72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में आर्टिकल 370 का जलवा, श्रीकांत बनी बेस्ट हिंदी फिल्म
20 करोड़ की फिल्म ने जीता नेशनल अवॉर्ड, बॉक्स ऑफिस पर भी किया बड़ा कमाल, आर्टिकल 370 बनी बेस्ट फीचर फिल्म, यामी गौतम को पहला नेशनल अवॉर्ड

Article 370 Awards ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बड़ी छाप छोड़ी है। फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को वर्ष 2024 की बेस्ट फीचर फिल्म चुना गया, जबकि यामी गौतम को लीडिंग रोल में बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार मिला। राजकुमार राव स्टारर ‘श्रीकांत’ बेस्ट हिंदी फिल्म बनी और कार्तिक आर्यन-ममूटी संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर चुने गए।
Article 370 Awards में बड़ी जीत
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में फिल्म ‘आर्टिकल 370’ ने सबसे बड़ा सम्मान अपने नाम किया। शनिवार को घोषित पुरस्कारों में इस फिल्म को वर्ष 2024 की बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला। फिल्म का निर्देशन आदित्य सुहास जांभले ने किया है।
फिल्म में यामी गौतम ने मुख्य भूमिका निभाई थी। उनके अभिनय को भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। उन्हें लीडिंग रोल में बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार दिया गया। यह यामी गौतम का पहला नेशनल अवॉर्ड होगा।
‘आर्टिकल 370’ की जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि फिल्म ने कंटेंट, परफॉर्मेंस और बॉक्स ऑफिस तीनों स्तरों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। करीब 20 करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में लगभग 110 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया।
यामी गौतम का पहला सम्मान
यामी गौतम के करियर के लिए यह अवॉर्ड बड़ा पड़ाव है। वे लंबे समय से अलग-अलग जॉनर की फिल्मों में काम करती रही हैं, लेकिन ‘आर्टिकल 370’ में उनके लीड रोल को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में विशेष पहचान मिली।
फिल्म की कहानी और प्रस्तुति में उनका किरदार केंद्र में रहा। इसी भूमिका के लिए उन्हें लीडिंग रोल में बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया। यह सम्मान उनके लिए पहला नेशनल अवॉर्ड है।
इस जीत ने यामी गौतम को उन अभिनेत्रियों की सूची में शामिल कर दिया है, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अभिनय के लिए सराहा गया है। फिल्म की सफलता और अवॉर्ड, दोनों ने इस भूमिका को उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धि बना दिया है।
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Article 370 Awards की बॉक्स ऑफिस कहानी
‘आर्टिकल 370’ ने कम बजट में मजबूत कमाई का उदाहरण पेश किया। फिल्म का बजट करीब 20 करोड़ रुपए बताया गया, जबकि दुनियाभर में इसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शन लगभग 110 करोड़ रुपए तक पहुंचा।
यह आंकड़ा फिल्म की स्वीकार्यता को दिखाता है। बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिलने के बाद इसकी चर्चा और बढ़ गई है। राष्ट्रीय पुरस्कार अक्सर फिल्मों को नई दर्शक-रुचि भी देते हैं। ऐसे में ‘आर्टिकल 370’ की उपलब्धि सिर्फ अवॉर्ड तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह कमर्शियल परफॉर्मेंस से भी जुड़ गई।
आदित्य सुहास जांभले के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने यह दिखाया कि मजबूत विषय और सटीक प्रस्तुति दर्शकों और जूरी, दोनों के स्तर पर असर छोड़ सकती है।
श्रीकांत बनी बेस्ट हिंदी फिल्म
बेस्ट हिंदी फिल्म का पुरस्कार राजकुमार राव स्टारर ‘श्रीकांत’ को मिला। इस फिल्म का निर्देशन तुषार हीरानंदानी ने किया है। राजकुमार राव फिल्म में मुख्य भूमिका में नजर आए।
फिल्म में ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं। ‘श्रीकांत’ को हिंदी सिनेमा की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म चुना जाना इसकी कहानी और प्रस्तुति की बड़ी स्वीकृति है।
फिल्म का बजट करीब 35 करोड़ रुपए बताया गया। इसने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 60 करोड़ रुपए की कमाई की। यानी फिल्म ने अवॉर्ड मान्यता के साथ व्यावसायिक स्तर पर भी संतुलित प्रदर्शन किया।
राजकुमार राव की फिल्म चर्चा में
‘श्रीकांत’ की जीत ने राजकुमार राव की फिल्मों की चयन शैली को फिर चर्चा में ला दिया है। वे लंबे समय से कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं। इस फिल्म में भी उनका अभिनय केंद्र में रहा।
