Kishtwar Cloudburst: 65 की मौत, मचैल माता यात्रा में हाहाकार, 500 लोग दबे, 100 लोग लापता Read it later

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ (kishtwar cloudburst) के चसोती गांव में गुरुवार को बादल फटने और फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी। खून से सने शव, मलबे में दबे घायल और बिखरे अंग इस त्रासदी की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं।

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65 लोगों की मौत, 160 से ज्यादा सुरक्षित

अब तक 65 लोगों की मौत हो चुकी है और 167 से अधिक लोगों को बचाया गया है, जिनमें 38 की हालत गंभीर है। इनमें तीर्थयात्री और सुरक्षा बल के जवान शामिल हैं।

मचैल माता यात्रा पर कहर (kishtwar cloudburst)

चसोती, Machail Mata Yatra का बेस कैंप है। यहां बादल फटने से बसें, टेंट, लंगर और दुकानें बह गईं। भाजपा नेता सुनील शर्मा ने हालात को बेहद गंभीर बताया और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई।

एलजी मनोज सिन्हा ने प्रभावित परिवारों को दिया भरोसा

जम्मू-कश्मीर के Lieutenant Governor Manoj Sinha लगातार राहत और बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं सभी प्रभावित परिवारों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस संकट की घड़ी में सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।” उन्होंने Union Home Minister Amit Shah से भी समन्वय किया, जिन्होंने केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

सेना, पुलिस और स्थानीय लोग मिलकर कर रहे हैं बचाव कार्य

Kishtwar cloudburst के बाद सेना और पुलिस, स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर घायलों को कीचड़ भरे इलाकों से पीठ पर उठाकर अस्पताल पहुंचा रहे हैं। भाजपा नेता सुनील शर्मा ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा, “चोसिटी, जो मचैल यात्रा का बेस कैंप है, वहां हर तरफ तबाही, मौत और घायल दिखाई दे रहे हैं। हालात बेहद खराब हैं और मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।”

अस्पतालों में बेड की कमी, फर्श पर इलाज

इलाके के medical facilities पूरी तरह से ओवरलोड हो गए हैं। बेड की कमी के कारण कई मरीजों का इलाज फर्श पर किया जा रहा है। आसपास के इलाकों से मेडिकल स्टाफ एथोली अस्पताल पहुंचकर घायलों का इलाज कर रहा है। ज्यादातर घायलों को पसली, सिर और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। मेडिकल टीमें कठिन हालात में पूरी कोशिश कर रही हैं।

किश्तवाड़ विधायक ने बताया- रेस्क्यू और अस्पताल शिफ्टिंग जारी

BJP नेता और किश्तवाड़ विधायक शगुन परिहार ने इसे बेहद दुखद हादसा बताया। उन्होंने कहा कि कल मलबे में फंसे लोगों को निकालने की पूरी कोशिश की गई। मौके पर NDRF और SDRF की टीमें सक्रिय रहीं। विधायक ने कहा, “हम प्रयास कर रहे हैं कि जितने अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके और तुरंत अस्पताल भेजा जाए।”

उपमुख्यमंत्री का बयान- मृतकों की संख्या पर बहस ठीक नहीं

जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि मरने वालों की संख्या पर चर्चा करना उचित नहीं है। उन्होंने भावुक होकर कहा, “एक व्यक्ति की मौत हो या 50 लोगों की, दुख समान होता है। मेरी प्रार्थना है कि मां मचैल लापता लोगों को सुरक्षित घर पहुंचाएं।”
उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल 49 लोग ward में और 2 लोग ICU में भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

किश्तवाड़ आपदा में पीड़िता की दर्दनाक आपबीती

जम्मू की 32 वर्षीय स्नेहा आज भी यकीन नहीं कर पा रही हैं कि वह जिंदा बच गईं। घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया, “हम अपनी गाड़ियों के पास सामान रख रहे थे, तभी अचानक जोरदार धमाका हुआ और पहाड़ी के ऊपर cloudburst होते देखा।”

