Jagdeep Dhankhar Updates: 21 जुलाई 2025 को Parliament Monsoon Session का पहला दिन था। Vice President Jagdeep Dhankhar ने सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित की। लेकिन शाम ढलते ही सियासी तापमान बढ़ गया। रात को अचानक जगदीप धनखड़ ने President House जाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। इससे पहले किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी थी।
इस्तीफे की असल वजह: सरकार से बनी तनातनी और 3 मांगें
सूत्रों के अनुसार, Jagdeep Dhankhar का इस्तीफा अचानक नहीं हुआ, इसके पीछे महीनों से चल रही political tension और कुछ विशेष डिमांड्स थीं, जिन्हें सरकार ने अस्वीकार कर दिया था। इन्हीं मांगों की वजह से उपराष्ट्रपति और सरकार के बीच खाई गहरी होती गई।
📌 जानिए वो 3 प्रमुख मांगें जिनसे बिगड़ गए संबंध
पहली मांग: सरकारी दफ्तरों में उपराष्ट्रपति की तस्वीर भी लगे
Jagdeep Dhankhar चाहते थे कि PM Modi और President Droupadi Murmu के साथ-साथ Vice President की भी तस्वीर सभी सरकारी कार्यालयों में लगे। उन्होंने यह मुद्दा कई बार उठाया, लेकिन सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया। सरकार का तर्क था कि यह भारत की स्थापित परंपरा के खिलाफ है, और अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ है।
दूसरी मांग: JD Vance से उच्चस्तरीय बैठक की अनुमति
धनखड़ अमेरिका के प्रभावशाली राजनेता JD Vance से एक विशेष high-level bilateral meeting करना चाहते थे। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने इसे ठुकरा दिया क्योंकि यह मुलाकात केवल राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री स्तर पर की जाती है। इससे उपराष्ट्रपति नाराज हो गए।
जेडी वेंस से उच्चस्तरीय बैठक की चाहत बनी टकराव की वजह
अप्रैल माह में जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance भारत आए थे, तब Vice President Jagdeep Dhankhar उनके साथ एक high-level bilateral meeting का नेतृत्व करना चाहते थे। लेकिन यह मांग government protocol के लिहाज़ से विवादित बन गई।
सूत्रों के अनुसार, एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने धनखड़ को यह स्पष्ट किया कि JD Vance भारत में अमेरिकी राष्ट्रपति का विशेष संदेश लेकर आए हैं, जिसे सीधे Prime Minister Narendra Modi तक पहुंचाया जाना था। ऐसे में यह मुलाकात केवल प्रधानमंत्री स्तर पर ही की जा सकती थी।
धनखड़ का यह आग्रह न केवल स्थापित diplomatic norms से भटक रहा था, बल्कि इससे सरकार को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। यही कारण था कि इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया गया।
तीसरी मांग: काफिले में मर्सिडीज बेंज शामिल हो
Jagdeep Dhankhar ने अपनी official convoy में एक Mercedes-Benz vehicle को शामिल करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि उपराष्ट्रपति का रुतबा और सुरक्षा इसके अनुरूप होनी चाहिए। लेकिन इस प्रस्ताव को भी Home Ministry ने महंगा और गैर-ज़रूरी मानते हुए नामंजूर कर दिया।
Jagdeep Dhankhar की तीसरी प्रमुख मांग थी कि उनके official convoy की सभी गाड़ियों को Mercedes-Benz मॉडल में अपग्रेड किया जाए। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने यह अनुरोध कई बार दोहराया था।
हालांकि, सरकार ने इस प्रस्ताव को unnecessary और extravagant (बेहद खर्चीला) मानते हुए अस्वीकार कर दिया। इस तरह की बार-बार की गई मांगों ने न सिर्फ असहजता बढ़ाई, बल्कि उपराष्ट्रपति और सरकार के बीच की दूरी को और गहरा कर दिया।
जस्टिस यशवंत वर्मा के महाभियोग नोटिस से बिगड़ा संतुलन
