Mahashivratri Puja का पावन पर्व इस बार रविवार, 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत-उपवास, शिवलिंग अभिषेक, शिव-पार्वती पूजन और मंत्रजाप का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि पति-पत्नी यदि एक साथ शिव-पार्वती की पूजा करें तो दांपत्य जीवन में प्रेम, सामंजस्य और सुख-शांति बनी रहती है।
15 फरवरी को है महाशिवरात्रि, क्यों खास है यह तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। इस वर्ष यह शुभ तिथि रविवार, 15 फरवरी को पड़ रही है। मान्यता है कि इसी रात शिव-पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था और इसीलिए इसे दाम्पत्य सुख, प्रेम और समर्पण का प्रतीक पर्व भी कहा जाता है। इस दिन व्रत-उपवास रखने, रात्रि जागरण, शिवलिंग पर जल-दूध-बेलपत्र अर्पित करने और ‘ऊँ नमः शिवाय’ के साथ अन्य शिव मंत्रों के जप का विशेष महत्व माना गया है।
पति-पत्नी एक साथ करें शिव-पार्वती की पूजा, बढ़ता है प्यार और तालमेल
वाराणसी के ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम शर्मा के अनुसार, महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा घर में सुख-समृद्धि, स्थिरता और आपसी प्रेम बनाए रखने के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। वे बताते हैं कि शिव केवल तप और वैराग्य के देव नहीं, आदर्श गृहस्थ भी हैं और माता पार्वती के साथ उनका रिश्ता समर्पण, धैर्य और समझ का आदर्श उदाहरण है।
इसी भाव से यदि पति-पत्नी साथ बैठकर Mahashivratri Puja करें, एक साथ जल, बेलपत्र, फूल और प्रसाद अर्पित करें, तो उनके बीच संवाद और भरोसा मजबूत होता है। धार्मिक दृष्टि से भी माना जाता है कि दंपति की संयुक्त प्रार्थना जल्दी सुनी जाती है, क्योंकि वह केवल ‘मैं’ नहीं, बल्कि ‘हम’ की भावना के साथ की गई प्रार्थना होती है।
‘ऊँ उमा महेश्वराय नमः’ मंत्र का महत्व
शास्त्रों में दांपत्य जीवन की मंगलकामना के लिए शिव-पार्वती के संयुक्त मंत्र ‘ऊँ उमा महेश्वराय नमः’ का जप विशेष रूप से बताया गया है।
‘उमा’ माता पार्वती का नाम है,
‘महेश्वर’ भगवान शिव का,
इस प्रकार यह मंत्र पति-पत्नी के रूप में शिव-शक्ति की आराधना का प्रतीक बन जाता है।
महाशिवरात्रि की रात या दिन में, जब दंपति साथ बैठकर इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करते हैं, तो माना जाता है कि–
रिश्ते में चल रहा तनाव कम होता है,
एक-दूसरे को समझने की शक्ति बढ़ती है,
अनकहे मन-मुटाव और अहंकार धीरे-धीरे पिघलने लगते हैं।
पति-पत्नी एक साथ धर्म-कर्म क्यों करें?
पं. पुरुषोत्तम शर्मा के अनुसार, दांपत्य जीवन केवल रोजमर्रा की जिम्मेदारियों का नाम नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक यात्रा भी है। जब पति-पत्नी साथ में पूजन, जप, पाठ, तीर्थ यात्रा या दान-पुण्य करते हैं, तो—
आध्यात्मिक लक्ष्य साझा होते हैं,
संघर्ष की स्थितियों में भी दोनों का धैर्य बढ़ता है,
‘हम अलग-अलग’ से ‘हम साथ-साथ’ वाली मानसिकता मजबूत होती है।
शास्त्रों में कहा गया है कि जहां पति-पत्नी एक साथ धर्म-कर्म करते हैं, वहां घर में नकारात्मकता, कलह और वाद-विवाद की संभावना बहुत कम रह जाती है। महाशिवरात्रि जैसे पर्व इस आपसी जुड़ाव का सहज अवसर बन जाते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र: भय, चिंता और संकट दूर करने वाला जप
महाशिवरात्रि पर शिव पूजा के साथ महामृत्युंजय मंत्र के जप का भी विशेष महत्व है। यह मंत्र शारीरिक-मानसिक कष्ट, अनजाने भय, दुर्घटना और आयु से जुड़ी चिंताओं को दूर करने वाला माना गया है।
महामृत्युंजय मंत्र:
“ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्,
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।”
अर्थ यह है कि हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंध की तरह सर्वत्र व्याप्त होकर जीवों को पोषण देने वाले हैं। जैसे पका हुआ फल बेल से सहज ही अलग हो जाता है, वैसे ही हम मृत्यु के बंधन से मुक्त होकर अमृत स्वरूप की प्राप्ति करें।
महाशिवरात्रि की रात इस मंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) जप करना—
मानसिक शांति,
नकारात्मक विचारों से मुक्ति,
और कठिन समय में आंतरिक शक्ति देने वाला माना गया है।
