किस्सा Kalyan Singh का:कहा था, मैंने राम जन्मभूमि के लिए सत्ता को ठोकर मार दी‚ यही अंतिम इच्छा है मेरे जीतेजी मंदिर बने

मैंने राम जन्मभूमि के लिए सत्ता को ठोकर मार दी
1991 में जब सीएम बनने के बाद कल्याण सिंह अयोध्या पहुंचे थे। बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार उस पल को याद कर बताते हैं कि राम मंदिर के निर्माण में कल्याण सिंह ने जो पराक्रम  दिखाया उस दौरान शायद ही कोई और मंत्री कर पाता।

 

कल्याण सिंह (Kalyan Singh) जून 1991 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहने से पहले अयोध्या में मौजूद लाखों कारसेवकों पर गोलियां नहीं चलाने का आदेश दिया था।

कल्याण ने अधिकारियों से कहा था कि भले ही सरकार का बलिदान दे दिया जाए, फायरिंग नहीं होनी चाहिए। ऐसा ही कुछ बाबरी विध्वंस के दिन हुआ था।

छह दिसंबर को अधिग्रहीत परिसर में सर्वदेव अनुष्ठान के लिए जमा हुए लाखों कारसेवकों ने बाबरी ढांचे को मलबे में बदल दिया।

बाद में कल्याण सिंह ने घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनके घनिष्ठ रहे बीजेपी नेता और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार उन्हें याद कर काफी इमोशनल हो गए थे।

उन्होंने कहा कि 92 की घटना में कल्याण सिंह ने जो साहस, निडरता और बलिदान दिखाया, वह शायद ही कोई और कर सकता था।

जब आप सीएम बनेंगे तभी ढांचा टूटेगा इस पर कल्याण हंस पड़े थे
1991 में मुख्यमंत्री बनने के बाद कल्याण सिंह का अयोध्या के रिकाबगंज में स्वागत किया गया था।

 

रामविलास वेदांती- मैंने कल्याण सिंह (Kalyan Singh) से कहा, जब आप सीएम बनेंगे तभी ढांचा टूटेगा इस पर कल्याण हंस पड़े थे

पूर्व सांसद और राम मंदिर आंदोलन के सक्रिय सदस्य रामविलास वेदांती के अनुसार कल्याण सिंह जब अयोध्या आते थे तो हमसे ही बात करते थे। हमने उनसे एक साल पहले बातचीत की थी जब बाबरी विध्वंस नहीं हुआ था।

कल्याण सिंह ने हमें बताया कि अशोक सिंघल कहते हैं, बाबरी विध्वंस तक मंदिर निर्माण को लेकर कोई काम नहीं हो सकता। तब हमने कल्याण से कहा, ‘यह तब होगा जब आप उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे।’

तब कल्याण सिंह हंस पड़े और बोले, आप कैसे कह रहे हैं कि मैं उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनूंगा।

अगर बीजेपी की सरकार आती है तो मैं मुख्यमंत्री क्यों बनूंगा? आप इस मामले में कैसे विश्वास करते हैं? मैंने जवाब दिया कि मैं जानता हूं कि जब बीजेपी की सरकार बनेगी तो आप मुख्यमंत्री बनेंगे।

इस विषय पर हम कई बार अटलजी और अशोक सिंघल से बातचीत कर चुके हैं। फिर जब वे मुख्यमंत्री बने तो अयोध्या आ गए। उन्होंने मुझसे मुलाकात की और कहा कि आपने जो कहा वो सच हो गया। जब मैंने पूछा कि क्या  अब ढांचा गिरेगा या नहीं, तो उन्होंने कहा, ढांचा जरूर गिरेगा.

मुख्यमंत्री बनने के बाद कभी हेलीकॉप्टर से अयोध्या नहीं आए
बाबरी ढांचा गिरने के बाद जब कल्याण सिंह पहली बार अयोध्या पहुंचे तो दिगंबर अखाड़े में उनका भव्य स्वागत किया गया। अखाड़े के संत मानते हैं कि कल्याण के सहयोग के बिना यह संभव नहीं हो पाता।

 

मुख्यमंत्री बनने के बाद कभी हेलीकॉप्टर से अयोध्या नहीं आए

रामविलास वेदांती बताते हैं कि कल्याण सिंह (Kalyan Singh) जून 1991 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहने से पहले अयोध्या में मौजूद लाखों कारसेवकों पर गोलियां नहीं चलाने का आदेश दिया था। ) में एक खास बात थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद अयोध्या में कैबिनेट के साथ ही मंदिर निर्माण की शपथ लेने का फैसला लिया गया। मैं दोपहर 2 बजे तक कार्यक्रम में उनका इंतजार करता रहा, लेकिन सुबह सात बजे लखनऊ से निकले कल्याण सिंह शाम पांच बजे अयोध्या पहुंचे।

लखनऊ से अयोध्या तक उनका भव्य स्वागत किया गया। कल्याण सिंह ने शाम सात बजे अयोध्या में महासभा को भी संबोधित किया। कल्याण सिंह ने हमें बताया कि मैं कभी भी हेलीकॉप्टर से अयोध्या नहीं आऊंगा। यह वह भूमि है जहां सड़क मार्ग से ही आना हमारा सौभाग्य होगा।

 

अयोध्या आने पर दिगंबर अखाड़ा जरूर आते थे कल्याण

नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास का कहना है कि कल्याण सिंह (Kalyan Singh) जून 1991 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहने से पहले अयोध्या में मौजूद लाखों कारसेवकों पर गोलियां नहीं चलाने का आदेश दिया था। ) साल 2010 में राम मंदिर विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद मंदिर आए थे। कहा- मैंने राम जन्मभूमि के लिए सत्ता को ठुकरा दिया। ये मेरी अंतिम इच्छा है कि मेरे जीवन काल में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बने।

दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास का कहना है कि उन्हें हमारे गुरु रामचंद्र दास परमहंस से बहुत लगाव था। वह जब भी अयोध्या आते थे तो दिगंबर अखाड़े में जरूर आते थे।

ढांचा गिराए जाने के बाद उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसंबर 1992 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनके जैसा साहसी व्यक्ति ही ऐसा कर सकता है।

 

कल्याण ने यदि कारसेवकों पर गोली चलाने का अदेश दे दिया होता तो तस्वीर कुछ और होती… हिंदू पीढ़िया उन्हेें  सदैव याद रखेंगी

श्री राम वल्लभकुंज के मुखिया स्वामी राजकुमार दास का कहना है कि कल्याण सिंह (Kalyan Singh) को हम कभी नहीं भूल पाएंगे. वे अमर रहेंगे। अगर उन्होंने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया होता तो आज तस्वीर कुछ और होती। कोई भी हिंदू, खासकर राम भक्त उनके इस उपकार को पीढ़ियों तक नहीं भूल पाएगा।

राम मंदिर आंदोलन के नायक और विहिप प्रवक्ता रामचंद्र दास परमहंस के शिष्य शरद शर्मा ने हमेशा दिगंबर अखाड़े में कल्याण सिंह का स्वागत किया करते थे।

यहां के लोग बोले कल्याण सिंह से मिलकर एक ऊर्जा का संचार होता है। हिंदुत्व के महान नायक के रूप में वे अमर रहेंगे।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य आदि के साथ भी उनके बहुत घनिष्ठ संबंध रहे हैं।

 

 

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