रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-V के इमरजेंसी यूज को मंजूरी, क्या गेमचेंजर हो सकती है 92% इफेक्टिव यह वैक्सीन ? जानिए सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है Read it later

स्पुतनिक-V के इमरजेंसी यूज को मंजूरी

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर तेज हो गई है। इस बीच, सोमवार को विशेषज्ञ समिति ने रूसी टीका स्पुतनिक-वी के आपातकालीन उपयोग को मंजूरी दे दी है। अब ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) इस पर फैसला लेगा। यदि इसे मंजूरी दे दी जाती है, तो यह भारत के कोरोना टीकाकरण अभियान में शामिल होने वाला तीसरा टीका बन जाएगा।

भारत में 16 जनवरी को टीकाकरण शुरू हुआ और इस साल की शुरुआत में कोविशील्ड और कोवाक्सिन को मंजूरी दी गई। कोविशील्ड ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका द्वारा सह-स्थापित है। पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) भारत में इसका उत्पादन कर रहा है। कोवाक्सिन को भारत बायोटेक द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) के सहयोग से बनाया गया है।

पिछले हफ्ते, ऐसी खबरें आईं कि अधिकांश प्रमुख राज्यों में वैक्सीन की खुराक समाप्त हो गई है। जिस गति से टीके लगाए जा रहे हैं, उस गति से नहीं बनाया जा रहा है। इस वजह से तीसरे टीके को मंजूरी देना बेहद जरूरी हो गया है।

 आइए जानते हैं कि स्पुतनिक- V कितनी खास है?

मॉर्डना और फाइजर  की mRNA वैक्सीन ही 90% तक इफेक्टिव साबित हुई हैं। इसके बाद स्पुतनिक- V ही सबसे अधिक 91.6% इफेक्टिव रही है। इसे रूसी के गामालेया इंस्टीट्यूट ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) की फंडिंग से बनाया है।

यह दो एडेनोवायरस वेक्टर से बनी है यानी कोविशील्ड जैसी है। कोवीशील्ड में चिम्पांजी में मिलने वाले एडेनोवायरस का इस्तेमाल किया गया है। वहीं, रूसी वैक्सीन में दो अलग-अलग वेक्टरों को मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है। एस्ट्राजेनेका और रूसी वैक्सीन के कम्बाइंड ट्रायल्स की बात भी चल रही है।

स्पुतनिक- V को 1 अप्रैल की स्थिति में दुनिया के 59 देशों में अप्रूवल मिला है। सबसे पहले अगस्त 2020 में रूस ने इसे मंजूरी दी थी। इसके बाद बेलारूस, सर्बिया, अर्जेंटीना, बोलिविया, अल्जीरिया, फिलिस्तीन, वेज़ुएला, पैराग्वे, यूएई, तुर्कमेनिस्तान में भी इसे अप्रूवल दिया गया था। है। यूरोपीय संघ के ड्रग रेगुलेटर से भी जल्द ही अप्रूवल मिल सकता है।

भारत में कैसे हो सकता है गेमचेंजर?

भारत में इस समय दो ही वैक्सीन उपलब्ध हैं। उनमें कोविक्सिन का एफिकेसी रेट 81% है, जबकि कोविशील्ड का कुछ शर्तों के साथ 80% तक। ऐसे में 91.6% इफेक्टिवनेस के साथ रूसी वैक्सीन सबसे ज्यादा इफेक्टिव वैक्सीन हो जाएंगे।

इस बार उपलब्ध उपलब्ध वैक्सीन का प्रोडक्शन 4 करोड़ डोज प्रतिमाह का है। अभी 35 लाख डोज रोज दिए जा रहे हैं। ऐसे में कम से कम 7 करोड़ डोज हर महीने होने चाहिए। डिमांड पूरी करने के लिए वर्तमान में स्पुतनिक- वी को मंजूरी देना जरूरी हो गया है।

RDIF के सीईओ किरिल दिमित्रेव के अनुसार यह वैक्सीन सब तक पहुंच सके, इसके लिए इसकी कीमत 10 डॉलर से कम रखी गई है। यानी 700 रुपए से बहुत कम में यह उपलब्ध होगा। बुकिंग में 90% से ज्यादा इफेक्टिवनेस साबित करने वाली अन्य वैक्सीन के मुकाबले यह बेहद सस्ता है। अच्छी बात यह है कि यह 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टोर किया जा सकता है जो मौजूदा सप्लाई चेन में आसानी से उपलब्ध है।

भारत में रुसी वैक्सीन को डॉ। रेड्डीज रायपुरटेरी विकसित कर रही है और इसके 1,500 वालंटियर्स ऑन फेज -3 ब्रिजिंग ट्रायल्स किए गए हैं। इसी आधार पर स्पुतनिक के लिए मंजूरी मांगी गई है। इसके साथ-साथ हिटरो बायोफरम और ग्लैंड फार्मा में भी प्रोडक्शन होगा। भारत में 35.2 करोड़ डोज सालाना प्रोडक्शन हो सकेगा।

91.6% इफेक्टिव है वैक्सीन, इम्यून रीस्पॉन्स तेजी से उठती है

इस वैक्सीन को रशियन फेडरेशन में स्वास्थ्य मंत्रालय के गामालेया नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ एपिडेम सियोल एंड माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (RDIF) के साथ मिलकर बनाया है। स्पुतनिक- V एक एडेनोवायरस प्लेटफॉर्म पर बने वैक्सीन है। ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के डोज की तरह ही है, पर इसमें अलग एडेनोवायरस का इस्तेमाल किया गया है।]