सैलाब ने छीना परिवार, बहा ले गया सब कुछ

स्नेहा ने बताया कि देखते ही देखते सैलाब आया और उनके साथ परिवार के चार सदस्य बह गए। पानी, कीचड़, पत्थर और पेड़ों के साथ उन्हें Chenab river की ओर बहा ले जाया गया। वह एक गाड़ी के नीचे फंस गईं, चारों ओर लाशें थीं, जिनमें कई बच्चों के टूटे गले और कटे हाथ-पैर शामिल थे।

आखिरी उम्मीद भी टूट चुकी थी

“मुझे लगा अब सब खत्म हो गया है,” स्नेहा ने कहा। उनके पिता ने पहले खुद को बचाया और फिर उनकी मदद की। उन्होंने अपनी मां को बिजली के खंभे के नीचे से निकाला, जो गंभीर रूप से घायल और बेहोश थीं।

गांववालों की आंखों के सामने बहा मंदिर का देवालय

स्नेहा ने बताया कि कुछ गांववाले चिनाब नदी में बह गए और हर जगह लाशें बिखरी पड़ी थीं। पूरी पहाड़ी ढह गई थी, यहां तक कि Chittu Mata Temple के ठाकुर जी की मूर्ति भी सैलाब में बह गई। अधिकारियों, पुलिस, सेना, CRPF और स्थानीय लोगों ने मिलकर कई लोगों की जान बचाई।

बादल फटने से मचा कहर, पल भर में तबाही

flash flood और मलबे के तेज बहाव ने वाहनों को बहा दिया और तीर्थयात्रियों के लिए लगा लंगर (community kitchen) भी तबाह कर दिया। जम्मू से आए एक यात्री ने बताया, “हम लंगर के पास की दुकान छोड़कर करीब एक किलोमीटर चले ही थे कि अचानक बादल फटा। पानी और मलबे ने रास्ते में आने वाली हर चीज को बहा दिया। कुछ ही मिनटों में लंगर पूरी तरह गायब हो गया।”

अस्पतालों में बेड की कमी, फर्श पर इलाज

Flash flood में घायल लोगों को एथोली अस्पताल पहुंचाया गया, जहां बेड खत्म होने पर फर्श पर ही इलाज किया गया। कई मरीजों के पैर और पसलियां टूटी हुई हैं।

हेल्पलाइन नंबर और राहत कार्य

DIG डोडा-किश्तवाड़ रेंज श्रीधर पाटिल ने लोगों से हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने की अपील की। सेना, NDRF और स्थानीय लोग मिलकर rescue operation चला रहे हैं।

भौगोलिक स्थिति और खतरा

चसोती मचैल माता मंदिर से 8.5 किमी पैदल दूरी पर है, जबकि किश्तवाड़ शहर से 90 किमी दूर। पहाड़ी इलाके और ग्लेशियर की ढलानें flash flood risk को बढ़ाती हैं।

स्वतंत्रता दिवस से पहले किष्टवाड़ में बड़ा हादसा

Deputy Chief Minister Surinder Choudhary ने कहा कि kishtwar cloudburst का समय बेहद चिंताजनक है, क्योंकि यह हादसा स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक पहले हुआ है। उन्होंने बताया, “यह एक बड़ा बादल फटने का हादसा है… भारी नुकसान हुआ है। मृतकों की सटीक संख्या अभी बताना सही नहीं होगा। घायल लगभग 98-100 के बीच हैं। सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि घायलों को बचाया जाए और उनकी मदद की जाए।”

एयरफोर्स और रेस्क्यू टीमों को किया गया अलर्ट

इस आपदा में बचाव कार्य तेज करने के लिए Air Force को भी अलर्ट कर दिया गया है। Lieutenant Governor Manoj Sinha ने सिविल प्रशासन, पुलिस, सेना, NDRF और SDRF को मिलकर समन्वित तरीके से राहत व बचाव कार्य करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार ने हर संभव मदद का भरोसा दोहराया

सिन्हा ने कहा, “किष्टवाड़ में cloudburst की घटना से दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। सभी संबंधित एजेंसियों को राहत और बचाव कार्य मजबूत करने और प्रभावितों को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए हैं।”

