उनके लिए भी एक रास्ता खुलेगा।
बिना UAN वाले लोग अपना पुराना PF कैसे खोज पाएंगे
पुराने समय में बहुत से PF अकाउंट्स ऐसे थे जो आज की तरह डिजिटल और UAN आधारित सिस्टम से नहीं जुड़े थे। नौकरी बदलने, कंपनी बंद होने, रिकॉर्ड अधूरे रहने या दस्तावेज गुम हो जाने की वजह से ऐसे बहुत से कर्मचारी अपने पुराने PF अकाउंट्स को ट्रेस नहीं कर पाए। यही कारण है कि लाखों अकाउंट इन-ऑपरेटिव या बंद जैसी स्थिति में पहुंच गए।
नई व्यवस्था के तहत e-Prapti पोर्टल में आधार कार्ड की मदद से पहचान सुरक्षित तरीके से वेरीफाई की जाएगी। इसका मतलब यह है कि व्यक्ति अपनी पहचान के आधार पर पुराने अकाउंट्स तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकेगा। आगे यह पोर्टल इन पुराने अकाउंट्स को मौजूदा UAN से जोड़ने और बैलेंस सक्रिय करने में भी मदद करेगा।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जिन लोगों को अब तक लगता था कि पुराना PF पैसा शायद हमेशा के लिए अटक गया, उनके लिए उसे वापस पाने की संभावना मजबूत होगी। कई परिवारों में तो यह पैसा अब तक लगभग भूले हुए संसाधन की तरह पड़ा है।
31.8 लाख इन-ऑपरेटिव अकाउंट्स का आंकड़ा क्या बताता है
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के मुताबिक EPFO के पास फिलहाल कुल 31.8 लाख इन-ऑपरेटिव अकाउंट्स हैं। यह संख्या अपने आप में बहुत बड़ी है और यह बताती है कि समस्या व्यक्तिगत नहीं, सिस्टम स्तर की है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 41% अकाउंट्स पिछले 5 से 10 साल से इनएक्टिव हैं। वहीं 22% अकाउंट्स ऐसे हैं जो 20 साल से भी ज्यादा समय से वैसे ही पड़े हुए हैं। इसका मतलब साफ है कि लाखों लोग अपनी जमा पूंजी से लंबे समय से कटे हुए हैं।
अगर इतने बड़े पैमाने पर अकाउंट्स निष्क्रिय पड़े हैं, तो यह केवल तकनीकी देरी का मामला नहीं कहा जा सकता। यह रिकॉर्ड, पहचान, सिस्टम ट्रांजिशन और ट्रैकिंग की मुश्किलों का संयुक्त परिणाम है। e-Prapti पोर्टल इसीलिए एक अहम कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार सीधे उसी समस्या को निशाना बनाता दिख रहा है।
पुराने PF अकाउंट्स में फंसा पैसा परिवारों के लिए क्यों अहम होता है
बहुत से लोग सोचते हैं कि पुराने PF अकाउंट्स में रकम छोटी होगी, इसलिए उसका महत्व कम होगा। लेकिन वास्तविकता अलग है। कई बार यही रकम किसी परिवार के लिए मेडिकल खर्च, बच्चों की पढ़ाई, घर की मरम्मत, कर्ज चुकाने या रिटायरमेंट के बाद की तत्काल जरूरत में काम आ सकती है।
खास तौर पर निम्न और मध्यम आय वर्ग के कर्मचारियों के लिए PF उनकी सबसे विश्वसनीय बचत में से एक माना जाता है। नौकरी छूटने, कंपनी बंद होने या दस्तावेजी गड़बड़ियों के कारण अगर यही पैसा वर्षों तक फंसा रहे, तो उसका असर सीधे आर्थिक सुरक्षा पर पड़ता है।
इसीलिए पुराने PF अकाउंट्स को ट्रैक करने का आसान सिस्टम सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि आर्थिक न्याय का मामला भी है। जिन लोगों ने नौकरी के दौरान यह पैसा जमा किया, उन्हें अपने ही फंड तक पहुंच का स्पष्ट और सरल रास्ता मिलना ही चाहिए।
1000 रुपये तक बैलेंस वाले अकाउंट्स का ऑटो-सेटलमेंट क्यों महत्वपूर्ण है
EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने एक और अहम फैसला लिया है। जिन PF अकाउंट्स में 1000 रुपये या उससे कम की राशि है, उन्हें अब लंबी कागजी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। ऐसे छोटे अमाउंट्स को ‘ऑटो-सेटलमेंट’ के जरिए सीधे खाताधारक के लिंक्ड बैंक अकाउंट में भेजा जाएगा।
पहली नजर में यह फैसला छोटा लग सकता है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा हो सकता है। छोटे बैलेंस वाले खातों में सबसे ज्यादा दिक्कत यही होती है कि रकम कम होने के कारण लोग दावा प्रक्रिया में समय और मेहनत लगाने से बचते हैं, या फिर सिस्टम की जटिलता के कारण वह पैसा वर्षों तक पड़ा रहता है।
ऑटो-सेटलमेंट इस मुश्किल को कम करेगा। इससे EPFO के सिस्टम पर लंबित छोटे मामलों का दबाव घटेगा और खाताधारकों को भी बिना अतिरिक्त मशक्कत के उनका पैसा मिल सकेगा। छोटे अमाउंट्स भी आम लोगों के लिए महत्व रखते हैं, खासकर तब जब वे सालों से फंसे हों।
किसी PF अकाउंट को इन-ऑपरेटिव कब माना जाता है
नियमों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति 55 साल की उम्र के बाद रिटायर हो चुका है और उसके PF अकाउंट में लगातार 3 साल तक कोई नया योगदान नहीं आता, तो उस अकाउंट को ‘इन-ऑपरेटिव’ मान लिया जाता है।
एक बार अकाउंट इन-ऑपरेटिव घोषित होने के बाद उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है। यानी पैसा वहीं पड़ा रहता है, लेकिन उसका वृद्धि लाभ रुक सकता है। हालांकि अगर खाताधारक की उम्र 55 साल से कम है और नया कंट्रीब्यूशन नहीं आ रहा, तब भी 58 साल की उम्र तक उस बैलेंस पर ब्याज मिलता रहता है।
यही कारण है कि अकाउंट की स्थिति को समझना बेहद जरूरी है। बहुत से कर्मचारी नौकरी बदलने के बाद पुराने अकाउंट को भूल जाते हैं या उसे नए खाते से लिंक नहीं कराते। धीरे-धीरे वही रकम निष्क्रिय श्रेणी में चली जाती है।
इन-ऑपरेटिव अकाउंट बनने से नुकसान क्या होता है
इन-ऑपरेटिव स्थिति का सबसे सीधा नुकसान यह है कि खाताधारक अपनी जमा पूंजी पर समय का लाभ खो देता है। अगर ब्याज मिलना बंद हो जाए, तो पैसा महंगाई के मुकाबले कमजोर पड़ने लगता है। इसके अलावा अगर रिकॉर्ड अधूरे हों या UAN उपलब्ध न हो, तो बाद में दावा करना और मुश्किल हो जाता है।
कई लोगों के मामले में वर्षों बाद परिवार को भी ठीक से पता नहीं होता कि पुराने PF अकाउंट्स कहां हैं, उनमें कितनी राशि है, या उन्हें निकालने की प्रक्रिया क्या है। ऐसे में जमा रकम धीरे-धीरे स्मृति से भी बाहर होती जाती है।
यही वजह है कि e-Prapti जैसे पोर्टल को सिर्फ एक डिजिटल सुविधा नहीं, बल्कि खोई हुई वित्तीय पहुंच को बहाल करने का तरीका माना जा रहा है।
क्या e-Prapti पोर्टल नौकरी बदल चुके कर्मचारियों के लिए गेमचेंजर बन सकता है
भारत में बड़ी संख्या में लोग समय-समय पर नौकरी बदलते हैं। पुराने समय में यह बदलाव हमेशा डिजिटल रिकॉर्ड के साथ ट्रैक नहीं होता था। बहुत-से कर्मचारियों के PF अकाउंट अलग-अलग संस्थानों में खुलते गए, लेकिन एकीकृत पहचान न होने के कारण वे जुड़ नहीं पाए।
ऐसे कर्मचारियों के लिए e-Prapti पोर्टल बहुत अहम साबित हो सकता है। अगर यह पोर्टल पुराने अकाउंट को ढूंढकर मौजूदा UAN से जोड़ने और बैलेंस सक्रिय करने में सफल होता है, तो लाखों लोगों के लिए वर्षों पुरानी समस्या खत्म हो सकती है।
