15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस भाषण में पीएम नरेंद्र मोदी ने ‘Demography Mission’ का ऐलान करते हुए कहा कि “देश की जनसांख्यिकी को साजिश के तहत बदला जा रहा है।” उन्होंने मिशन को निश्चित समयसीमा में गंभीर संकट से निपटने के लिए ठोस रूप में काम करने की बात कही।
जनगणना और TFR के आंकड़े
देश में आखिरी census 2011 में हुई थी, अगली जनगणना 2027 में प्रस्तावित है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2021 के अनुसार भारत का Total Fertility Rate (TFR) 2.0 है। बिहार का TFR 3.0, जबकि दिल्ली और पश्चिम बंगाल का 1.4 रहा।
इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स और बॉर्डर बेल्ट की चुनौतियां
2021 में डीजीपी कॉन्फ्रेंस में उत्तर प्रदेश और असम पुलिस ने सीमा से सटे जिलों में demographic changes पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। रिपोर्ट में कहा गया कि नेपाल और बांग्लादेश बॉर्डर इलाकों में आबादी की संरचना में बड़ा बदलाव आया है।
असम पुलिस के अनुसार, 2011-2021 के बीच बांग्लादेश बॉर्डर से 10 किमी के भीतर जनसंख्या वृद्धि 31.45% रही, जो राष्ट्रीय औसत 12.5% और राज्य औसत 13.54% से कहीं अधिक है।
धार्मिक जनसंख्या में बदलाव
2001 में कछार जिले के सीमावर्ती इलाकों में हिंदू आबादी 29,160 और मुस्लिम आबादी 19,957 थी, जबकि 2021 में हिंदू आबादी 48,223 (63%) और मुस्लिम आबादी 27,823 (36%) हो गई।
उत्तर प्रदेश पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, सात बॉर्डर जिलों के 1,047 गांवों में से 303 गांवों में मुस्लिम आबादी 30%-50% और 116 गांवों में 50% से अधिक है।
सुरक्षा और राष्ट्रीयता बढ़ाने के सुझाव
पुलिस अधिकारियों ने सुझाव दिया कि बॉर्डर इलाकों में इंटेलिजेंस ग्रिड मजबूत किया जाए, नए पुलिस स्टेशन खोले जाएं और Village Defence Committees बनाकर स्थानीय आबादी को दूसरी लाइन ऑफ़ डिफेंस बनाया जाए। इसके अलावा NCC units बढ़ाकर और राष्ट्रवाद की भावना जगाकर सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
बॉर्डर बेल्ट में बढ़ते धार्मिक ढांचे
हाल के वर्षों में बॉर्डर इलाकों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह बदलाव न केवल धार्मिक गतिविधियों में वृद्धि दर्शाता है, बल्कि इन क्षेत्रों के सामाजिक ताने-बाने पर भी असर डाल रहा है। इस बढ़ोतरी को लेकर खुफिया एजेंसियां नियमित निगरानी कर रही हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।
स्थानीय आबादी को सुरक्षा तंत्र में शामिल करने की योजना
विशेषज्ञों का सुझाव है कि सीमावर्ती गांवों के निवासियों को ‘दूसरी पंक्ति की सुरक्षा’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाए। इसके लिए Village Defence Committees और NCC units का विस्तार किया जा सकता है। इससे न केवल बॉर्डर सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय युवाओं में राष्ट्रभक्ति और जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ेगी।
जनसंख्या बदलाव पर सामाजिक-आर्थिक असर
सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या संरचना के बदलाव का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और संसाधनों के वितरण पर भी पड़ रहा है। कई इलाकों में भूमि स्वामित्व, रोजगार के अवसर और बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस प्रवृत्ति पर समय रहते ध्यान न दिया गया तो आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में सामाजिक तनाव भी बढ़ सकता है।
ये भी पढ़ें –
15 August 2025: बदलाव, विकास और भविष्य की नई शुरुआत
Like and Follow us on :
Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | Pinterest|Linkedin
