Waqf Property Law Changes को लेकर आज संसद में जबरदस्त हलचल है। सरकार वक्फ कानून में कई बड़े बदलाव करने की तैयारी में है, जिसे लेकर Muslim community और विपक्षी दलों में गहरी नाराज़गी है। देश में वक्फ बोर्ड के पास इतनी ज़मीन है कि दिल्ली जैसे तीन शहर बसाए जा सकते हैं।
सरकार का कहना है कि ये बदलाव transparency और accountability के लिए जरूरी हैं, लेकिन विरोध करने वाले इसे धार्मिक अधिकारों पर हस्तक्षेप मान रहे हैं।
इस बिल का सीधा संबंध देश की उन संपत्तियों से है, जो Waqf Board के पास मौजूद हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में Railway और Defence Ministry के बाद सबसे ज्यादा जमीन Waqf Board के पास है — करीब 9.4 लाख एकड़। इतनी जमीन में दिल्ली जैसे तीन शहर बस सकते हैं।
वक्फ संपत्तियों पर क्यों हो रहा है नया कानून?
सरकार का दावा है कि वक्फ संपत्तियों के उपयोग, संरक्षण और पारदर्शिता के लिए नया कानून जरूरी है। सरकार की मंशा है कि इस बिल के जरिए भूमि विवाद, अवैध कब्जा, और राजनीतिक दखल जैसे मामलों को सुलझाया जाए।
लेकिन Muslim Community और विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इस कानून के जरिए वक्फ अधिकारों को सीमित करना चाहती है।
अब तक वक्फ संशोधन बिल पर क्या हुआ है?
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8 अगस्त 2024: लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश हुआ
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देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू
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बिल को JPC (Joint Parliamentary Committee) को भेजा गया
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27 जनवरी 2025: NDA सांसदों के 14 सुझाव स्वीकार, विपक्ष के संशोधन खारिज
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13 फरवरी 2025: JPC रिपोर्ट संसद में रखी गई
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19 फरवरी 2025: कैबिनेट से मिली मंजूरी
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2 अप्रैल 2025: संसद में बहस और वोटिंग
वक्फ होता क्या है? (What is Waqf in Islam?)
‘वक्फ’ शब्द अरबी के ‘वकुफा’ से बना है, जिसका अर्थ होता है: रोकना, ठहराना या ईश्वर को समर्पित करना।
जब कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति धार्मिक कार्य या अल्लाह के नाम पर दान करता है, तो वह वक्फ संपत्ति बन जाती है।
इस संपत्ति को बेचा नहीं जा सकता, न ही इसका इस्तेमाल धार्मिक उद्देश्य के अलावा किसी और काम में किया जा सकता है।
Prophet Muhammad के समय वक्फ का पहला उदाहरण 600 खजूर के पेड़ का बाग था, जिससे मदीना के गरीबों की मदद होती थी।
भारत में वक्फ संपत्तियों का इतिहास और वर्तमान स्थिति
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वक्फ की शुरुआत 12वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के समय हुई
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आज देशभर में Waqf Properties पर मस्जिदें, मदरसे, कब्रिस्तान, और यतीमखाने हैं
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लाखों एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा या खाली पड़ी संपत्ति है
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Waqf Board के पास लगभग 9.4 लाख एकड़ ज़मीन है
मुस्लिम संगठनों का विरोध क्यों?
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AIMPLB (All India Muslim Personal Law Board) ने इस बिल को असंवैधानिक बताया
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शुक्रवार की नमाज़ में काली पट्टी पहनने का आह्वान
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आरोप है कि सरकार वक्फ बोर्ड की स्वतंत्रता को खत्म करना चाहती है
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कई संगठनों ने कहा, यह कानून धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है
सरकार का पक्ष और रणनीति
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गृह मंत्री Amit Shah ने NDA सहयोगियों से मुलाकात की
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TDP और JDU जैसे दलों ने बिल के समर्थन का वादा किया
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सरकार का कहना है कि Waqf Governance को मजबूत किया जाएगा
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नकली दान, फर्ज़ी कब्जों और कालेधन के उपयोग पर रोक लगेगी
रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद वक्फ बोर्ड के पास है सबसे ज्यादा जमीन
क्या आप जानते हैं कि भारत में Waqf Board के पास देश की तीसरी सबसे बड़ी जमीन है? यहां जानिए तुलना के साथ पूरी डिटेल:
📊 किसके पास कितनी ज़मीन है?