घटनास्थल पर लगातार राहत कार्य जारी

प्रभावित क्षेत्र में अब भी अफरा-तफरी और चिंता का माहौल है। राहतकर्मी दिन-रात मेहनत कर बचे हुए लोगों को ढूंढने और सुरक्षित निकालने में जुटे हैं। Lieutenant Governor हालात की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी जरूरी संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।

किश्तवाड़ में राहत और बचाव कार्य में सेना की तैनाती

जम्मू स्थित सेना के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के अनुसार, Kishtwar cloudburst से प्रभावित चिसोटी गांव में सेना ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। प्रभावित लोगों को relief material, चिकित्सा दल और बचाव उपकरण मुहैया कराए जा रहे हैं।

J&K सीएम ने स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम रद्द किए

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने Kishtwar disaster में भारी जनहानि के चलते स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान होने वाली “ऐट होम” चाय पार्टी और सांस्कृतिक कार्यक्रम को रद्द कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, इस हादसे में अब तक 38 लोगों की मौत हो चुकी है और 200 से अधिक लोग लापता हैं।

कांग्रेस ने राहत कार्य तेज करने की अपील की

कांग्रेस ने cloudburst in Kishtwar से हुई भारी जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त किया और राहत एवं बचाव कार्य में तेजी लाने की अपील की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस त्रासदी में कई लोगों की जान जाना बेहद दुखद है और प्रभावित परिवारों के साथ पूरी संवेदना है।

2 CISF जवानों की मौत, 37 की हालत गंभीर

चिसोटी गांव में आए Kishtwar flash flood में अब तक 2 CISF जवानों समेत 33 लोगों की मौत हो चुकी है। 200 से ज्यादा लोग लापता हैं। करीब 100 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 37 की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर रूप से घायलों का जिला अस्पताल किश्तवाड़ में इलाज जारी है, जबकि पाडर उप-जिला अस्पताल में 70 से 80 अन्य घायलों का उपचार हो रहा है।

पहले भी आई हैं आपदाएं

यह आपदा ठीक 9 दिन बाद आई है जब उत्तराखंड के उत्तरकाशी में फ्लैश फ्लड ने 68 लोगों को लापता कर दिया था।

यात्रा और रूट की जानकारी

हर साल अगस्त में होने वाली मचैल माता यात्रा में हजारों श्रद्धालु आते हैं। यह 25 जुलाई से 5 सितंबर तक चलती है। जम्मू से किश्तवाड़ तक 210 किमी का सफर और पद्दर से चसोती तक 19.5 किमी सड़क मार्ग है।

बचाव के लिए सुझाव
  • यात्रा से पहले मौसम का अलर्ट चेक करें।

  • भीड़ वाले इलाकों में ऊंचाई पर न जाएं।

  • स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।

मचैल माता यात्रा में सुरक्षित कैसे रहें: तीर्थयात्रियों के लिए जरूरी गाइड

1. मौसम का अलर्ट चेक करें
यात्रा से पहले IMD Weather Update जरूर देखें। पहाड़ी इलाकों में flash flood और cloudburst का खतरा ज्यादा होता है।

2. प्रशासन के निर्देशों का पालन करें
स्थानीय पुलिस, सेना और प्रशासन से मिली चेतावनी या रूट चेंज को नजरअंदाज न करें।

3. भीड़ से दूर सुरक्षित जगह चुनें
बेस कैंप और लंगर जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों से थोड़ी दूरी पर रुकें, ताकि आपात स्थिति में जल्दी निकल सकें।

4. जरूरी सामान साथ रखें
फर्स्ट एड किट, पावर बैंक, टॉर्च और पानी की बोतल हमेशा अपने बैग में रखें।

5. नदी किनारे न रुकें
Machail Mata Yatra के दौरान पानी के तेज बहाव वाले इलाकों से दूर रहें। अचानक पानी का स्तर बढ़ सकता है।

6. हेल्पलाइन नंबर सेव करें
राहत और बचाव टीम से तुरंत संपर्क करने के लिए हेल्पलाइन नंबर मोबाइल में सेव रखें।

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