400 रुपए बचे थे खाते में… फिर भी नहीं रुके: अनुपम खेर का कमबैक Read it later

Anupam Kher Journey किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं—NSD से अभिनय सीखकर मुंबई आए, ‘सारांश’ में रोल छिनने वाला था, महेश भट्ट से भिड़े और 28 की उम्र में बुजुर्ग बनकर फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर जीत लिया। आगे 500+ फिल्मों, करियर संकट, फेशियल पैरालिसिस और हॉलीवुड तक का सफर उनके जज़्बे की मिसाल है।

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NSD का लड़का और मुंबई का सपना: कहानी की शुरुआत वहीं से हुई

मुंबई आने वाले हजारों सपनों में कुछ सपने ऐसे होते हैं, जो सिर्फ स्टार बनने के नहीं होते—वे खुद को साबित करने के होते हैं। ऐसी ही एक कहानी एक ऐसे लड़के की है जिसने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय की तालीम ली, बड़े ख्वाब देखे और मेहनत का बोझ अपने कंधों पर उठाकर मुंबई पहुंच गया। उसे एक फिल्म में शानदार किरदार मिला और उसने छह महीने तक पूरी लगन, अनुशासन और जुनून के साथ तैयारी की। उसे लगने लगा था कि अब उसके संघर्ष का पहला बड़ा दरवाजा खुलने वाला है।

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लेकिन फिर अचानक खबर आई कि वह रोल किसी और को दिया जा सकता है। यही वो पल था जब उसकी उम्मीदें हिल गईं। उसे लगा, जैसे मेहनत के छह महीने हवा हो गए। निराशा इतनी बढ़ी कि उसने मुंबई छोड़ने का फैसला कर लिया। जाने से पहले वह आखिरी बार फिल्म के डायरेक्टर महेश भट्ट से मिलने गया—और यही मुलाकात उसकी जिंदगी का सबसे निर्णायक मोड़ बन गई।

महेश भट्ट से टकराव: गुस्से में खरी-खोटी, फिर वही रोल और फिल्मफेयर

उस लड़के ने महेश भट्ट के सामने अपनी बात दबाकर नहीं रखी। उसने गुस्से में उन्हें खरी-खोटी सुना दी। कोई और होता तो शायद करियर की शुरुआत में ही अपनी कहानी खत्म कर बैठता, लेकिन उसकी सच्चाई, हिम्मत और जुनून देखकर महेश भट्ट ने फैसला कर लिया कि यह किरदार वही निभाएगा।

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और फिर 28 साल की उम्र में उसने एक बुजुर्ग का रोल इतने शानदार तरीके से निभाया कि उसे बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद वह कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। यह कहानी है—बॉलीवुड के मशहूर एक्टर अनुपम खेर की।

जन्म शिमला में, जड़ें कश्मीरी पंडित परिवार में

अनुपम खेर का जन्म 7 मार्च 1955 को शिमला (हिमाचल प्रदेश) में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ। उनके पिता पुष्कर नाथ खेर वन विभाग में क्लर्क थे और माता दुलारी खेर गृहिणी थीं। परिवार साधारण था, लेकिन सोच में मेहनत, संस्कार और शिक्षा का महत्व बड़ा था।

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Anupam Kher’s brother Raju Kher and mother Dulari Photo Getty Images)

उनकी स्कूल की पढ़ाई शिमला के डी. ए. वी. स्कूल से हुई। उनके एक छोटे भाई राजू खेर हैं। शिमला की पहाड़ियों में पले-बढ़े अनुपम के सपने बड़े थे, लेकिन सपनों से पहले उन्हें खुद को पहचानना था—और यही पहचान उन्हें थिएटर की तरफ ले गई।

पहली मोहब्बत और पहला किस: ‘मी टू’ का मतलब नहीं समझ पाए थे

अनुपम खेर ने टीवी शो “आप की अदालत” में अपनी जिंदगी का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया था—उनका “पहला किस” वाला किस्सा। उन्होंने बताया था कि ग्यारहवीं कक्षा में उन्हें अपने मोहल्ले में आई एक लड़की से प्यार हो गया। वह लड़की अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ती थी और एक आर्मी ऑफिसर की बेटी थी।

अनुपम और उनके दोस्त विजय सहगल कई महीनों तक साइकिल से उसके पीछे-पीछे जाते रहे। लेकिन अनुपम “इजहार” करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। छोटे शहर का माहौल था—जहां जज्बात दिल में रहते थे और अल्फाज होंठों तक आते-आते रुक जाते थे।

