Rajiv Gandhi Assassination Case: SC के आदेश पर राजीव हत्याकांड के सभी दोषी बरी, जेल से बाहर आकर नलिनी बोली- 32 साल संघर्ष में निकल गए

Rajiv Gandhi Assassination Case

Rajiv Gandhi Assassination Case: राजीव गांधी हत्याकांड के सभी 6 दोषियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। इससे पहले सुबह सर्वोच्च न्यायालय ने नलिनी और आरपी रविचंद्रन समेत सभी दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया था। (Nalini Sriharan Rp Ravichandran Release) कोर्ट के आदेश के एक घंटे के भीतर उम्रकैद की सजा काट रहे सभी दोषियों को रिहा कर दिया गया।

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई को इसी मामले के दोषी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था। जिसके बाद बाकी दोषियों ने भी इसी आदेश का हवाला देते हुए कोर्ट से रिहाई की मांग की थी। वहीं राजीव हत्या मामले में नलिनी और रविचंद्रन दोनों 30 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं।

रिहाई के बाद नलिनी ने कहा कि बीते 32 साल का संघर्ष में निकल गए‚ मैं आतंवादी नहीं…

जेल से छूटने के बाद नलिनी ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा- मैं आतंकवादी नहीं हूं। मैं पिछले 32 साल से जेल में था और ये मेरे लिए संघर्ष का समय रहा है। मैं उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा करत हूं जिन्होंने मेरा सपोर्ट किया। मैं विश्वास रखने के लिए तमिलनाडु के लोगों और सभी वकीलों को धन्यवाद देती हूं।

#WATCH | Tamil Nadu: Supporters of Nalini Sriharan, one of the six convicts in the assassination of former PM Rajiv Gandhi whose release from jail has been directed for by the Supreme Court today, burst crackers and distribute sweets near her residence in Vellore. pic.twitter.com/yanMWOfNJp

— ANI (@ANI) November 11, 2022

कांग्रेस पार्टी का तर्क- कोर्ट ने देश की भावनाओं को खारिज किया

राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की रिहाई के बाद कांग्रेस पार्टी ने कहा कि ये कतई स्वीकार्य नहीं है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पत्र जारी कर कहा- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते समय देश की भावनाओं को दरकिनार कर दिया। ये निर्णय गलतियों से भरा है।

सीएम स्टालिन ने फैसले का स्वागत किया 

राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई के बाद तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने कहा कि मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं। नियुक्त राज्यपाल को चुनी हुई सरकार का निर्णय नहीं बदलना चाहिए।

गर्भवती नलिनी की गिरफ्तारी के बाद सोनिया ने नलिनी को माफ कर दिया था

जब नलिनी को राजीव गांधी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया, तब वह गर्भवती थी। उसकी प्रेग्नेंसी को दो माह ही हुए थे। तब सोनिया गांधी ने नलिनी को माफ कर दिया। सोनिया ने कहा था कि नलिनी की गलती की सजा एक मासूम बच्चे को कैसे दी जा सकती है, जो अभी दुनिया में ही नहीं आया है।

“We would like to thank Supreme Court. We would like to thank the Gandhi family”: Bakianathan, Nalini Sriharan’s brother, on Supreme Court ordering the release of Rajiv Gandhi assassination case convicts pic.twitter.com/yPINavkOdu

— NDTV (@ndtv) November 11, 2022

पहले भी दोषियों को छुड़ाने के हुए थे प्रयास

राजीव गांधी हत्याकांड में निचली अदालत ने साजिश में शामिल 26 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। मई 1999 में सुप्रीम कोर्ट ने 19 लोगों को बरी कर दिया।

बचे हुए करीब सात आरोपियों में से चार (नलिनी, मुरुगन उर्फ ​​श्रीहरन, संथान और पेरारीवलन) को मौत की सजा सुनाई गई तो वहीं बाकी (रविचंद्रन, रॉबर्ट पायस और जयकुमार) को उम्रकैद की सजा सुना दी गई थी।

चारों ने इसके बाद दया याचिका लगाई जिसके बाद तमिलनाडु के राज्यपाल ने नलिनी की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। वहीं दूसरे आरोपियों की दया याचिका को साल 2011 में राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया था

लिट्टे संगठन ने श्रीलंका में शांति सेना भेजने से नाराज होकर चुनावी रैली में कराई थी राजीव गांधी की हत्या