तुषार हीरानंदानी के निर्देशन में बनी यह फिल्म हिंदी कैटेगरी में सबसे आगे रही। ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर जैसे कलाकारों की मौजूदगी ने फिल्म को मजबूत सपोर्ट दिया।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बेस्ट हिंदी फिल्म का सम्मान मिलना किसी भी फिल्म के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। ‘श्रीकांत’ ने इसी श्रेणी में अपनी जगह बनाई।
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बेस्ट एक्टर में संयुक्त फैसला
लीडिंग रोल में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार इस बार संयुक्त रूप से दिया गया। मलयालम फिल्म ‘ब्रमायुगम’ के लिए ममूटी और फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन को यह सम्मान मिला।
कार्तिक आर्यन के लिए यह पहला नेशनल अवॉर्ड है। उनके करियर में यह अवॉर्ड एक बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। ‘चंदू चैंपियन’ में उनके प्रदर्शन को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया।
ममूटी के लिए यह चौथा नेशनल अवॉर्ड है। भारतीय सिनेमा में वे लंबे समय से अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाते हैं। ‘ब्रमायुगम’ के लिए मिला यह सम्मान उनकी अभिनय यात्रा में एक और बड़ी उपलब्धि है।
कार्तिक आर्यन की बड़ी उपलब्धि
कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिलना उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण मोड़ है। यह उनका पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है।
कार्तिक ने मुख्यधारा की फिल्मों से अपनी पहचान बनाई है। अब नेशनल अवॉर्ड ने उनके अभिनय को नई गंभीरता के साथ सामने रखा है। संयुक्त रूप से ममूटी जैसे अनुभवी अभिनेता के साथ पुरस्कार मिलना उनके लिए और भी खास बनाता है।
‘चंदू चैंपियन’ के लिए मिला यह सम्मान दर्शाता है कि कार्तिक की भूमिका ने जूरी पर मजबूत प्रभाव छोड़ा।
ममूटी का चौथा नेशनल अवॉर्ड
ममूटी को ‘ब्रमायुगम’ के लिए संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर चुना गया। यह उनका चौथा नेशनल अवॉर्ड है। ममूटी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में गिने जाते हैं।
उनकी फिल्मों में अभिनय की गहराई और किरदारों की विविधता लगातार चर्चा में रहती है। ‘ब्रमायुगम’ के लिए मिला यह सम्मान उनके लंबे और प्रभावशाली करियर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है।
कार्तिक आर्यन और ममूटी को संयुक्त रूप से सम्मानित किया जाना इस साल के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की सबसे चर्चित घोषणाओं में से एक रहा।
रणदीप हुड्डा को डेब्यू डायरेक्टर सम्मान
फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए रणदीप हुड्डा को बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का सम्मान मिला। यह उपलब्धि उनके लिए खास है क्योंकि वे लंबे समय से अभिनेता के रूप में पहचाने जाते रहे हैं।
डायरेक्टर के रूप में पहली बड़ी मान्यता मिलना उनके करियर के नए चरण को मजबूत करता है। ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के जरिए उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
नेशनल फिल्म अवॉर्ड में डेब्यू डायरेक्टर का सम्मान उन फिल्मकारों के लिए अहम माना जाता है, जो अपने पहले निर्देशन में मजबूत प्रभाव छोड़ते हैं।
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संजय मिश्रा को सपोर्टिंग अवॉर्ड
फिल्म ‘भक्षक’ के लिए संजय मिश्रा को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड मिला। संजय मिश्रा लंबे समय से अपने सहज और प्रभावशाली अभिनय के लिए जाने जाते हैं।
उनकी खासियत यह है कि वे छोटे या सहायक किरदारों में भी गहरी छाप छोड़ते हैं। ‘भक्षक’ के लिए मिला यह सम्मान उनके अभिनय कौशल की एक और राष्ट्रीय स्वीकृति है।
बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर की कैटेगरी में जीत किसी फिल्म के उस प्रदर्शन को पहचान देती है, जो कहानी को मजबूती देता है। संजय मिश्रा ने इस भूमिका में वही असर छोड़ा।
क्षेत्रीय फिल्मों का मजबूत प्रदर्शन
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों ने भी प्रमुख सम्मान जीते। तमिल फिल्म ‘रायन’ को बेस्ट तमिल फिल्म चुना गया। तेलुगु फिल्म ‘कमेटी कुर्रोल्लू’ को बेस्ट तेलुगु फिल्म का पुरस्कार मिला।