करीब दो महीने बाद दोस्त के कहने पर उन्होंने लड़की से “I Love You” कह दिया। लड़की ने जवाब में “Me Too” कहा। मजेदार बात यह थी कि उस समय अनुपम खेर को अंग्रेजी ज्यादा समझ नहीं आती थी और वह “Me Too” का मतलब फौरन नहीं समझ पाए। बाद में दोस्त ने समझाया कि इसका मतलब है—वह भी उनसे मोहब्बत करती है।

‘I want to kiss you’ और आठ महीने बाद का वादा: फिर शुरू हुई ‘प्रैक्टिस’

इसके बाद उनके दोस्त ने उन्हें लड़की से “I want to kiss you” कहने की सलाह दी। उस दौर में ऐसा कहना बहुत बड़ी बात होती थी। एक महीने बाद अनुपम ने हिम्मत कर यह भी कह दिया। लड़की ने जवाब में कहा कि स्कूल के एनुअल फंक्शन के दिन वह उन्हें किस करेगी।

पर कुछ देर बाद अनुपम को ध्यान आया कि एनुअल फंक्शन में अभी आठ महीने बाकी थे। दोस्त ने मजाक में उन्हें किस की “प्रैक्टिस” करने की सलाह दी। फिर अनुपम ने शीशे के गिलास से अभ्यास शुरू कर दिया—जिससे उनके होंठ कट गए और सूज गए।

सूट की शर्त, घर में किसी ने सूट नहीं पहना था

कहानी में नया मोड़ तब आया जब लड़की ने शर्त रखी कि वह एनुअल फंक्शन में साड़ी पहनकर आएगी और अनुपम खेर को सूट पहनकर आना होगा। अनुपम ने बताया था कि उनके परिवार में पहले किसी ने सूट नहीं पहना था। घर में सूट की मांग सुनकर परिवार हैरान रह गया।

किसी तरह उन्होंने पिता को स्कूल के कार्यक्रम का बहाना देकर राजी किया और सूट सिलवाया। यह सिर्फ सूट नहीं था—यह एक किशोर के आत्मसम्मान और सपनों की पहली “बड़ी तैयारी” थी।

रेलवे ब्रिज, टूटे बल्ब और ‘किस’ का डिजास्टर

तय दिन पर दोनों ने रेलवे ब्रिज के नीचे मिलने का फैसला किया। किस करने से पहले अनुपम और उनके दोस्त ने वहां के बल्ब तक तोड़ दिए ताकि कोई देख न सके। रात करीब साढ़े आठ बजे लड़की साड़ी में पहुंची और अनुपम नीले सूट में पहुंचे।

कुछ देर खामोशी रही। जैसे ही अनुपम किस करने के लिए आगे बढ़े, उसी समय लड़की के घर की लाइट जल गई और उसके पिता दरवाजे पर दिखाई दिए। घबराहट में लड़की ने चेहरा मोड़ लिया और अनुपम खेर का पहला किस उसके होंठों की बजाय उसके कान पर जा लगा। अनुपम ने हंसते हुए कहा था कि उनका पहला किस “डिजास्टर” साबित हुआ।

पढ़ाई में मोड़: अर्थशास्त्र से थिएटर और फिर NSD तक

स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद अनुपम ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला से संबद्ध गवर्नमेंट कॉलेज, संजौली में अर्थशास्त्र की पढ़ाई शुरू की। लेकिन उनका मन थिएटर की तरफ था। इसलिए भारतीय रंगमंच का अध्ययन करने के लिए उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में प्रवेश लिया और अपना पहले वाला कोर्स बीच में ही छोड़ दिया।

इसके बाद उन्होंने अभिनय को गंभीरता से लिया और 1978 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), नई दिल्ली से एक्टिंग की बारीकियां सीखीं। यह प्रशिक्षण उनके लिए “स्टेज” नहीं, “स्क्रीन” की तैयारी भी था—जहां अभिनय की सच्चाई सबसे बड़ी पूंजी होती है।

‘सारांश’ और 28 साल में बुजुर्ग: वही रोल जिसने इतिहास बदल दिया

लंबे संघर्ष के बाद उन्हें फिल्म ‘सारांश’ (1984) में शानदार भूमिका मिली। लेकिन कुछ ही दिनों बाद रोल बदलने की बातें शुरू हो गईं। यही वह समय था जब उन्होंने मायूस होकर मुंबई छोड़ने का फैसला किया और आखिरी बार महेश भट्ट से मिलने गए। गुस्से में खरी-खोटी सुना दी, मगर उनकी सच्चाई और जुनून देखकर महेश भट्ट ने वही रोल उन्हें देने का फैसला किया।