डेवलपर्स का कहना है कि स्पुतोनिक- बहुत जल्दी और इफेक्टिव तरीके से इन्फेक्शन के खिलाफ इम्यून रीस्पॉन्स बढ़ाती हैं। अंतरिम एफिकेसी विश्लेषकोंिस 19,866 वालंटियर्स पर की गई स्टडी के आधार पर है। इसमें 14,964 को वैक्सीन लगाई गई थी, जबकि 4,902 लोगों को प्लेसिबो (सेलीन वॉटर)। स्टडी में 2,144 वॉलंटियर्स 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे। इनमें भी वैक्सीन ने अच्छी इफेक्टिवनेस दिखाई है। वैक्सीन पहले ही 59 देशों में अप्रूवल पा चुके है।

अगस्त 2020 में जब रूस ने स्पुतनिक- वी को अप्रूवल दिया तो पूरी दुनिया में इसे संदेह की नजर से देखा गया था। तब तक इसके इफेक्टिवनेस के आंकड़े सामने नहीं आए थे। इसके बाद ट्रायल्स के नतीजे सामने आए तो पता चला कि यह वैक्सीन वास्तव में इफेक्टिव है।

यह वैक्सीन गंभीर लक्षण या मृत्यु रोकने में 100% इफेक्टिव है। यह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि यह लोगों की जान बचा सकता है। सिंघल डोज भी बीमारी के खिलाफ 87.6% तक प्रोटेक्शन देता है।

इसके अलावा और कौन-सी वैक्सीन बन रहे हैं?

1. जायकोव-डी (ज़ीकोव-डी)

कंपनी: जायडस कैडिला, अहमदाबाद ने यह वैक्सीन डेवलपर की है। भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के बाद यह दूसरा पूरी तरह से स्वदेशी वैक्सीन होगा।

इफेक्टिवनेसःनर्स दो ट्रायल्स में सुरक्षित साबित हुआ है। अनिश्चितता के आंकड़े आने वाले हैं।

क्षमता: 15 करोड़ डोज प्रतिवर्ष

राज्य: इस समय भारत में फेज -3 ट्रायल्स चल रहे हैं।

2. कोवोवैक्स (नोवैक्स)

कंपनी: सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने नोवावैक्स के साथ डील की है।

इफेक्टिवनेस: ओरिजिनल वायरस स्ट्रेन के खिलाफ 96.4% इफेक्टिव है।

क्षमता: 4-5 करोड़ डोज प्रतिमा

स्टेटस: 3 फरवरी को सीरम इंस्टीट्यूट को ब्रिजिंग स्टडी करने की अनुमति ली है। यह वैक्सीन नोवावैक्स ने तैयार की है और मालिकों ट्रायल्स विदेशों में हैं। इसकी पुष्टि के लिए भारत में ब्रिजिंग स्टडी होने वाली है।

3. BECOV2A, BECOV2B, BECOV2C, BECOV2D

कंपनी: बायोलॉजिकल ई ने बेयर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के साथ मिलकर इसे बनाया है।

अनिश्चितकालीनता: 2 डोज वाली वैक्सीन के फेज -3 ट्रायल्स अभी शुरू नहीं हुए हैं।

क्षमता: 10 करोड़ डोज प्रतिवर्ष

स्टेटस: फेज -1 और फेज -2 ट्रायल्स भारत में हो चुके हैं। नतीजों के आधार पर कंपनी फेज -3 ट्रायल्स के लिए अनुमति मांगेगी।

4. बीवी 154 (इंट्रा-नैजल वैक्सीन)

कंपनी: भारत बायोटेक ने कृष्णन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के साथ मिलकर इस पर काम किया है।

अनिश्चितकालीनता: ट्रायल्स पूरे नहीं हुए हैं।

क्षमता: पता नहीं।

स्टेटस: 3 फरवरी को भारत बायोटेक ने 175 वालंटियर पर फेज -1 ट्रायल्स के लिए मंजूरी हासिल की थी। अभी फेज -2 और फेज -3 ट्रायल्स होते हैं। साल के अंत तक बाजार में आ सकता है।

5. HGCO 19 (एमआरएनए वैक्सीन)

कंपनी: जेनोवा बायोफैरसूट्स

अनिश्चितकालीनता: फेज -3 ट्रायल्स अभी शुरू नहीं हुए हैं। अमेरिका में मोडर्ना और फाइजर की वैक्सीन इसी प्लेटफॉर्म पर बनी हुई है।

क्षमता: 36 करोड़ डोज प्रतिवर्ष

स्टेटस: 11 दिसंबर को फेज -1 और फेज -2 ट्रायल्स के लिए मंजूरी मिली थी रेगुलेटर को डेटा सौंपना है। उसके बाद अगले फेज के ट्रायल्स शुरू होंगे।

6. जेनसेन फार्मा की Ad26.CoV2.S

कंपनी: बायोलॉजिकल ई ने जॉनसन और जॉनसन की जैनसेन बायोफार्मास्यूट्स के साथ डील की है।

निष्क्रियता: 66% अमेरिका और अन्य देशों में हुए ट्रायल्स के आधार पर।

क्षमता: 60 करोड़ डोज सालाना, जिसे 100 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है।

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