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‘जन्म से मौत तक टैक्स’ आरोपों का जवाब: क्या है Budget 2026 GST की सच्चाई

Budget 2026 GST पर चल रही बहस के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपने जवाब में साफ किया कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की जरूरी चीजों और इलाज से लेकर अंतिम संस्कार तक कई सेवाओं पर जीरो टैक्स है। साथ ही उन्होंने चंदन की खेती, किसानों, महिलाओं और राज्यों के लिए बड़े ऐलान किए।

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बजट 2026-27 पर वित्त मंत्री का जवाब, विपक्ष को दिया डेटा से जवाब

संसद में बजट 2026-27 पर हुई बहस का जवाब देते हुए वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने विपक्ष के आरोपों को विस्तार से खारिज किया। विपक्ष की ओर से लगाए गए ‘जन्म से मौत तक टैक्स’ वाले आरोप पर उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आम लोगों पर बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि टैक्स सिस्टम को सरल बनाना और लक्षित मदद के जरिए गरीब, किसान, महिला और युवा को सशक्त करना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि यह बजट 2026 से 2050 तक की आर्थिक नींव को मजबूत करने वाला विज़न डॉक्युमेंट है।

पढ़ाई-लिखाई और इलाज पर 0% GST, अंतिम संस्कार पर टैक्स की बात झूठ

वित्त मंत्री ने साफ कहा कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी बुनियादी चीजों जैसे पेंसिल, शार्पनर, इरेजर, नोटबुक और बेसिक टेक्स्टबुक्स पर 2017 से ही कोई GST नहीं लगाया जाता। यानी इन पर टैक्स की दर शून्य है। इसी तरह अस्पताल में इलाज, ऑपरेशन और ज्यादातर डायग्नोस्टिक सेवाओं पर भी GST नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष जानबूझकर लोगों को गलत जानकारी दे रहा है और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर टैक्स का बोझ नहीं डाला गया है, बल्कि इन्हें अधिकतम संभव सीमा तक टैक्स फ्री रखा गया है।

फ्यूनरल सर्विसेज यानी अंतिम संस्कार से जुड़ी सेवाओं पर टैक्स लगने की बात को भी वित्त मंत्री ने पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि शायद विपक्ष कुछ राज्यों में चलने वाले ‘कट मनी’ सिंडिकेट को ही GST समझ बैठा है, जबकि केंद्र सरकार ने अंतिम संस्कार से जुड़ी बुनियादी सेवाओं को टैक्स के दायरे से बाहर रखा है।

राज्यों के लिए 25.44 लाख करोड़ की बड़ी मदद, इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

अपने जवाब में वित्त मंत्री ने बताया कि अगले वित्त वर्ष में राज्यों को कुल ₹25.44 लाख करोड़ ट्रांसफर किए जाएंगे, जो पिछले साल से ₹3.78 लाख करोड़ ज्यादा है। इसमें टैक्स डीवॉल्यूशन, ग्रांट्स और विशेष सहायता योजनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की कोशिश है कि राज्यों के पास सड़कों, पुलों, स्कूलों, अस्पतालों, सिंचाई और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने के लिए पर्याप्त संसाधन हों।

उन्होंने यह भी बताया कि ग्रांट्स और ब्याज-मुक्त कर्ज को मिलाकर ‘इफेक्टिव कैपिटल एक्सपेंडिचर’ लगभग ₹17.1 लाख करोड़ तक पहुंच रहा है, जो देश की GDP का करीब 4.4% है। यह राशि सीधे-सीधे राज्यों की परियोजनाओं और रोज़गार सृजन में लगेगी।

SASCI स्कीम के तहत राज्यों को ₹2 लाख करोड़ का ब्याज-मुक्त लोन

वित्त मंत्री ने ‘SASCI’ (विशेष सहायता योजना) के तहत राज्यों के लिए ब्याज-मुक्त लोन का आकार बढ़ाकर ₹2 लाख करोड़ करने का ऐलान दोहराया। यह लोन 50 साल की लंबी अवधि में चुकाना होगा, जिससे राज्यों को बिना अतिरिक्त ब्याज बोझ के इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का मौका मिलेगा।