इस फिल्म में अनुपम ने बुजुर्ग पिता का किरदार निभाया, जबकि उनकी उम्र करीब 28 साल थी। फिल्म व्यावसायिक तौर पर बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन समीक्षकों ने उनकी अदाकारी की जमकर तारीफ की। उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला और यही फिल्म उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बनी।

विलेन, कॉमेडी, करेक्टर रोल—हर रंग में खुद को साबित किया

‘सारांश’ के बाद अनुपम ने खुद को सिर्फ “सीरियस एक्टर” के रूप में सीमित नहीं किया। उन्होंने विलेन, कॉमेडी और करेक्टर रोल में खुद को लगातार साबित किया।

  • कर्मा, तेजाब और चालबाज जैसी फिल्मों में उनके नेगेटिव रोल चर्चा में रहे।

  • राम लखन और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे में उनकी कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को खूब पसंद आई।

1990 और 2000 के दशक में भी वह लगातार सफल फिल्मों का हिस्सा रहे। हम आपके हैं कौन..!, कुछ कुछ होता है, ए वेडनसडे!, एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी, द कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया। उन्होंने 500 से अधिक फिल्मों में काम किया है और उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर सहित कई अवॉर्ड मिल चुके हैं।

अमिताभ बच्चन से प्रोफेशनलिज्म का सबक: ‘गर्मी सोचो तो लगती है’

साल 1986 में फिल्म ‘आखिरी रास्ता’ की शूटिंग चल रही थी। चेन्नई की भीषण गर्मी थी—करीब 40-45 डिग्री। ‘सारांश’ की कामयाबी के बाद अनुपम खुद को बड़ा स्टार समझने लगे थे। थोड़ा गुरूर भी आ गया था। उनके मेकअप रूम का AC खराब हो गया और उन्होंने प्रोडक्शन टीम पर काफी गुस्सा किया।

फिर वे सेट पर पहुंचे और वहां देखा कि अमिताभ बच्चन एक कोने में खामोशी से अपनी लाइनों की तैयारी कर रहे थे। आश्चर्य यह था कि इतनी गर्मी में भी अमिताभ ने भारी दाढ़ी, मूंछ, विग, जैकेट और यहां तक कि शॉल भी ओढ़ रखी थी।

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अनुपम से रहा नहीं गया। उन्होंने पूछा, “सर, इतनी भीषण गर्मी में आपने यह सब पहन रखा है, क्या आपको गर्मी नहीं लग रही?” अमिताभ बच्चन मुस्कुराए और बोले,
“अनुपम, गर्मी के बारे में सोचता हूं तो लगती है, नहीं सोचता तो नहीं लगती।”

यह एक लाइन अनुपम का नजरिया बदल गई। उन्हें एहसास हुआ कि कलाकार को सुविधाओं से ज्यादा अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। उस दिन के बाद उन्होंने सेट पर AC या पंखे के लिए कभी हंगामा नहीं किया।

आर्थिक संकट: 2004 में खाते में सिर्फ 400 रुपए, घर-दफ्तर गिरवी

अनुपम खेर ने एक समय बड़ा आर्थिक संकट भी झेला। 2004 के आसपास वह गंभीर आर्थिक परेशानी से गुजर रहे थे। उनके बैंक खाते में उस वक्त महज 400 रुपए बचे थे और वे दिवालिया होने के कगार पर थे।

उन्होंने बताया था कि उस दौर में वे एक बड़ा टीवी प्रोडक्शन हाउस खड़ा करने का सपना देख रहे थे और खुद को टीवी टायकून के तौर पर स्थापित करना चाहते थे। अपने प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने भारी कर्ज लिया। लेकिन बढ़ते ब्याज ने हालात और बिगाड़ दिए। मामला यहां तक पहुंचा कि उन्हें अपना घर और दफ्तर तक गिरवी रखना पड़ा।

दिलचस्प बात यह रही कि उसी दौरान वे बड़े बैनर की फिल्मों में काम कर रहे थे, इसलिए बाहर की दुनिया को उनके संघर्ष का अंदाजा नहीं था। मगर उन्होंने दोबारा हौसले के साथ शुरुआत की और फिर कई फिल्मों में काम करके इस संकट से बाहर निकल गए।