भारतीय रेलवे: कुल जमीन — 33 लाख एकड़
रक्षा मंत्रालय (सेना): कुल जमीन — 17 लाख एकड़
वक्फ बोर्ड: कुल जमीन — 9.4 लाख एकड़
🏢 वक्फ बोर्ड के पास कुल कितनी संपत्तियां हैं?
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अचल संपत्तियां (Immovable Properties): 8.72 लाख
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चल संपत्तियां (Movable Properties): 16,000
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कुल संपत्ति का अनुमानित मूल्य: 1.2 लाख करोड़ रुपए
Source: Government of India, Waqf Council of India, Waqf Asset Management System of India
यह आंकड़े दिखाते हैं कि Waqf Properties in India न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी कितनी महत्वपूर्ण हैं।
भारत में वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन कैसे होता है? जानिए कौन सा कानून लागू होता है
Waqf Property Management भारत में एक विशेष कानूनी ढांचे के तहत किया जाता है। आजादी के बाद पहली बार 1954 में Waqf Act लागू किया गया। इसके बाद इसमें 1995 और फिर 2013 में बड़े संशोधन हुए।
Waqf Board का गठन और जिम्मेदारी
इन संशोधनों के तहत एक Waqf Board (वक्फ बोर्ड) का गठन किया गया, जो इस्लाम से जुड़ी religious properties का प्रबंधन करता है। अधिकतर मुस्लिम धार्मिक स्थल वक्फ एक्ट के तहत आते हैं। हालांकि, Ajmer Sharif Dargah जैसे कुछ स्थान इससे बाहर हैं और इनके लिए Dargah Khwaja Sahib Act 1955 लागू होता है।
Waqf Governance Structure
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केंद्र सरकार को वक्फ से जुड़े मामलों पर सलाह देने के लिए Central Waqf Council बनाई गई है।
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राज्यों में आम तौर पर दो वक्फ बोर्ड होते हैं – Sunni Waqf Board और Shia Waqf Board।
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हर बोर्ड में एक Chairman, दो state-nominated members, और अन्य मुस्लिम समुदाय से जुड़े विशेषज्ञ जैसे MPs, MLAs, Advocates, Planners और Scholars शामिल होते हैं।
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वक्फ प्रॉपर्टीज का रिकॉर्ड रखने के लिए एक Survey Commissioner होता है।
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सभी सदस्यों का कार्यकाल 5 साल का होता है।
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राज्य सरकार एक Deputy Secretary level IAS Officer को बोर्ड का CEO नियुक्त करती है, जो बोर्ड के निर्णयों को क्रियान्वित करता है।
वक्फ विवादों के लिए विशेष ट्रिब्यूनल (Waqf Property Law Changes)
Waqf Disputes के निपटारे के लिए विशेष अदालत बनाई गई है, जिसे Waqf Tribunal कहा जाता है। यही संस्था वक्फ से जुड़े कानूनी विवादों को सुलझाने का अधिकार रखती है।
Waqf Amendment Bill 2025 संसद में पेश हो चुका है और इस पर बहस भी तेज हो चुकी है। जहां एक ओर सरकार इसे सुधार की दिशा में एक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और मुस्लिम संगठनों को इसमें धार्मिक स्वतंत्रता पर आघात नजर आ रहा है।
Waqf Act में Proposed Amendments के तहत कुल 14 बदलाव किए जा रहे हैं, जिन्हें वक्फ संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है।
वक्फ एक्ट में होंगे 14 बड़े बदलाव, तीन अहम कैटेगरी में किया जाएगा संशोधन
Waqf Amendment Bill 2025 के जरिए सरकार वक्फ कानून में तीन प्रमुख क्षेत्रों में कुल 14 अहम बदलाव करने जा रही है। इनमें वक्फ बोर्ड की संरचना, संपत्ति के प्रबंधन और विवादित संपत्तियों के निपटारे से जुड़े नियम शामिल हैं।
🏛️ 1. वक्फ बोर्ड की संरचना में बदलाव
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Article 9 और 14 में संशोधन के तहत अब 2 महिला सदस्यों को बोर्ड में शामिल करना अनिवार्य होगा।
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बोर्ड में 2 गैर-मुस्लिम सदस्य भी होंगे।
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शिया और सुन्नी सहित पिछड़े मुस्लिम समुदायों को भी सदस्यता दी जाएगी।
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बोहरा और अगखानी मुस्लिम समुदायों के लिए अलग वक्फ बोर्ड बनाया जाएगा।
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केंद्र सरकार अब Central Waqf Council में लोकसभा और राज्यसभा के दो-दो सांसद रख सकेगी, चाहे वे मुस्लिम हों या नहीं।
