President Election 2022: द्रौपदी मुर्मू NDA की राष्ट्रपति उम्मीदवार- जीतने के बाद बनेंगी देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति Read it later

Droupadi Murmu

President Election 2022: राष्ट्रपति चुनाव के लिए बीजेपी ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का चयन कर लिया है. द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) को NDA ने नॉमिनेट किया है। वह झारखंड की राज्यपाल हैं। एनडीए ने एसटी उम्मीदवार के साथ महिला कार्ड खेला है। विपक्षी दलों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा (Yashwant sinha) को अपना उम्मीदवार बनाया है। विपक्ष के उम्मीदवार की घोषणा के बाद बीजेपी में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। 

भाजपा संसदीय बोर्ड समेत राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामित समितियों की मंगलवार को बैठक हुई। इस बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी विचार-मंथन में भाग लिया। इस बैठक के बाद द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) के नाम की घोषणा की गई।

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जेपी नड्डा ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए अपने पसंदीदा नाम का चयन करने के बाद, भाजपा आम सहमति बनाने के लिए एनडीए दलों के साथ बैठक भी करेगी। बता दें कि बीजेपी ने विपक्षी दलों से बातचीत की जिम्मेदारी पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को दी है।  राष्ट्रपति चुनाव के प्रबंधन के लिए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत के नेतृत्व में 14 सदस्यीय प्रबंधन समिति भी बनाई गई है।

आदिवासी : देश में अभी तक आदिवासी समुदाय का कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं बना है। महिलाएं, दलित, मुस्लिम और दक्षिण भारत से आने वाले लोग राष्ट्रपति बने हैं, लेकिन आदिवासी समुदाय इससे वंचित रहा है। ऐसे में मांग उठती रही है कि दलित समाज के व्यक्ति को भी देश के सर्वोच्च पद पर काबिज किया जाए।

20 जून 1958 को द्रोपदी मुर्मू का हुआ जन्म 

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू हैं। वह संथाल परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह भारतीय जनता पार्टी की सदस्य हैं। 2006 से 2009 तक एसटी मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रहीं। द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षक के रूप में काम किया है।  वह पार्षद और फिर विधायक बनीं। भारत के पहले उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की तरह द्रौपदी मुर्मू लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हैं।

Millions of people, especially those who have experienced poverty and faced hardships, derive great strength from the life of Smt. Droupadi Murmu Ji. Her understanding of policy matters and compassionate nature will greatly benefit our country.

— Narendra Modi (@narendramodi) June 21, 2022

ओडिशा से ताल्लुक रखती हैं 64 साल की मुर्मू

झारखंड की नौंवी राज्यपाल रहीं 64 साल की द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के मयूरभंज की रहने वाली हैं। वे ओडिशा के ही रायरंगपुर से विधायक रह चुकी हैं। वह पहली उड़िया नेता हैं जिन्हें राज्यपाल बनाया गया। इससे पहले भाजपा-बीजद गठबंधन सरकार में साल 2002 से 2004 तक मंत्री भी रहीं। मुर्मू झारखंड की पहली आदिवासी महिला राज्यपाल भी रह चुकी हैं।

Congratulations Smt #DraupadiMurmu on being announced as candidate of NDA for the country’s highest office. I was delighted when Hon’ble PM @narendramodi ji discussed this with me. It is indeed a proud moment for people of #Odisha.

— Naveen Patnaik (@Naveen_Odisha) June 21, 2022

विपक्ष ने यशवंत सिन्हा पर खेला दांव

उधर, विपक्षी दलों ने संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा (Yashwant sinha) पर दांव लगाया है। पूर्व आईएएस यशवंत सिन्हा लंबे समय तक भाजपा संगठन और सरकार में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में वित्त मंत्री रह चुके हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने पूर्व पीएम विश्वनाथ प्रताप सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मंत्रिमंडल में वरिष्ठ सहयोगी के रूप में भी काम किया है। 

यशवंत सिन्हा बीजेपी छोड़कर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी में शामिल हुए थे। टीएमसी ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया। एक दिन पहले सिन्हा ने संकेत दिया था कि वह राष्ट्रपति के उम्मीदवार होंगे।

भाजपा की लोकसभा की 60 से ज्यादा सीटों पर नजर

उल्लेखनीय है कि 543 लोकसभा सीटों में से 47 सीटें एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। आदिवासी समुदाय का 60 से अधिक सीटों पर प्रभाव है। मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में आदिवासी मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। ऐसे में आदिवासी के नाम पर चर्चा चल रही थी। इसका फायदा बीजेपी को चुनाव में भी मिल सकता है। क्योंकि अगले डेढ़ साल गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिससे बीजेपी को राजनीतिक तौर पर फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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