Mahashivratri Puja से पहले क्या तैयारी करें
महाशिवरात्रि की पूजा को सुचारु और पावन बनाने के लिए कुछ सरल तैयारी की जा सकती है—
घर में मंदिर या पूजन स्थान को साफ-सुथरा करें।
एक स्वच्छ कपड़े से शिवलिंग या शिव-पार्वती की मूर्ति/चित्र को पोंछ लें।
पूजा के लिए जल, दूध, दही, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, आक-धतूरा, फूल, फल, चंदन, धूप-दीप, घी, कपूर, रोली, अक्षत और सफेद व लाल वस्त्र आदि पहले से सजा लें।
पति-पत्नी यदि साथ पूजा कर रहे हों तो दोनों स्नान कर, साफ कपड़े पहनकर पूजन स्थान पर बैठें।
सुबह की शिव-पार्वती पूजा: स्टेप-बाय-स्टेप विधि
स्नान और संकल्प:
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और हाथ में जल लेकर संकल्प लें कि—
“आज मैं/हम महाशिवरात्रि व्रत रखते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर रहे हैं, हमारे घर में सुख-शांति और स्वास्थ्य बना रहे।”मंदिर या घर के शिवलिंग पर जलाभिषेक:
सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल चढ़ाएं।
उसके बाद दूध, दही, शहद या पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं।
अभिषेक के समय ‘ऊँ नमः शिवाय’, ‘ऊँ महेश्वराय नमः’, ‘ऊँ शंकराय नमः’, ‘ऊँ रुद्राय नमः’ जैसे मंत्रों का जप करें।
चंदन, फूल और बिल्वपत्र अर्पित करें:
अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं।
सफेद या सुगंधित फूल चढ़ाएं।
बेलपत्र (बिल्वपत्र) तीन पत्तों के सेट में, साफ करके शिवलिंग पर अर्पित करें।
प्रसाद और भोग:
भगवान शिव को फल, सूखे मेवे या दूध से बनी मिठाई (जैसे पेड़ा, रसोगुल्ला) अर्पित करें।
नमक और मिर्च युक्त खाने को भोग में न चढ़ाएं, फलाहार और सात्त्विक वस्तुएं ही रखें।
आरती और परिक्रमा:
धूप, दीप और कपूर से शिव-पार्वती की आरती करें।
शिवलिंग की आधा परिक्रमा करना परंपरा में बताई गई है; यानी पीछे का हिस्सा छोड़ते हुए दाईं ओर से घूमकर पुनः सामने आएं।
प्रसाद वितरण:
पूजा के बाद प्रसाद परिवारजनों और आस-पास के लोगों में बांटें।
जिनके लिए संभव हो, वे गरीबों या जरूरतमंदों को भी फल और मिठाई दान कर सकते हैं।
बिना ब्राह्मण के भी कर सकते हैं विधि-सम्मत पूजा
कई लोग सोचते हैं कि बिना पंडित या ब्राह्मण के पूजा अधूरी रह जाएगी, जबकि महाशिवरात्रि की साधारण शिव-पूजा स्वयं भी की जा सकती है।
साफ मन,
श्रद्धा भरा भाव,
और मंत्रजाप के साथ सामान्य पूजा-विधि—
इतना पर्याप्त माना गया है।
अगर शास्त्रीय विधि विस्तार से न भी पता हो, तो भी ‘ऊँ नमः शिवाय’ और ‘महामृत्युंजय मंत्र’ के साथ जल, बेलपत्र और साधारण भोग अर्पित कर भक्त भाव से पूजा करना पूर्ण माना जाता है।
महाशिवरात्रि पर सुहाग की चीजों का दान: लाल साड़ी, चुनरी, चूड़ियां…
महाशिवरात्रि के दिन विवाहित महिलाओं और दंपतियों के लिए एक प्रमुख परंपरा सुहाग की सामग्रियों का दान करना भी है। शिव-पार्वती की पूजा के बाद यह सामान किसी सुहागन स्त्री को आदर के साथ दिया जाता है। सुहाग सामग्री में आम तौर पर—
लाल या मंगलकारी रंग की साड़ी,
लाल चुनरी,
कुमकुम,
सिंदूर,
लाल चूड़ियां,
बिंदिया,
हल्के आभूषण,
जैसी चीजें शामिल होती हैं।मान्यता यह है कि—
इससे दांपत्य जीवन में स्थिरता आती है,
पति-पत्नी के बीच दीर्घायु और मंगल की कामना पूरी होती है,
और घर में ‘सौभाग्य लक्ष्मी’ का वास बना रहता है।
दान देते समय कोई दिखावा करने के बजाय, विनम्रता और शुभकामना के साथ वस्तु दें, यही अधिक फलदायी माना जाता है।
व्रत-उपवास के नियम: क्या खाएं, क्या न करें
बहुत से भक्त महाशिवरात्रि पर निर्जला व्रत (बिना जल के) रखते हैं, पर यह सभी के लिए अनिवार्य नहीं है।
सामान्य रूप से फलाहार, दूध, दही, साबूदाना, मखाना, मूंगफली, सिंघाड़े का आटा आदि लेकर व्रत रखा जा सकता है।
जिनको स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो, वे डॉक्टर की सलाह लेकर हल्का, सात्त्विक भोजन भी कर सकते हैं और मन से व्रत का संकल्प रखें।
इस दिन—
मांसाहार, मदिरा, नशा और तिखे/तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए।
झगड़ा, क्रोध, कटु वचन और अपमान से भी बचना चाहिए, क्योंकि कहा गया है कि ऐसे व्यवहार से पूजा का फल कम हो जाता है।
घर में या मंदिर में Mahashivratri Puja, क्या बेहतर है?
