paush daan 2025 से जुड़े धार्मिक नियम, राशि अनुसार दान और पौष मास में किए गए पुण्य के प्रभाव को लेकर उत्सुकता बढ़ जाती है। 15 दिसंबर से शुरू हुआ यह पवित्र माह 3 जनवरी तक चलेगा। हिंदू पंचांग का दसवां महीना माना जाने वाला पौष अपने साथ अत्यंत शुभ प्रभाव लाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस मास में किया गया दान अक्षय पुण्य देता है—अर्थात् ऐसा पुण्य जो जीवनभर क्षीण नहीं होता।
जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा इस माह में सबसे बड़ी धार्मिक साधना मानी गई है। पं. मनीष शर्मा बताते हैं कि यदि दान राशि-स्वामी ग्रहों के अनुसार किया जाए, तो कुंडली के दोष तक शांत हो सकते हैं। इसी कारण पौष मास को दान-साधना के लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ काल कहा गया है।
पौष मास का महत्व और दान की अनिवार्यता
पौष मास को सूर्योपासना, जप, तप, व्रत और दान का माह कहा गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान सूर्य की तेजस्विता बढ़ती है, जिससे आध्यात्मिक ऊर्जाएं सक्रिय हो जाती हैं। ऐसे में जो व्यक्ति अपनी राशि के ग्रहस्वामी के अनुसार दान करता है, उसे ग्रहदोषों में कमी, मानसिक शांति और परिवार में मंगलकारी परिणाम प्राप्त होते हैं।
राशि अनुसार दान क्यों महत्वपूर्ण है?
कुंडली के ग्रह हमारे मन, स्वास्थ्य, भाग्य और निर्णयों पर प्रभाव डालते हैं। जब ग्रह प्रतिकूल होते हैं तो जीवन में रुकावटें बढ़ती हैं। शास्त्र कहते हैं कि दान वह उपाय है जो बिना किसी जटिल पूजा-पद्धति के ग्रहों के दुष्प्रभाव को कम कर देता है।
इसलिए इस माह राशि आधारित दान करने की परंपरा प्रचलित है।
अब राशि अनुसार विस्तार से जानिए किसे क्या दान करना चाहिए—
मेष राशि
मेष के लिए मंगल ग्रह निर्णायक भूमिका निभाता है।
क्या दान करें: मच्छरदानी, तिल, लाल वस्त्र, गुड़।
लाभ: क्रोध नियंत्रण, दुर्घटना से रक्षा, ऊर्जा में वृद्धि और मंगल दोषों की शांति।वृषभ राशि
शुक्र ग्रह की कृपा के लिए यह दान शुभ है।
क्या दान करें: ऊनी वस्त्र, बच्चों को गर्म कपड़े, गेहूं, चावल, ज्वार।
लाभ: वैवाहिक सुख, आकर्षण बढ़ना, आर्थिक स्थिरता।मिथुन राशि
बुध ग्रह बुद्धि और निर्णय क्षमता का कारक है।
क्या दान करें: काला कंबल, तिल के लड्डू, हरी दाल, लेखन सामग्री।
लाभ: मन की शांति, संवाद क्षमता में सुधार, कार्य सफलता।कर्क राशि
इस राशि का स्वामी चंद्रमा है।
क्या दान करें: साबूदाना, शहद, दूध से बनी मिठाई, सफेद कपड़े।
लाभ: भावनात्मक संतुलन, परिवारिक शांति, मानसिक स्थिरता।सिंह राशि
सूर्य इस राशि का स्वामी है।
क्या दान करें: चने की दाल, घी, हल्दी, गुड़, पीले वस्त्र।
लाभ: सम्मान-प्रतिष्ठा बढ़ना, आत्मविश्वास मजबूत होना, सरकारी कार्य में सफलता।कन्या राशि
बुध का प्रभाव यहां भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
क्या दान करें: कंबल, ऊनी वस्त्र, स्टेशनरी, हरी मूंग।
लाभ: बुद्धि बढ़ना, स्वास्थ्य सुधरना, कर्मक्षेत्र में वृद्धि।तुला राशि
शुक्र दोष कम करने हेतु दान आवश्यक।
क्या दान करें: तिल-गुड़, तिल का तेल, धूप-अगरबत्ती, चावल।
लाभ: रिश्तों में सामंजस्य, मनोबल में वृद्धि, भोग-संपदा में वृद्धि।वृश्चिक राशि
मंगल यहां अत्यधिक प्रभावशाली।
क्या दान करें: मसूर दाल, दूध-दही, लाल वस्त्र, लोहे के बर्तन।
लाभ: विवाद कम होना, साहस बढ़ना, शारीरिक ऊर्जा में सुधार।धनु राशि
गुरु इस राशि का स्वामी है।
क्या दान करें: गौशाला में धन, पीली दाल, धार्मिक पुस्तकें, अनाज।
लाभ: ज्ञान, भाग्य वृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति।मकर राशि
शनि ग्रह स्थिरता का कारक।
क्या दान करें: उड़द दाल, सरसों तेल, लोहे का पात्र, काले तिल।
लाभ: रुकावटों का अंत, नौकरी-व्यवसाय में प्रगति।कुंभ राशि
यह भी शनि की राशि है।
क्या दान करें: काले चने, कंबल, इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुएं, तेल।
लाभ: शनि दोष कम होना, स्वास्थ्य में सुधार, मानसिक स्थिरता।मीन राशि
गुरु का प्रभाव सर्वाधिक शुभ।
क्या दान करें: गेहूं, गुड़, पीले वस्त्र, चने की दाल, केला।
लाभ: आध्यात्मिक शक्ति बढ़ना, संतान सुख में वृद्धि, भाग्य का उदय।
पौष मास में दान का सही तरीका
दान जरूरतमंदों को ही करें।
अहंकार और दिखावे से बचें।
दान के समय ‘पुण्यार्थे दानम्’ का संकल्प लें।
ग्रह शांति हेतु एक ही वस्तु का लगातार दान उत्तम माना गया है।
पौष में क्या दान न करें?
कुछ वस्तुएं ग्रहदोष बढ़ा सकती हैं—
फटे कपड़े
टूटा बर्तन
क्रोध में किया गया दान
असमर्थ व्यक्ति को दान देने से इनकार
पौष मास में सूर्य पूजा का महत्व
इस माह सूर्य की उपासना से—
आरोग्य
तेज
आत्मविश्वास
नेत्र रोगों से राहत
सरकारी कार्य में सफलता
मिलती है।
सूर्य को जल चढ़ाना इस मास का मुख्य नियम है।
किन लोगों को इस माह विशेष दान करना चाहिए?
कुंडली में पितृदोष
राहु-केतु दोष
विवाह में बाधा
करियर रुकावट
मानसिक तनाव
इन स्थितियों में पौष के दान अत्यधिक शुभ फल देते हैं।
क्या दान से ग्रहदोष पूरी तरह खत्म हो सकता है?
शास्त्र कहता है—
दान ग्रहों के दोष को शांत करता है, खत्म नहीं करता।
लेकिन शांति इतनी प्रभावी होती है कि उसके परिणाम जीवन में तुरंत दिखाई देते हैं—
मानसिक हल्कापन, कार्य में सफलता, परिवारिक सुख और आर्थिक स्थिरता इसका प्रमाण है।
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