यह योजना राज्यों को नई सड़कों, पुलों, मेट्रो, लॉजिस्टिक हब, स्वास्थ्य और शिक्षा ढांचे को मजबूत करने में मदद देगी। लंबी पुनर्भुगतान अवधि के कारण यह पैसा राज्यों के लिए लगभग कंसेशनरी कैपिटल की तरह काम करेगा और निजी निवेश को भी आकर्षित करेगा।

चंदन की खेती अब अपराध नहीं, किसानों के लिए नया कमाई मॉडल

वित्त मंत्री ने भाषण में एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि चंदन (सैंडलवुड) की खेती को अब अपराध की तरह नहीं देखा जाएगा। लंबे समय तक चंदन से जुड़े कड़े कानूनों के कारण किसान इस पेड़ की खेती करने से डरते थे। अब नीति बदली जाएगी, राज्यों के साथ मिलकर नए नियम बनेंगे और किसान चंदन को भारत की अमूल्य संपत्ति मानकर खुले तौर पर इसकी खेती कर सकेंगे।

सैंडलवुड की खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ साझेदारी में नर्सरी, हाई क्वालिटी पौधे, सुरक्षा, मार्केट लिंक और प्रोसेसिंग की सुविधा मजबूत करेगी। बजट विश्लेषण में बताया गया है कि चंदन भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत से जुड़ा है, इसलिए इसे वैज्ञानिक ढंग से उगाने और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

नारियल, काजू, कोको जैसी हाई-वैल्यू फसलों पर स्पेशल फोकस

कृषि क्षेत्र में सुधारों की बात करते हुए वित्त मंत्री ने नारियल, चंदन, कोको, काजू और अन्य हाई-वैल्यू फसलों के लिए विशेष कार्यक्रमों का जिक्र किया। ‘कोकोनट प्रमोशन स्कीम’ के तहत नारियल के पुराने और कम उत्पादन वाले पेड़ों की जगह बेहतर किस्म के पौधे लगाने की योजना है, जिससे लगभग 1 करोड़ किसानों और करोड़ों नारियल पर निर्भर लोगों की आय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और अन्य तटीय राज्यों में काजू और कोको उत्पादन बढ़ाने के लिए भी विशेष पैकेज की घोषणा की गई है। लक्ष्य यह है कि भारतीय काजू और कोको को 2030 तक प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड्स के रूप में स्थापित किया जा सके और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक रोजगार पैदा हों।

खेती में AI आधारित ‘एग्री स्टैक’, किसानों के लिए डिजिटल मदद

वित्त मंत्री ने बताया कि कृषि में तकनीक और खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। ‘एग्री स्टैक’ के आधार पर एक डिजिटल पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जहां किसान अपनी जमीन, मिट्टी की सेहत, फसल पैटर्न और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर देख सकेंगे।

AI आधारित टूल्स की मदद से मौसम, मिट्टी और बाजार भाव के हिसाब से किसानों को सलाह दी जाएगी, ताकि वे बेहतर निर्णय ले सकें और कम लागत में ज्यादा उत्पादन कर सकें। इसे व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए ICAR और अन्य कृषि संस्थानों के डेटा को भी इंटीग्रेट किया जा रहा है।

20 हजार युवाओं को वेटनरी जॉब्स और 10 हजार प्रोफेशनल टूरिस्ट गाइड

पशुपालन और डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार ने इस वर्ष 20,000 वेटनरी प्रोफेशनल्स को रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। पशु स्वास्थ्य में सुधार से दूध, अंडे और मीट उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मजबूत होगी।

पर्यटन क्षेत्र में संभावनाएं बढ़ाने के लिए 10,000 युवाओं को सर्टिफाइड टूरिस्ट गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। 12 हफ्ते के विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए उन्हें भाषा, लोकल हिस्ट्री, हॉस्पिटैलिटी और डिजिटल टूल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए क्वालिटी गाइड सर्विस दे सकें।