🏠 2. वक्फ प्रॉपर्टी पर नियंत्रण के नए नियम
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वक्फ संपत्तियों का ऑडिट अब CAG या सरकार द्वारा नियुक्त ऑडिटर करेंगे।
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प्रॉपर्टी का सर्वे अब Revenue Officer की बजाय District Collector के जिम्मे होगा।
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बोर्ड को अपनी सभी प्रॉपर्टीज को डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के ऑफिस में रजिस्टर कराना अनिवार्य होगा।
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यदि कलेक्टर किसी वक्फ प्रॉपर्टी को सरकारी भूमि मानता है, तो वह इसे रिकॉर्ड में बदलकर राज्य सरकार को रिपोर्ट देगा।
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जब तक कलेक्टर रिपोर्ट नहीं देगा, तब तक वक्फ बोर्ड को उस प्रॉपर्टी पर नियंत्रण नहीं मिलेगा।
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अब बिना वैध दस्तावेज के कोई प्रॉपर्टी वक्फ संपत्ति नहीं मानी जाएगी। पहले केवल मौखिक बयान या वक्फनामे से मस्जिद या मकबरे की जमीन वक्फ घोषित हो जाती थी — अब ऐसा नहीं होगा।
⚖️ 3. विवादित वक्फ प्रॉपर्टीज के निपटारे के नियम
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धारा 40 को खत्म किया जाएगा, जिसके तहत वक्फ बोर्ड किसी भी संपत्ति को बिना विवाद के अपनी संपत्ति घोषित कर सकता था।
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अब Waqf Tribunal के फैसलों को सिविल कोर्ट या हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।
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पहले वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला अंतिम माना जाता था।
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कानून लागू होने के बाद, कोई भी सरकारी संस्था वक्फ संपत्ति का दावा तभी कर सकेगी जब उसके पास पूरे दस्तावेज और वैध प्रमाण हों।
ये प्रस्तावित बदलाव Waqf Act in India को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में सरकार का कदम बताए जा रहे हैं, वहीं मुस्लिम संगठनों में इन पर तीखा विरोध भी देखा जा रहा है।
वक्फ एक्ट में संशोधन की जरूरत क्यों महसूस हुई? जानिए प्रमुख तर्क
Waqf Act Petition से जुड़े मामलों में 2022 से अब तक देश की विभिन्न High Courts में लगभग 120 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें से लगभग 15 याचिकाएं मुस्लिम समुदाय की ओर से दाखिल की गई थीं।
इन याचिकाओं में मौजूदा Waqf Act India के कुछ प्रावधानों को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई गईं, खासकर Section 40 को लेकर।
प्रमुख आपत्तियां और बदलाव की मांगें:
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Section 40 वक्फ को किसी भी संपत्ति को अपनी घोषित करने का अधिकार देता है, और इसका फैसला सिर्फ Waqf Tribunal ही करता है।
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इस फैसले को सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती, जिससे आम लोगों के लिए Waqf Authority के खिलाफ कानूनी लड़ाई मुश्किल हो जाती है।
याचिकाओं में प्रमुख 5 मांगें:
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Uniform Law for Minority Trusts: मुस्लिम, जैन, सिख जैसे सभी अल्पसंख्यक समुदायों के धार्मिक ट्रस्टों के लिए एक समान कानून हो।
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Civil Tribunal Preference: वक्फ से जुड़े मामलों के लिए धार्मिक आधार पर अलग ट्रिब्यूनल न बने, फैसला civil laws से किया जाए।
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Penalties for Misuse: वक्फ प्रॉपर्टी बेचने वाले बोर्ड सदस्यों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान हो।
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Financial Accountability: सरकार वक्फ अधिकारियों को वेतन देती है, लेकिन मस्जिदों से कोई रेवेन्यू नहीं आता। ऐसे में वक्फ के आर्थिक मामलों पर सरकारी नियंत्रण हो।
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Inclusive Representation: वक्फ बोर्ड में Shia, Bohra Muslims और Muslim women को भी प्रतिनिधित्व मिले।
Waqf Law Amendment से मुस्लिम समुदाय के एक वर्ग में असंतोष क्यों है? जानिए 6 प्रमुख चिंताएं
