Business

ITR Filing: नहीं करें इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में देरी

ITR Filing: हमारे देश की मिश्रित अर्थव्यवस्था है। प्रत्यक्ष कर वाली और अप्रत्यक्ष कर वाली। इसमें टैक्स का बहुत बड़ा योगदान है। प्रत्यक्ष कर संग्रह में सबसे बड़ा टैक्स है इनकम टैक्स यानी की आय प्राप्त करने वाले के ऊपर लगने वाला टैक्स। यह इनकम टैक्स कानून 1961 के आधार पर चलता है।

क्या होती है इनकम?

पांच तरह के स्रोतों से प्राप्त होने वाली प्राप्ति को इनकम कहते हैं। नौकरी में सैलरी से प्राप्ति, हाउस प्रॉपर्टी को रेंट पर देने से प्राप्ति, बिजनेस से प्राप्ति, कैपिटल एसेट के ट्रांसफर करने पर प्राप्त शॉर्ट टर्म अथवा लॉन्ग टर्म लाभ। अन्य स्रोतों जैसे कमीशन, बैंक से ब्याज, घुड़दौड़ से सट्टा आदि से प्राप्ति।

कैसे लगता है टैक्स? (ITR Filing)

कैपिटल गेन पर टैक्स का अलग से गणित होता है। बाकी उपरोक्त किसी भी प्रकार की इनकम के टोटल पर टैक्स लगता है। किसी व्यक्ति के सिर्फ सैलेरी इनकम भी हो सकती है या अन्य इनकम भी हो सकती है। हर तरह की इनकम में अलग-अलग तरह के डिडक्शन सकल प्राप्ति में से मिलते हैं और नेट प्राप्ति को ही इनकम मानकर फिर उनके जोड़ को टोटल इनकम कहा जाता है। जिस पर स्लैब आधार पर इनकम टैक्स लगता है।

महिलाएं और इनकम टैक्स

हमारे देश में आधी आबादी महिलाओं की मानी जाती है। लेकिन 50 % की आबादी होने के बावजूद टोटल इनकम टैक्स फाइल करने वालों में 10त्न ही महिलाएं होती हैं। जबकि आज नौकरियों में और बिजनेस में धीरे-धीरे महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं को योजना का लाभ व लोन लेने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न जरूर भरना चाहिए।

रिटर्न फाइलिंग की लास्ट डेट : वित्त वर्ष 23-24 का इंडिविजुअल और एचयूएफ के लिए 31 जुलाई 2024 रिटर्न भरने का लास्ट डेट है। उसके बाद 5000 तक की पेनल्टी के साथ दिसंबर तक भर सकते हैं।

न्यू टैक्स रिजीम

3 लाख रुपए तक 0 %
3 से 6 लाख रु तक * 5 %
6 से 9 लाख रुपए** 10%
9 से 12 लाख रुपए तक 15 %
12 से 15 लाख रु. तक 20 %
15 लाख रुपए से ऊपर 30 %

*(87 के तहत टैक्स रिबेट)
** (7 लाख तक इनकम पर सेक्शन 87 के तहत 25 हजार रु. का टैक्स रिबेट)

इनका रखें खयाल

अपने खर्चे और इनकम की सही और सारी जानकारी देनी चाहिए, जो अस्तित्व में है। हर अमाउंट इनकम में कैलकुलेट होती है। नौकरी की इनकम है तो फॉर्म 16, हाउस प्रॉपर्टी या किराया दिया है तो पेमेंट की रसीद संभालकर रखें। टीडीएस कट हुआ तो फॉर्म 26ए एस अपडेट करवा कर रखें। जमीन बेचने से लाभ हुआ तो रजिस्ट्री आदि सम्भालकर रखें।

क्यों है जरूरी

बैंक का लोन लेने के लिए तीन साल के इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किए हुए होने पर ही आगे कार्रवाई बढ़ पाती है। अनेक काम होते हैं जिसमें टैक्स रिटर्न फाइल (ITR Filing) करना जरूरी माना जाता है और इनकम टैक्स रिटर्न की प्रतियां मांगी जाती है। जैसे कि पासपोर्ट, वीजा, विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने, इंश्योरेंस, गाड़ी का लोन आदि सभी के लिए आपको रिटर्न फाइल करना चाहिए।

 

ये भी पढ़ें –

GST encyclopedia: जानिए इसके बारे में सबकुछ

 

Like and Follow us on :

Google News |Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | Pinterest | Linkedin

सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button