राजीव ने प्रधानमंत्री रहते हुए श्रीलंका में शांति सेना भेजी थी, जिससे तमिल विद्रोही संगठन LTTE (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) प्रधानमंत्री से नाराज था। 1991 में, जब राजीव गांधी लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए चेन्नई के पास श्रीपेरंबदूर गए, तो LTTE ने राजीव पर आत्मघाती हमला करा दिया।

राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी रैली के दौरान लिट्टे के धनु नामक एक आत्मघाती हमलावर ने हत्या कर दी थी।

Rajiv Gandhi Assassination Case
ये फोटो राजीव गांधी की हत्या हाेने के बाद अगले दिन की है। उनकी पार्थिव देह तमिलनाडु से दिल्ली लाई गई थी‚ यहां उनका अंतिम संस्कार किया गया था।

लिट्टे की महिला आतंकवादी धनु (तेनमोजी राजारत्नम) ने राजीव पर पुष्पहार पहनाकर उनके पैर छुए और झुककर कमर पर बंधा विस्फोटक का बटन दबा दिया। धमाका इतना जोरदार था कि कई लोगों की बॉडी टुकड़ों में तब्दील हो गई। इनमें पूर्व पीएम राजीव गांधी भी थे।

राजीव और हमलावर धनु समेत 16 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं करीब 45 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

सबसे यंग प्राइम मिनिस्टर थे राजीव गांधी

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी पीएम बद पर आसीन हुए थे। दरअसल। दरअसल इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी को यंग होने और सहानुभूति स्वरूप जीत मिली। उस दौरान लोकसभा चुनाव में कांग्रेस तीन-चौथाई सीटें जीतने में सफल रही थी।

उस वक्त कांग्रेस ने 533 में से 414 सीटें जीती थीं। राजीव जब प्रधानमंत्री बने तब उनकी उम्र महज 40 साल ही थी। वे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने स्कूलों में कंप्यूटर लगाने की बड़ी योजना बनाई।

इसी तरह जवाहर नवोदय विद्यालय की स्थापना भी राजीव गांधी के कार्यकाल में की गई थी। वहीं पीसीओ के जरिए गांव-गांव टेलीफोन सेवा स्थापित की गई थी।

उसी दौरान राजीव पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे। सिख दंगों, भोपाल गैस कांड, शाह बानो कांड, बोफोर्स कांड, काला धन और श्रीलंका नीति के लिए राजीव सरकार की उस काल में खूब आलोचना की गई थी।

इस कारण चुनाव में कांग्रेस को हार का मूंह देखना पड़ा और वीपी सिंह की सरकार अस्तित्व में आई‚ लेकिन 1990 में यह सरकार गिर गई और कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर की सरकार बनी।

वहीं साल 1991 में यह सरकार भी गिर गई और चुनाव की घोषणा हो गई। राजीव इसी दौरान चुनावों के प्रचार के लिए तमिलनाडु गए थे। जहां साजिशन उनकी हत्या कर दी गई।

24 साल पहले बनाई गई राजीव गांधी हत्याकांड की स्पेशल जांच एजेंसी बीते माह ही केंद्र सरकार ने भंग की थी

केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की जांच के लिए गठित विशेष जांच एजेंसी को भंग कर दिया है। राजीव गांधी की हत्या के पीछे किसी बड़ी साजिश की जांच के लिए इस मल्टी-डिसिप्लिनरी मॉनिटरिंग एजेंसी (MDMA) का गठन किया गया था। इसे 1998 में जैन आयोग की सिफारिश पर बनाया गया था।

यह विशेष एजेंसी यानी MDMA पिछले 24 साल से सीबीआई के अधीन काम कर रही थी। इसमें कई केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी शामिल थे। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक एजेंसी को भंग करने का आदेश मई में जारी किया गया था. इस मामले में आगे की जांच सीबीआई की एक अलग इकाई द्वारा की जाएगी।

श्रीलंका, ब्रिटेन समेत 24 देशों से जांच के दौरान मांगा गया हत्या से जुड़ा ब्योरा

एमडीएमए पुलिस उप महानिरीक्षक के नेतृत्व में काम कर रहा था। इसने श्रीलंका, यूनाइटेड किंगडम और मलेशिया जैसे देशों को 24 पत्र भेजकर बैंकिंग लेनदेन और हत्या से जुड़े लोगों के कनेक्शन के बारे में जानकारी मांगी थी। एजेंसी को इनमें से 20 से अधिक के जवाब भी मिले थे। समाचार एजेंसी पीटीआई की मानें तो इस मामले में न्यायिक या अन्य कानूनी पहलुओं पर भी सीबीआई की नजर रहेगी।

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