मणिशंकर अय्यर के बयानों से कांग्रेस में खलबली: बोले, पवन खेड़ा जयराम का तोता, वेणुगोपाल को ‘राउडी’ बना दिया Read it later

Mani Shankar Aiyar controversy एक बार फिर कांग्रेस की सियासत के केंद्र में आ गई है। वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी, शशि थरूर, पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश पर खुलेआम सवाल उठाकर पार्टी के भीतर नई बहस छेड़ दी। साथ ही उन्होंने INDIA ब्लॉक की कमान और केरल चुनाव पर भी तीखे बयान दिए।

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‘मैं गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी हूं, राहुलवादी नहीं’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Mani Shankar Aiyar ने एक टीवी इंटरव्यू में पार्टी की मौजूदा नेतृत्व शैली और अपने संबंधों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि Rahul Gandhi भूल गए हैं कि वे अभी भी पार्टी के सदस्य हैं। अय्यर ने खुद को “गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी” बताते हुए साफ कहा कि वे “राहुलवादी” नहीं हैं।

यह बयान सीधे तौर पर यह संकेत देता है कि वे विचारधारा को महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और Rajiv Gandhi की विरासत से जोड़ते हैं, लेकिन राहुल गांधी की शैली और फैसलों से दूरी भी दिखाना चाहते हैं। उनके इस कथन ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और विचारधारा पर एक नई बहस खड़ी कर दी है।

थरूर एंटी-पाकिस्तान हैं, अगला विदेश मंत्री बनना चाहते हैं: अय्यर

इंटरव्यू के दौरान अय्यर ने कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि शशि थरूर “एंटी-पाकिस्तान” रुख रखने वाले नेता हैं और वे खुद को देश का अगला विदेश मंत्री बनने के रूप में देखते हैं।

अय्यर का यह दावा न सिर्फ थरूर की विदेश नीति पर उनके नजरिए को चुनौती देता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि पार्टी के भीतर भविष्य की भूमिकाओं को लेकर अंदरूनी प्रतिस्पर्धा और असंतोष मौजूद है। खास बात यह है कि थरूर को यूएन और विदेश नीति के मुद्दों पर विशेषज्ञ माना जाता रहा है, ऐसे में अय्यर का यह बयान कांग्रेस के बौद्धिक तबके में भी चर्चा का विषय बन गया है।

पवन खेड़ा ‘प्रवक्ता नहीं, जयराम रमेश का तोता’: तीखा निजी हमला

अय्यर ने कांग्रेस प्रवक्ता Pawan Khera पर हमला बोलते हुए कहा कि वे प्रवक्ता कम और Jairam Ramesh के “तोते” अधिक हैं। उनके अनुसार पवन खेड़ा वही बातें दोहराते हैं, जो जयराम रमेश उन्हें बताते हैं।

अय्यर ने यहां तक कहा कि पिछले दो साल से पवन खेड़ा उन पर व्यक्तिगत आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर कांग्रेस को अपने आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में पवन खेड़ा के अलावा कोई और चेहरा नहीं मिलता, तो पार्टी की हालत वैसी ही रहेगी जैसी आज दिखाई दे रही है। जयराम रमेश पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य सिर्फ अपनी “नौकरी बचाए रखना” रह गया है।

इसके जवाब में पवन खेड़ा ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि मणिशंकर अय्यर का पिछले कुछ सालों से कांग्रेस से कोई वास्तविक संबंध नहीं है और वे जो भी बोलते-लिखते हैं, वह उनकी “व्यक्तिगत क्षमता” में होता है, न कि पार्टी की आधिकारिक लाइन।

केसी वेणुगोपाल को ‘राउडी’ कहकर निशाना, राहुल से तुलना में सरदार पटेल का उल्लेख

अय्यर यहीं नहीं रुके। उन्होंने कांग्रेस महासचिव K. C. Venugopal पर भी तीखी टिप्पणी की। उनके शब्दों में,

“क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक पार्टी की क्या स्थिति होगी, जो केसी वेणुगोपाल जैसे राउडी को राहुल गांधी के लिए सरदार पटेल के स्तर तक उठा दे?”