Jagdeep Dhankhar और सरकार के बीच चल रही तनातनी उस समय गंभीर मोड़ पर पहुंच गई जब उपराष्ट्रपति ने opposition-backed impeachment notice को स्वीकार कर लिया। यह प्रस्ताव Justice Yashwant Varma के खिलाफ था, जिसे opposition ने प्रस्तुत किया था।
सरकार इस मुद्दे पर Lok Sabha में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव लाना चाहती थी, लेकिन धनखड़ द्वारा विपक्ष के नोटिस को मंजूरी देने से सरकार की रणनीति को गहरा झटका लगा। सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय पर Prime Minister Narendra Modi ने नाराजगी जताई, जिसका ज़िक्र Kiren Rijiju ने स्वयं फोन पर किया।
राष्ट्रपति भवन में इस्तीफे ने सबको चौंकाया
तनाव बढ़ने के बाद, सोमवार की रात Jagdeep Dhankhar अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के Rashtrapati Bhavan पहुंचे और इस्तीफा सौंप दिया। उन्हें President Droupadi Murmu से मिलने के लिए लगभग 25 मिनट तक इंतज़ार करना पड़ा।
सूत्रों का मानना है कि Jagdeep Dhankhar को उम्मीद थी कि सरकार उन्हें मनाने का प्रयास करेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने formal resignation दे दिया।
गदीप धनखड़ का बैकग्राउंड
Jagdeep Dhankhar का कानूनी और राजनीतिक करियर
Jagdeep Dhankhar ने अपने करियर की शुरुआत legal profession से की और कई वर्षों तक Rajasthan High Court में वकालत की। वर्ष 1986 में उन्हें राजस्थान हाई कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया, जो उनके legal credentials को दर्शाता है।
इसके बाद 1989 में उन्होंने Janata Party के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और विजय हासिल कर संसद पहुंचे। उन्हें 21 अप्रैल 1990 से 5 नवंबर 1990 तक Minister of State for Parliamentary Affairs के रूप में केंद्र सरकार में काम करने का अवसर भी मिला।
हालांकि, 1991 में उन्होंने Congress के टिकट पर फिर से चुनाव लड़ा लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
राजनीति और खेल जगत में Jagdeep Dhankhar की भूमिका
Jagdeep Dhankhar ने वर्ष 1993 में Ajmer-Kishangarh सीट से विधानसभा चुनाव जीतकर Rajasthan Legislative Assembly के सदस्य के रूप में कार्य किया। वे Rajasthan Olympic Association के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और International Court Council (ICC) के सदस्य के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सेवाएं दे चुके हैं।
सामाजिक दृष्टि से भी धनखड़ सक्रिय रहे हैं। उन्होंने कई social organizations, ट्रस्ट और संस्थाओं से जुड़कर समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान दिया है।
IIT, NDA और IAS में चयन के बाद चुनी वकालत
धनखड़ का चयन IIT, NDA और IAS जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के लिए हुआ था, लेकिन उन्होंने law profession को अपना करियर बनाया। 1989 में उन्होंने Janata Dal से सांसद का चुनाव लड़कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और बाद में Congress से भी जुड़े। 2003 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर BJP जॉइन की।
बंगाल में राज्यपाल रहते ममता बनर्जी से टकराव
Jagdeep Dhankhar जब Governor of West Bengal थे, तब मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के साथ उनकी कई बार तीखी नोंकझोंक हुई। बंगाल चुनाव के बाद राज्य में हुई political violence को लेकर उन्होंने खुलकर ममता सरकार की आलोचना की थी।
21 जून 2021 को उत्तर बंगाल यात्रा के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा था—”यहां लोगों की हत्या हो रही है, ऐसे में मैं Raj Bhavan में बैठकर चुप नहीं रह सकता।”
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