Waqf Law Amendment Concerns को लेकर मुस्लिम समाज के एक बड़े हिस्से में गहरी नाराज़गी देखी जा रही है। संशोधित वक्फ एक्ट के कुछ प्रस्तावों को लेकर 6 मुख्य आपत्तियां सामने आई हैं, जो धार्मिक, सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण से काफी गंभीर मानी जा रही हैं।
1. Waqf Properties पर कानूनी विवाद बढ़ने का डर
संशोधन में कहा गया है कि अगर कोई वक्फ संपत्ति सही तरीके से रजिस्टर नहीं है, तो 6 महीने के भीतर वक्फ बोर्ड उस पर कोई legal claim नहीं कर सकता।
Law expert Faizan Mustafa के अनुसार, भारत में कई वक्फ संपत्तियां 500 से 600 साल पुरानी हैं, जिनके पास पुख्ता कागजात नहीं हैं। ऐसे में मस्जिद, कब्रिस्तान और मदरसे अब कानूनी विवादों में फंस सकते हैं।
2. कब्जे को वैध करने का खतरा
नए बदलावों में Section 107 को हटाया जा रहा है और वक्फ संपत्तियों को Limitation Act 1963 के दायरे में लाने का प्रस्ताव है।
Retired officer Akramul Jabbar Khan के अनुसार, यदि किसी ने 12 साल या उससे अधिक समय से वक्फ संपत्ति पर कब्जा कर रखा है, तो अब वक्फ बोर्ड उस पर legal action नहीं ले पाएगा।
3. सरकारी नियंत्रण बढ़ने की आशंका
संशोधन के बाद कलेक्टर को यह अधिकार होगा कि वह तय करे कि कौन-सी संपत्ति Waqf Property है और कौन-सी नहीं।
Former Delhi Minorities Commission chief Zafarul-Islam का कहना है कि इससे “Collector Raj” शुरू हो जाएगा और स्थानीय अधिकारी अपनी मर्जी से निर्णय ले सकेंगे।
4. वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर सवाल
प्रस्ताव है कि वक्फ बोर्ड में non-Muslim members भी शामिल किए जाएंगे। जबकि इसी बिल में कहा गया है कि वक्फ के लिए प्रॉपर्टी वही दान कर सकता है जो कम से कम 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा हो।
Zafarul-Islam इस विरोधाभास को अस्वीकार्य मानते हैं।
5. वक्फ डीड की अनिवार्यता इस्लामी परंपरा के विरुद्ध
बिल में मौखिक वक्फ (Waqf by User) को अमान्य करने का प्रावधान है, जबकि Islamic traditions में मौखिक रूप से मस्जिदों और धार्मिक संपत्तियों का वक्फ स्वीकार्य रहा है।
अब बिना written waqf deed, कोई संपत्ति वक्फ नहीं मानी जाएगी — जिससे कई पुरानी धार्मिक संपत्तियों की वैधता पर सवाल उठ सकता है।
6. वक्फ ट्रिब्यूनल की ताकत कमजोर होगी
Supreme Court advocate Fuzail Ayyubi के मुताबिक, संशोधित कानून के अनुसार Waqf Tribunal Authority को अंतिम निर्णय देने का अधिकार खत्म हो जाएगा।
इसका असर ऐसा होगा जैसे NGT को पर्यावरण और ITAT को टैक्स मामलों में अंतिम निर्णय न लेने दिया जाए।
Waqf Bill के राजनीतिक मायने: सरकार और बीजेपी को क्या फायदा मिल सकता है?
Waqf Bill Political Impact को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों के बीच गहरी चर्चा चल रही है।
Professor Mujibur Rehman, लेखक – ‘Shikwa-e-Hind: The Political Future of Indian Muslims’, के अनुसार, वक्फ कानून में प्रस्तावित बदलाव बहुसंख्यकवादी राजनीति को बढ़ावा दे सकते हैं। उनका मानना है कि ये केवल Muslim Property Control Debate नहीं है, बल्कि मुस्लिम समुदाय को अप्रत्यक्ष रूप से majority influence में लाने की कोशिश भी मानी जा सकती है।
वहीं, Political Analyst Rasheed Kidwai का कहना है कि सरकार के हर कदम के पीछे दो उद्देश्य होते हैं – एक legal intent और दूसरा political messaging। उनके मुताबिक, यह बिल BJP core voter base को मजबूत करने के नैरेटिव का हिस्सा हो सकता है, हालांकि इसका असर कितना गहरा और प्रभावी होगा, यह भविष्य तय करेगा।
Waqf Bill को लेकर लगे आरोपों पर सरकार का पक्ष क्या है? जानिए ऑफिशियल स्टैंड
Waqf Bill Government Stand को लेकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह विधेयक किसी भी तरह से धार्मिक संस्थाओं के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करता। सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह 2006 की Sachar Committee Report की सिफारिशों पर आधारित है।
रिपोर्ट में बताया गया था कि देशभर में वक्फ प्रॉपर्टी से Waqf Property Revenue करीब ₹12,000 करोड़ सालाना हो सकता था, लेकिन मौजूदा समय में इससे महज ₹200 करोड़ की आमदनी हो रही है। ऐसे में प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सिस्टम को पारदर्शी बनाना बेहद जरूरी है।
8 अगस्त को लोकसभा में बिल पेश करते समय Parliamentary Affairs और Minority Affairs Minister Kiren Rijiju ने कहा कि:
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बिल का उद्देश्य religious bodies में दखल देना नहीं है।