यदि घर में स्थायी शिवलिंग या शिव-पार्वती की स्थापना हो, तो वहीं पर पूजा की जा सकती है।
छोटे बच्चों, बुजुर्गों या स्वास्थ्य कारणों से मंदिर न जा पाने पर घर की पूजा भी उतनी ही फलदायी मानी जाती है।
यदि संभव हो, तो सुबह या रात में किसी नजदीकी शिव मंदिर जाकर जलाभिषेक अवश्य करें।
कई श्रद्धालु महाशिवरात्रि की रात मंदिरों में जागरण, भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक में भाग लेते हैं। दंपति साथ जाकर यदि रात्रि-जागरण में कुछ समय बिताते हैं, तो इसे भी विशेष पुण्यदायक माना गया है।
दांपत्य जीवन में चल रहे तनाव के लिए क्या करें?
अगर पति-पत्नी के रिश्ते में पहले से ही तनाव, संवाद की कमी, गलतफहमी या बार-बार होने वाले झगड़े जैसी समस्या हो, तो महाशिवरात्रि आत्ममंथन का भी अच्छा अवसर हो सकता है।
साथ बैठकर शांत मन से शिव-पार्वती की मूर्ति के सामने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर प्रार्थना करें।
‘ऊँ उमा महेश्वराय नमः’ और ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का संयुक्त जप करें।
स्वभाव की कमियों को स्वीकार करने और बदलने का मन में संकल्प लें।
धार्मिक रूप से यह माना जाता है कि इस दिन किया गया सच्चा संकल्प और आंतरिक बदलाव की इच्छा, आने वाले समय में रिश्ते को नई दिशा दे सकती है।
महाशिवरात्रि पर दान-पुण्य: केवल सामान नहीं, भावना भी जरूरी
दान-पुण्य की परंपरा केवल वस्तु देने भर का नाम नहीं है, बल्कि उसमें निहित भावना अधिक महत्वपूर्ण है। महाशिवरात्रि पर—
सुहाग सामग्रियों के अलावा गरीबों को भोजन, कपड़े, कंबल (सर्दी हो तो), या फल बांटना,
मंदिर में सफाई, सजावट में मदद करना,
गौशाला में चारा देना,
जैसी छोटी-छोटी सेवाएं भी बहुत शुभ मानी गई हैं।दान देते समय यह भाव रखें कि—
“जो कुछ भी है, वह शिव का प्रसाद है, मैं सिर्फ माध्यम हूं”—यही भावना दान को पूर्णता देती है।
महाशिवरात्रि को ‘शिव-पार्वती उत्सव’ की तरह मनाएं
महाशिवरात्रि केवल व्रत या अभिषेक का दिन नहीं, बल्कि जीवन के हर रिश्ते को, खासकर दांपत्य संबंध को नए नजरिये से देखने का अवसर भी है। जब पति-पत्नी मिलकर Mahashivratri Puja करते हैं, शिव-पार्वती के प्रेम, धैर्य और समर्पण को आदर्श मानकर अपने जीवन में उतारने की कोशिश करते हैं, तो यह पर्व सच-मुच ‘महान रात्रि’ बन जाता है—जिसमें भीतर की अंधेरी, मनमुटाव और अहंकार की परतें धीरे-धीरे खत्म होकर एक नई रोशनी पैदा करती हैं।
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