‘लखपति दीदी’ और ‘श्री मार्ट’ से महिला सशक्तिकरण को नई उड़ान

बजट में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs) की महिलाओं के लिए ‘लखपति दीदी’ योजना और ‘श्री मार्ट’ को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। गांवों की महिलाएं अब छोटे-छोटे समूह बनाकर अचार, पापड़, कपड़े, हैंडीक्राफ्ट और अन्य प्रोडक्ट बना रही हैं। सरकार उन्हें ट्रेनिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बैंक लोन में रियायत देकर ‘सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर’ में बदलना चाहती है।

‘श्री मार्ट’ के जरिए इन महिलाओं के प्रोडक्ट्स को बड़े बाजार तक पहुंचाने की योजना है, ताकि उन्हें सही दाम मिल सके। इसके साथ ही बुजुर्गों की देखभाल के लिए 1.5 लाख ‘केयर गिवर्स’ को ट्रेनिंग और पक्का रोजगार देने की योजना भी रखी गई है, जिससे केयर इकोनॉमी में भी नए अवसर खुलेंगे।

शिक्षा, इलाज और अंतिम सफर तक सरकार का क्या तर्क है

विपक्ष का आरोप था कि जन्म से लेकर मृत्यु तक हर चरण पर सरकार टैक्स वसूल रही है। इसके जवाब में वित्त मंत्री ने साफ कहा कि बच्चों की बुनियादी शिक्षा की चीजें, अस्पताल में इलाज और अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी जरूरतों को टैक्स फ्री रखकर सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई है।

उन्होंने कहा कि GST का ढांचा इस तरह बनाया गया है कि जरूरी और जीवन रक्षक सेवाएं या तो जीरो रेटेड हैं या फिर बहुत कम टैक्स स्लैब में रखी गई हैं, जबकि लग्जरी और हाई-एंड कंजंप्शन पर अपेक्षाकृत ज्यादा टैक्स लगाया जाता है।

WTO बाली समझौता, पीस क्लॉज और मुफ्त राशन पर वार-पलटवार

वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने बताया कि 2013 के WTO (बाली) समझौते के दौरान तत्कालीन सरकार के रुख के कारण 2017 के बाद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और सरकारी राशन दुकानों पर संकट खड़ा हो सकता था।

उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद मोदी सरकार ने वैश्विक मंचों पर लड़कर ‘पीस क्लॉज’ सुनिश्चित किया, जिसकी वजह से आज 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिल पा रहा है। उनके अनुसार, यदि यह सुरक्षा न मिलती तो भारत में फूड सिक्योरिटी प्रोग्राम पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बन सकता था।

महंगाई पर सरकार की दलील: खाने की महंगाई 11% से घटकर 2% से नीचे

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यूपीए के समय खाने की महंगाई दर करीब 11% तक पहुंच गई थी। उनकी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में खाद्य मुद्रास्फीति को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है और यह अब 2% से भी कम के स्तर पर है (औसत के रूप में)। उन्होंने इसे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी रिलीफ बताया और कहा कि स्थिर और नियंत्रित महंगाई ही वास्तविक सामाजिक सुरक्षा की बुनियाद है।

2026 से 2050 तक के लिए रोडमैप या सिर्फ राजनीतिक जवाब?

वित्त मंत्री के जवाब से साफ संदेश देने की कोशिश की गई कि Budget 2026-27 सिर्फ एक साल की आय-व्यय की घोषणा नहीं, बल्कि 2050 तक के लिए विकास की नींव है। पढ़ाई-लिखाई, इलाज और अंतिम संस्कार पर जीरो GST, चंदन और नारियल जैसी हाई-वैल्यू फसलों के लिए नई नीतियां, राज्यों को ब्याज-मुक्त लोन, महिलाओं के लिए ‘लखपति दीदी’ और युवाओं के लिए नई नौकरियां—इन सबके जरिए सरकार ‘समावेशी विकास’ का दावा कर रही है।

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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