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इसका मकसद Muslim women और backward Muslims को वक्फ बोर्ड में प्रतिनिधित्व देना है।
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वक्फ से जुड़े विवादों को 6 महीने में निपटाने का प्रावधान इसमें शामिल किया गया है।
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यह कानून वक्फ संपत्तियों से जुड़े corruption और mismanagement को रोकने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।
31 मार्च को रिजिजू ने यह भी कहा कि, “कुछ लोग मुस्लिम समुदाय को गलत जानकारी देकर गुमराह कर रहे हैं कि सरकार उनकी masjid या kabristan छीन लेगी, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है। यह सिर्फ एक political propaganda है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि वक्फ को रेगुलेट करने वाले कानून pre-independence era से ही अस्तित्व में हैं।
Waqf Properties Ownership Dispute: 31 हजार से अधिक मामले अभी भी लंबित
भारत में वक्फ संपत्तियों पर Ownership Rights को लेकर स्थिति बेहद जटिल बनी हुई है। हजारों मामलों का निपटारा अभी तक नहीं हो पाया है, जिससे वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली और संपत्ति प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं।
🔹 WAMSI पोर्टल पर अब तक 58,000+ याचिकाएं वक्फ संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़ी दर्ज की जा चुकी हैं।
🔹 12,700 से अधिक मामले देश के विभिन्न राज्यों के वक्फ बोर्डों में लंबित हैं।
🔹 18,000+ केस अभी भी Waqf Tribunals में पेंडिंग हैं, जिनका फैसला आना बाकी है।
🔹 165 मुकदमे सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न High Courts में लंबित हैं।
🔹 सबसे गंभीर स्थिति यह है कि 4.35 लाख से अधिक वक्फ प्रॉपर्टीज ऐसी हैं, जिनके मालिकाना हक का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है।
Source: Government of India, Waqf Council of India, Waqf Asset Management System of India
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में वक्फ संपत्तियों को लेकर property dispute और legal complexities कितनी गंभीर हैं, और इन्हें हल करने के लिए Waqf Property Law Changes एक मजबूत और पारदर्शी प्रणाली की जरूरत है।
Waqf Bill पास होगा या नहीं? जानिए लोकसभा-राज्यसभा में सरकार की नंबर गेम
Waqf Bill Lok Sabha Majority के लिए केंद्र सरकार को साधारण बहुमत चाहिए। यानी लोकसभा में 543 में से कम से कम 272 सांसदों का समर्थन और राज्यसभा में 245 में से 123 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
🔹 लोकसभा में सरकार की स्थिति:
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BJP के पास 240 सांसद हैं।
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NDA की सहयोगी पार्टियां जैसे TDP (16), JDU (12), शिवसेना शिंदे गुट (7) और LJP (रामविलास) (5) का समर्थन जरूरी होगा।
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RLD (2), JDS (2) और अपना दल (सोनेलाल) (1) जैसे छोटे सहयोगी भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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सभी प्रमुख दलों ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
🔹 राज्यसभा में समर्थन समीकरण:
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राज्यसभा की 9 सीटें खाली हैं, यानी वोटिंग 236 सदस्यों पर होगी।
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सरकार को जीत के लिए कम से कम 119 सांसदों की जरूरत होगी।
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BJP के पास 96 सदस्य हैं और NDA सहयोगियों के पास 19 सीटें हैं।
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ऐसे में सरकार को 6 Nominated MPs का समर्थन जुटाना अहम होगा।
वक्फ संशोधन बिल 2025 को लेकर सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार नियंत्रण की बात कह रही है, जबकि मुस्लिम समुदाय का एक वर्ग इसे धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप मान रहा है। वक्फ संपत्तियों पर मालिकाना विवाद, कानून की जटिलताएं और राजनीतिक नफे-नुकसान इस बिल को संवेदनशील बना देते हैं। अब देखना होगा कि संसद में यह विधेयक पास होकर कितना असर डालता है।
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