ओड़िया फिल्म ‘लाहरी’ को बेस्ट ओड़िया फिल्म का सम्मान मिला। मराठी फिल्म ‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिलवाड़ी’ बेस्ट मराठी फिल्म बनी। मणिपुरी फिल्म ‘सुनीता’ को बेस्ट मणिपुरी फिल्म का पुरस्कार मिला।
इन पुरस्कारों ने दिखाया कि राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड सिर्फ हिंदी या मुख्यधारा सिनेमा तक सीमित नहीं हैं। देश की अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों को भी बराबर मान्यता दी जाती है।
नेशनल फिल्म अवॉर्ड का इतिहास
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। शुरुआत में इनका उद्देश्य भारतीय सिनेमा को प्रोत्साहित करना और अलग-अलग भाषाओं की श्रेष्ठ फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देना था।
उस समय इन पुरस्कारों को ‘स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म्स’ कहा जाता था। पहली बार ये पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने प्रदान किए थे।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में यह पुरस्कार प्रणाली इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने अलग-अलग भाषाओं, शैलियों और क्षेत्रों की फिल्मों को राष्ट्रीय मंच दिया। समय के साथ इसकी कैटेगरी बढ़ती गईं और दायरा व्यापक होता गया।
पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड
1954 में पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दिए गए। उस समय बेस्ट फीचर फिल्म के लिए President’s Gold Medal मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ को मिला।
बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म का पुरस्कार ‘महात्मा गांधी’ को दिया गया। बेस्ट बच्चों की फिल्म का सम्मान ‘जागृति’ को मिला।
शुरुआत में पुरस्कार सिर्फ बेस्ट फीचर फिल्म, बेस्ट डॉक्यूमेंट्री और बेस्ट बच्चों की फिल्म जैसी सीमित श्रेणियों में दिए जाते थे। बाद में देशभर की अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों के लिए नई कैटेगरी जोड़ी गईं।
1968 में इन पुरस्कारों का नाम बदलकर “National Film Awards” कर दिया गया।
सिनेमा की विविधता पर मुहर
इस साल के पुरस्कारों ने एक बार फिर भारतीय सिनेमा की विविधता को सामने रखा। ‘आर्टिकल 370’ जैसी फिल्म बेस्ट फीचर फिल्म बनी। ‘श्रीकांत’ ने बेस्ट हिंदी फिल्म का सम्मान जीता। ‘ब्रमायुगम’ और ‘चंदू चैंपियन’ ने बेस्ट एक्टर कैटेगरी में संयुक्त जीत दर्ज की।
यामी गौतम और कार्तिक आर्यन जैसे कलाकारों को पहला नेशनल अवॉर्ड मिला। ममूटी जैसे दिग्गज अभिनेता ने चौथा राष्ट्रीय सम्मान हासिल किया। संजय मिश्रा और रणदीप हुड्डा जैसे कलाकारों को भी अलग-अलग श्रेणियों में मान्यता मिली।
ये पुरस्कार इस बात का संकेत हैं कि भारतीय सिनेमा में विषय, भाषा, प्रदर्शन और निर्देशन—हर स्तर पर अलग-अलग तरह की कहानियों को जगह मिल रही है।
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आगे अवॉर्ड से बढ़ेगी चर्चा
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के बाद इन फिल्मों की चर्चा फिर तेज हो सकती है। ‘आर्टिकल 370’ और ‘श्रीकांत’ जैसी फिल्मों को अवॉर्ड मिलने से दर्शकों की नई दिलचस्पी बन सकती है।
यामी गौतम, कार्तिक आर्यन, ममूटी, राजकुमार राव, रणदीप हुड्डा और संजय मिश्रा जैसे कलाकारों के लिए यह सम्मान उनके करियर की अहम उपलब्धि है। आने वाले दिनों में इन फिल्मों और विजेताओं पर सिनेमा जगत की नजर बनी रहेगी।
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बेस्ट फीचर फिल्म कौन बनी?
फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को वर्ष 2024 की बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला।
यामी गौतम को कौन सा पुरस्कार मिला?
यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ के लिए लीडिंग रोल में बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार मिला। यह उनका पहला नेशनल अवॉर्ड होगा।
बेस्ट हिंदी फिल्म का अवॉर्ड किसे मिला?
राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। इसका निर्देशन तुषार हीरानंदानी ने किया है।
बेस्ट एक्टर का पुरस्कार किन्हें मिला?
ममूटी को ‘ब्रमायुगम’ और कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ के लिए संयुक्त रूप से लीडिंग रोल में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला।
नेशनल फिल्म अवॉर्ड कब शुरू हुए थे?
नेशनल फिल्म अवॉर्ड की शुरुआत 1954 में हुई थी। शुरुआत में इन्हें ‘स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म्स’ कहा जाता था।
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