फेशियल पैरालिसिस: करियर पीक पर बीमारी, फिर भी शूटिंग जारी

जब अनुपम का करियर बुलंदी पर था और वे करीब 150 फिल्मों में काम कर चुके थे, तभी उन्हें फेशियल पैरालिसिस हो गया। उन्होंने “आप की अदालत” में बताया था कि एक दिन वे अनिल कपूर के घर खाना खा रहे थे। तभी अनिल की पत्नी सुनीता ने उनसे कहा कि वे एक आंख से पलक नहीं झपका रहे हैं।

पहले उन्हें लगा कि यह थकान होगी। लेकिन अगले दिन ब्रश करते समय पानी अपने आप मुंह से बाहर टपकने लगा। नहाते वक्त साबुन आंख में चला गया। तब उन्हें एहसास हुआ कि मामला गंभीर है।

वे तुरंत फिल्ममेकर यश चोपड़ा के पास पहुंचे। यश चोपड़ा ने उन्हें डॉक्टर के पास भेजा। बॉम्बे हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन ने जांच के बाद बताया कि उन्हें फेशियल पैरालिसिस है और दो महीने तक पूरा आराम करने की सलाह दी।

डॉक्टर ने दवाएं शुरू करने को कहा और काम से दूरी बनाने की हिदायत दी। उसी दिन फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ के सेट पर उनका पहला दिन था—जहां अंताक्षरी वाला मशहूर सीन शूट होना था।

अनुपम ने डॉक्टर की सलाह के बावजूद शूटिंग जारी रखने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि अगर डरकर घर बैठ गए, तो जिंदगी भर बीमारी से डरते रहेंगे। सेट पर पहुंचे तो पहले सलमान खान और माधुरी दीक्षित को लगा कि वे मजाकिया अंदाज में एक्टिंग कर रहे हैं। बाद में उन्होंने टीम को अपनी हालत बताई, लेकिन साफ कहा कि वे काम करने को तैयार हैं।

अनुपम ने कहा था कि जिंदगी कभी-कभी ऐसे इम्तिहान लेती है, जो इंसान को अपनी असली हिम्मत का एहसास कराते हैं।

‘बेस्ट कॉमेडियन’ में रिकॉर्ड: 5 फिल्मफेयर और 3 साल लगातार जीत

अनुपम खेर के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड भी है। फिल्मफेयर अवॉर्ड में ‘बेस्ट कॉमेडियन’ कैटेगरी में सबसे ज्यादा पांच बार जीतने का रिकॉर्ड उनके नाम है। उन्हें यह सम्मान इन फिल्मों के लिए मिला था:

  • राम लखन (1989)

  • लम्हे (1991)

  • खेल (1992)

  • डर (1993)

  • दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995)

खास बात यह रही कि उन्होंने 1992 से 1994 तक लगातार तीन साल यह अवॉर्ड जीतकर अलग मुकाम बनाया। इस कैटेगरी में उनके बाद अभिनेता मेहमूद का नाम आता है, जिन्होंने चार बार यह पुरस्कार जीता।
हालांकि फिल्मफेयर ने 2007 के बाद ‘बेस्ट कॉमेडियन’ की अलग कैटेगरी खत्म कर दी थी।

हॉलीवुड में एंट्री: ‘Silver Linings Playbook’ और ‘Google search me’ वाला किस्सा

अनुपम खेर को हॉलीवुड फिल्म ‘Silver Linings Playbook’ में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में रॉबर्ट डी नीरो, ब्रैडली कूपर और जेनिफर लॉरेंस जैसे कलाकार थे, और डायरेक्टर डेविड ओ. रसेल थे। फिल्म में एक हिंदुस्तानी किरदार की जरूरत थी और अनुपम को इसके लिए ऑडिशन देना था।

उस समय अनुपम राजस्थान के एक छोटे से गांव में शूटिंग कर रहे थे, इसलिए उनका स्काइप से ऑडिशन होना था। करीब 15 साल पहले गांव में स्काइप की व्यवस्था अपने आप में चुनौती थी। किसी तरह कंप्यूटर लगाया गया, लेकिन ऑडिशन के वक्त आवाज काम नहीं कर रही थी। उधर से मैसेज आया—“Next time be more professional.”
अनुपम को गुस्सा आया और उन्होंने जवाब दिया—“Google search me.”