इसका असर उन परिवारों पर भी होगा जहां कमाने वाले सदस्य अब रिटायर हो चुके हैं, या जिनके दस्तावेज पूर्ण नहीं हैं। अगर आधार आधारित सत्यापन से पुराने PF पैसे का रास्ता खुलता है, तो यह कर्मचारियों की जमा पूंजी को फिर से उपयोग में लाने का बड़ा माध्यम बन सकता है।
सरकार के लिए यह फैसला सामाजिक और आर्थिक दोनों रूप से क्यों अहम है
पेंशन बढ़ोतरी और पुराने PF पैसे की निकासी आसान करने के मुद्दे को केवल प्रशासनिक सुधार कह देना पर्याप्त नहीं होगा। दोनों फैसले सामाजिक सुरक्षा ढांचे के भीतर आते हैं। एक तरफ बुजुर्ग पेंशनर्स की मासिक आय का सवाल है, दूसरी तरफ कामकाजी जीवन की बचत तक पहुंच का सवाल।
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जब सरकार पेंशन बढ़ाने पर विचार करती है, तो वह सीधे बुजुर्गों की क्रय-क्षमता, सम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता को प्रभावित करती है। जब पुराना PF पैसा निकालने का सिस्टम आसान बनाया जाता है, तो वह निष्क्रिय बचत को सक्रिय आर्थिक संसाधन में बदल देती है।
दोनों मिलकर उस वर्ग को राहत दे सकते हैं जो नौकरी के बाद सीमित आय, अधूरे रिकॉर्ड और कम वित्तीय सुरक्षा के साथ जीवन गुजारता है। यही वजह है कि इस पूरी प्रक्रिया का असर महज EPFO दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा।
क्या आने वाले समय में EPFO सिस्टम ज्यादा यूजर-फ्रेंडली हो सकता है
इन दोनों कदमों से एक बड़ा संकेत यह भी मिलता है कि EPFO सिस्टम को अधिक सरल और उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाने की दिशा में दबाव बढ़ रहा है। लंबे समय से यह शिकायत रही है कि बहुत से मामलों में प्रक्रिया कठिन, रिकॉर्ड बिखरे हुए और छोटे खाताधारकों के लिए सिस्टम बोझिल रहा है।
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अगर e-Prapti पोर्टल सही ढंग से लागू होता है, ऑटो-सेटलमेंट सुचारू चलता है और इन-ऑपरेटिव खातों को ट्रैक करना आसान बनता है, तो यह भविष्य में और बड़े डिजिटलीकरण सुधारों का आधार बन सकता है।
इसी तरह अगर EPS-95 की न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी पर ठोस फैसला आता है, तो यह भी संकेत होगा कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं के हिसाब से अपडेट करने की जरूरत स्वीकार की जा रही है।
निष्कर्ष: EPFO की दो खबरें, लाखों लोगों के लिए बड़ी उम्मीद
EPFO से जुड़ी ताजा हलचल दो अलग-अलग वर्गों के लिए बड़ी राहत का संकेत दे रही है। पहला वर्ग वह है जो लंबे समय से 1000 रुपये वाली न्यूनतम EPS-95 पेंशन को अपर्याप्त मानते हुए बढ़ोतरी की मांग कर रहा है। 7500 रुपये तक बढ़ाने की मांग, पार्लियामेंट्री कमेटी की सिफारिश और सरकार के स्तर पर विचार—ये सब मिलकर पेंशनर्स के लिए उम्मीद पैदा कर रहे हैं।
दूसरा वर्ग वह है जिसके पुराने PF अकाउंट्स बंद, निष्क्रिय या बिना UAN के सिस्टम से बाहर पड़े हैं। e-Prapti पोर्टल, आधार आधारित पहचान, पुराने अकाउंट्स को मौजूदा UAN से जोड़ने की संभावना और छोटे बैलेंस का ऑटो-सेटलमेंट—ये सभी कदम उन लोगों के लिए खास राहत बन सकते हैं जिनका पैसा वर्षों से फंसा हुआ है।
सीधी बात यह है कि यह मामला सिर्फ स्कीम अपडेट का नहीं, बल्कि बुजुर्गों की आय और कर्मचारियों की बचत को फिर से उनके हाथ में लाने का है। अगर दोनों मोर्चों पर ठोस अमल होता है, तो इसका असर देशभर के लाखों परिवारों पर महसूस किया जाएगा।
FAQ
1) EPFO की नई अपडेट क्या है?