यह बयान स्पष्ट रूप से दो स्तरों पर विवादित है—

  • पहला, वेणुगोपाल को “राउडी” बताकर उनकी संगठनात्मक भूमिका और क्षमता पर सवाल;

  • दूसरा, राहुल गांधी की तुलना में Vallabhbhai Patel के स्तर का उल्लेख कर कांग्रेस के भीतर ही नेतृत्व की ऊंचाई पर व्यंग्य।

कई राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह बयान कांग्रेस की आंतरिक अनुशासन रेखा से काफी आगे बढ़कर व्यक्तिगत हमले की श्रेणी में आ गया है।

केरल चुनाव पर निराशा: ‘कांग्रेस नहीं जीतेगी, नेता आपस में बंटे हैं’

केरल विधानसभा चुनावों को लेकर पूछे गए सवाल पर अय्यर ने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से चाहते हैं कि कांग्रेस वहां जीते, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं है कि ऐसा होगा। उनका कहना था कि केरल में कांग्रेस नेता आपस में ही इतने बंटे हुए हैं कि वे “कम्युनिस्टों से ज्यादा एक-दूसरे से नफरत करते हैं।”

उन्होंने पहले भी केरल के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan की उपलब्धियों की तारीफ की थी और माना था कि उनकी सरकार के कामकाज के आधार पर वाम मोर्चे की वापसी संभव है। अब फिर से केरल कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर सवाल उठाकर अय्यर ने यह संकेत दे दिया कि वे राज्य में पार्टी की चुनावी संभावनाओं को लेकर बेहद निराश हैं।

INDIA ब्लॉक के लिए स्टालिन सबसे बेहतर, राहुल PM बन सकते हैं

संयुक्त विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के भविष्य पर बोलते हुए अय्यर ने कहा कि यदि इस गठबंधन को मजबूत करना है, तो इसके लिए सबसे उपयुक्त नेता M. K. Stalin हैं, जो विभिन्न क्षेत्रीय पार्टियों के बीच सेतु का काम कर सकते हैं।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं, बशर्ते कोई ऐसा नेता हो जो अपना पूरा समय INDIA ब्लॉक को एकजुट रखने और उसे संरचना देने में लगाए। यानी अय्यर की नजर में

  • स्टालिन संगठन और गठबंधन प्रबंधन के लिए बेहतर,

  • जबकि राहुल संभावित प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार्य हो सकते हैं।

यह बयान विपक्षी राजनीति में भूमिका विभाजन के एक मॉडल की ओर संकेत करता है, जहां चेहरा कोई और, लेकिन गठबंधन प्रबंधन किसी तीसरे के हाथ में हो।

कांग्रेस नेताओं की कड़ी प्रतिक्रिया: ‘पार्टी लाइन नहीं, अय्यर की निजी राय’

अय्यर के बयानों पर कांग्रेस नेतृत्व ने तुरंत दूरी बना ली। कांग्रेस महासचिव K. C. Venugopal ने कहा कि पार्टी का आधिकारिक रुख अय्यर की बातों से अलग है और इन्हें कांग्रेस की स्थिति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

कांग्रेस सांसद J. B. Mather ने टिप्पणी की कि अय्यर ने उन राजनीतिक ताकतों और सामाजिक समीकरणों को नहीं समझा, जो आने वाले केरल चुनाव के नतीजों को निर्धारित करेंगे।

वहीं पार्टी के युवा चेहरे और पूर्व डिप्टी सीएम Sachin Pilot ने कहा, “मैं इतना ही कह सकता हूं कि अय्यर कांग्रेस पार्टी में नहीं हैं, इसके अलावा मैं कुछ नहीं कहना चाहता।” इस बयान से साफ संकेत मिला कि नेतृत्व अय्यर को औपचारिक रूप से ‘आउटसाइडर’ के रूप में दिखाना चाहता है, भले ही वे खुद खुद को कांग्रेस का सदस्य बताते रहें।