इसके बाद तय हुआ कि टोरंटो में दोबारा ऑडिशन होगा। टोरंटो पहुंचकर वे पूरी तैयारी से बैठे थे, लेकिन फिर तकनीकी खराबी आ गई। उन्हें फोन पर कहा गया कि अगर सुबह तक लिंक नहीं मिला तो रोल हाथ से निकल जाएगा।

तभी होटल के एक बांग्लादेशी वेटर अब्दुल को उन्होंने परेशानी बताई। अब्दुल ने कहा कि उसके पास iPhone 3 है, जिससे वह शूट करके लिंक भेज सकता है। इसी तरह ऑडिशन रिकॉर्ड हुआ और उन्हें रोल मिल गया।

डी नीरो की माफी: ‘I am sorry, I was selfish’

शूटिंग के दौरान जब अनुपम पहली बार रॉबर्ट डी नीरो से मिले, तो उन्होंने भावुक होकर उन्हें गणेश जी की खूबसूरत मूर्ति भेंट की। डी नीरो का रिस्पॉन्स अच्छा रहा। लेकिन सेट पर डी नीरो पूरी तरह अपने किरदार में रहते थे।

एक सीन में डी नीरो का किरदार गुस्से में डॉक्टर बने अनुपम खेर को घर से बाहर निकाल देता है। रिहर्सल में उन्होंने सचमुच धक्का देकर बाहर कर दिया। इसके बाद सीन बदलने की बातें होने लगीं।

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तब अनुपम ने हिम्मत दिखाते हुए कहा,
“आठ लोग सीन में हैं, आपने सिर्फ एक का नजरिया सुना है। मेरे किरदार की भी बात है।”
माहौल में सन्नाटा छा गया। दोबारा रिहर्सल हुई, सीन संतुलन के साथ शूट हुआ। फिर रात ढाई बजे डी नीरो ने उन्हें वैन में बुलाकर कहा,
“I am sorry, I was selfish.”

अनुपम-किरण की लव स्टोरी: दोस्ती से प्यार, फिर 1985 की शादी

अनुपम खेर और किरण खेर की लव स्टोरी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। यह कहानी दोस्ती से शुरू होकर गहरे प्यार तक पहुंची।

अनुपम की पहली शादी एक्ट्रेस मधुमालती कपूर से हुई थी। दोनों की मुलाकात NSD में पढ़ाई के दौरान हुई। 1979 में परिवार की रजामंदी से उन्होंने शादी की, लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं चला और एक साल के भीतर दोनों अलग हो गए।

इसके बाद किरण उनकी जिंदगी में फिर से आईं। अनुपम और किरण की पहली मुलाकात चंडीगढ़ में थिएटर के दिनों में हुई थी। दोनों रंगमंच से जुड़े थे और धीरे-धीरे बहुत अच्छे दोस्त बन गए। करीब दस साल तक उनकी दोस्ती कायम रही। वे एक-दूसरे के राजदार थे। लेकिन तब तक यह सिर्फ दोस्ती थी, प्यार नहीं।

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समय बदला। किरण की शादी बिजनेसमैन गौतम बेरी से हो चुकी थी, लेकिन उनकी शादीशुदा जिंदगी खुशहाल नहीं थी। उधर अनुपम भी अपनी पहली शादी से अलग हो चुके थे।

इसी बीच किरण एक नाटक के सिलसिले में कोलकाता गई थीं। उस समय अनुपम एक फिल्म के लिए सिर मुंडवाए हुए थे। एक शाम जब वे किरण के कमरे से निकल रहे थे, दोनों की नजरें मिलीं। थोड़ी देर बाद अनुपम ने दरवाजा खटखटाया और साफ शब्दों में कहा,
“मुझे लगता है मैं तुमसे प्यार करने लगा हूं।”
उस पल सब कुछ बदल गया।

किरण ने भी अपने दिल की आवाज सुनी। उन्होंने अपनी पहली शादी खत्म की और 1985 में अनुपम खेर से शादी कर ली। आज उनकी शादी को चार दशक से ज्यादा हो चुके हैं। अनुपम ने किरण के बेटे सिकंदर खेर को अपने बेटे की तरह अपनाया।

अपकमिंग प्रोजेक्ट्स: 550वीं फिल्म ‘खोसला का घोसला 2’

अनुपम खेर अब भी सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर की 550वीं फिल्म ‘खोसला का घोसला 2’ की शूटिंग जनवरी में शुरू कर दी है। यह 2006 की चर्चित कल्ट क्लासिक ‘खोसला का घोसला’ का सीक्वल है। फिल्म का निर्देशन उमेश बिष्ट कर रहे हैं और इसमें बोमन ईरानी भी अहम भूमिका में नजर आएंगे।

यह प्रोजेक्ट इस बात का संकेत है कि अनुपम खेर के लिए अभिनय सिर्फ बीते समय की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्तमान का जुनून भी है—और शायद यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।

All Image Credit: Getty Images

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