EPFO से जुड़ी दो बड़ी अपडेट सामने आई हैं। पहली, EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर विचार चल रहा है। दूसरी, पुराने और इन-ऑपरेटिव PF अकाउंट्स को खोजने और पैसा निकालने के लिए e-Prapti पोर्टल लाया जा रहा है।
2) EPS-95 की न्यूनतम पेंशन अभी कितनी है?
अभी EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये प्रति महीना मिलती है। लंबे समय से पेंशनर्स इसकी राशि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
3) EPS-95 पेंशन कितनी बढ़ सकती है?
पेंशनर्स और लेबर यूनियंस की मांग है कि न्यूनतम पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 7500 रुपये प्रति महीना किया जाए। सरकार इस पर विचार कर रही है।
4) e-Prapti पोर्टल क्या है?
e-Prapti एक नया EPFO पोर्टल है, जिसका पूरा काम पुराने, बंद या इन-ऑपरेटिव PF अकाउंट्स को ट्रैक करना और खाताधारकों को उनके फंसे हुए पैसे तक पहुंच दिलाना है।
5) क्या बिना UAN नंबर के पुराना PF अकाउंट खोजा जा सकेगा?
हां, e-Prapti पोर्टल की मदद से बिना UAN नंबर वाले लोग भी आधार के जरिए अपनी पहचान वेरीफाई करके पुराने PF अकाउंट्स को खोज सकेंगे।
6) इन-ऑपरेटिव PF अकाउंट किसे कहा जाता है?
अगर कोई कर्मचारी 55 साल की उम्र के बाद रिटायर हो गया है और उसके PF अकाउंट में लगातार 3 साल तक कोई नया योगदान नहीं आता, तो उसका अकाउंट इन-ऑपरेटिव माना जाता है।
7) क्या इन-ऑपरेटिव PF अकाउंट पर ब्याज मिलता है?
इन-ऑपरेटिव घोषित होने के बाद अकाउंट पर ब्याज मिलना बंद हो जाता है। हालांकि 55 साल से कम उम्र वाले मामलों में 58 साल की उम्र तक ब्याज मिलता रह सकता है।
8) EPFO के पास कितने इन-ऑपरेटिव अकाउंट्स हैं?
EPFO के पास फिलहाल 31.8 लाख इन-ऑपरेटिव अकाउंट्स हैं। इनमें से 41% अकाउंट 5 से 10 साल से निष्क्रिय हैं, जबकि 22% अकाउंट 20 साल से भी ज्यादा समय से पड़े हुए हैं।
9) 1000 रुपये से कम PF बैलेंस पर क्या नया नियम है?
जिन PF अकाउंट्स में 1000 रुपये या उससे कम बैलेंस है, उन्हें अब ऑटो-सेटलमेंट के जरिए सीधे लिंक्ड बैंक अकाउंट में भेजा जाएगा। इसके लिए लंबी कागजी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होगी।
10) EPFO की इन नई सुविधाओं से किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा?
इन नई सुविधाओं का सबसे ज्यादा फायदा EPS-95 पेंशनर्स, पुराने PF अकाउंट्स वाले कर्मचारियों, नौकरी बदल चुके लोगों, बिना UAN वाले खाताधारकों और उन परिवारों को होगा जिनका PF पैसा सालों से फंसा हुआ है।
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