अय्यर के विवादित बयानों की लंबी लिस्ट: पाकिस्तान से प्रेम से लेकर मोदी पर हमला तक
1. कश्मीर पर पाकिस्तान की नीति पर ‘फख्र’

2018 में कराची के एक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने कहा था कि उन्हें कश्मीर पर पाकिस्तान की नीति पर “फख्र” है। उन्होंने यह भी कहा कि वे पाकिस्तान से उतना ही प्यार करते हैं, जितना हिंदुस्तान से, और भारत को भी अपने पड़ोसी से उसी तरह प्यार करना चाहिए जैसा वे खुद करते हैं। इस बयान ने भारत में उनकी राष्ट्रवादी विश्वसनीयता पर कई सवाल खड़े किए।

2. ‘पाकिस्तान के लोग हमें दुश्मन नहीं मानते’

22 अगस्त 2023 को अय्यर ने कहा कि पाकिस्तान के लोग भारत को दुश्मन नहीं मानते और यह हमारे लिए एक बड़ा “एसेट” है। उनका तर्क था कि पिछले 9 साल से दोनों देशों के बीच कोई सार्थक बातचीत नहीं हुई, जिसका नुकसान वहां की आम जनता उठा रही है, न कि वहां की सरकार या सेना। उन्होंने यह भी कहा था कि नरेंद्र मोदी को छोड़कर लगभग हर प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से संवाद किया है।

3. पीएम मोदी को ‘नीच किस्म का आदमी’ कहा था

2019 में एक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने Narendra Modi पर विवादित टिप्पणी करते हुए उन्हें “बहुत नीच किस्म का आदमी” कहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी ने ऐसे मौके पर “गंदी राजनीति” की, जब B. R. Ambedkar की स्मृति में बनी इमारत का उद्घाटन हो रहा था। इस बयान के बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था।

4. नरसिम्हा राव को सांप्रदायिक बताया

अगस्त 2023 में अय्यर ने पूर्व प्रधानमंत्री P. V. Narasimha Rao पर निशाना साधते हुए उन्हें “सांप्रदायिक” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने के दौरान नरसिम्हा राव पूजा में व्यस्त थे और भारत को “हिंदू राष्ट्र” मानते थे। अय्यर के अनुसार, भाजपा के पहले प्रधानमंत्री वास्तव में अटल बिहारी वाजपेयी नहीं, बल्कि पी.वी. नरसिम्हा राव थे।

इन चारों उदाहरणों से साफ है कि मणिशंकर अय्यर लंबे समय से अपने बयानों के कारण विवादों के केंद्र में रहे हैं—कभी पाकिस्तान पर टिप्पणी, कभी मोदी पर हमले, तो कभी अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की आलोचना के कारण।

कांग्रेस और अय्यर: रिश्ते में दूरी, शब्दों में तल्ख़ी

ताज़ा Mani Shankar Aiyar controversy यह दिखाती है कि उनके और कांग्रेस हाईकमान के बीच दूरी अब सार्वजनिक स्तर तक आ चुकी है।

  • एक तरफ अय्यर खुद को गांधी-नेहरू-राजीव की विचारधारा से जुड़ा मूल कांग्रेसी बताते हैं,

  • दूसरी तरफ पार्टी के वर्तमान चेहरे उन पर से राजनीतिक और नैतिक जिम्मेदारी का बोझ हटाकर उन्हें ‘व्यक्तिगत राय देने वाले’ व्यक्ति के रूप में पेश कर रहे हैं।

यह स्थिति न केवल पार्टी अनुशासन, बल्कि विचारधारात्मक बहस के स्तर पर भी कांग्रेस के भीतर गहरे अंतर्विरोधों की ओर इशारा करती है। INDIA ब्लॉक, केरल चुनाव, पार्टी नेतृत्व और प्रवक्ता संस्कृति—हर मुद्दे पर अय्यर ने जो सवाल उठाए हैं, वे आने वाले दिनों में कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का विषय बने रहेंगे।

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