जिंदगी के 31 साल जेल में काटने के बाद अब वो स्वतंत्र है…। 19 साल के उस युवक की दाढ़ी सफेद हो चुकी है…। फिर भी उसके चेहरे पर खुशी की झलक है…। यह उसके लिए नई जिंदगी मिलने जैसा है… क्योंकि वो फांसी के फंदे से बचकर लौटा है…। उसने गुनाह-ए-अज़ीम किया था…। वह देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या (Rajiv Gandhi Assassination Case) में शामिल था…। ए. जी. पेरारिवलन (ag perarivalan) के घर में अब दशकों बाद दिवाली जैसी खुशी है। अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर पहुंच चुके मां-बाप लड्डू बांट रहे हैं। सीएम ने भी उसे गले लगाया ।
इन सबके बीच कोई और भी है बड़ी बेसब्री से पेरारिवलन (ag perarivalan) से मिलना चाहता है। वे कोई और नहीं, बल्कि वही जज हैं जिन्होंने पेरारिवलन को मौत की सजा सुनाई थी। रिटायर्ड जस्टिस केटी थॉमस (K T Thomas) सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच के अध्यक्ष थे जिन्होंने राजीव गांधी हत्याकांड (Rajiv Gandhi Assassination Case) में दोषी ठहराए गए एजी पेरारिवलन को 1999 में फांसी की सजा सुनाई थी। अब इस मन:स्थिति को समझिए.. जिस जज ने 22-23 साल पहले पेरारिवलन को मौत की सजा देने के बाद निब तोड़ दी हो, वर्तमान में उसी शख्स को जिंदगी मिलने पर वे क्या महसूस कर रहे होंगे।
मौत की सजा देने वाले जज थॉमस बोले.. मेरी इच्छा है कि वो शादी कर खुश रहे.. पहले ही देर हो चुकी है… उसे मां बाप का प्यार तो मिला लेकिन परिवार का सुख नहीं मिल पाया
राजीव गांधी की हत्या में शामिल रहे दोषी को रिहा किए जाने की खबर केरल के कोट्टयम पहुंची तो जस्टिस थॉमस (K T Thomas) ने कहा कि यदि पेरारिवलन कोट्टयम आते हैं तो मैं उनसे मिलना चाहूंगा। उन्होंने कहा, ‘वह जब भी कोट्टयम आएं, मैं उनसे मिलना चाहता हूं। वो मैं ही था जिसने उसे मौत की सजा दी थी… मेरी इच्छा है कि उसकी शादी हो और वह खुशमय जीवन जिए… पहले ही काफी देर हो चुकी है। उसे केवल अपने मां-बाप का प्यार मिला है। परिवार का सुख नहीं मिल पाया।’
जज बोले‚ मां अरुपुथम्मल ने बेटे लिए लंबी लड़ाई लड़ी
उन्होंने पेरारिवलन की मां अरुपुथम्मल की तारीफ की, जिन्होंने अपने बेटे की रिहाई के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। ‘अरुपथम’ का तमिल में मतलब ‘जादू’ होता है और अम्मल एक बुजुर्ग महिला, यह खासतौर पर एक मां को कहे जाने वाला एक सम्मान सूचक शब्द है।
पेरारिवलन ने अपनी रिहाई का श्रेय मां के बलिदानों और उनकी अथक कोशिशों को दिया है। पेरारिवलन ने कहा, ‘उन्होंने अपमान सहा, उन्होंने पीड़ा सही। इन सबके बावजूद वह 30 साल तक बिना रुके मेरे लिए लड़ीं।’
मैं अभी बाहर आया हूं। कानूनी लड़ाई को 31 साल हो गए हैं। मुझे थोड़ी सांस लेनी है। मुझे कुछ समय दें…मैं मानता हूं कि मृत्युदंड की कोई आवश्यकता नहीं है। केवल दया के लिए नहीं, बल्कि उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीशों सहित कई न्यायाधीशों ने ऐसा कहा है और कई उदाहरण भी हैं। हर कोई इंसान है। – पेरारिवलन
संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 18 मई को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में 30 साल से ज्यादा कैद की सजा काट चुके पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया।
मां के विश्वास ने जीती लंबी लड़ाई
रिटायर्ड जस्टिस थॉमस ने कहा, ‘वह (पेरारिवलन की मां) अब भी यही मानती हैं कि उनका बेटा हत्याकांड में शामिल नहीं था। उनको लगता है कि उनका बेटा निर्दोष है। हो सकता है कि अपने बेटे के लिए उनका विश्वास ही इतनी लंबी लड़ाई की ताकत बना।’ थॉमस ने कहा कि इस फैसले से मामले के अन्य दोषियों की भी रिहाई का रास्ता साफ हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘मेरी निजी राय है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजीव केस में अन्य दोषियों पर भी लागू होगा।’
क्षमादान में देरी संवैधानिक रूप से सही नहीं था : थॉमस
थॉमस (K T Thomas) ने यह भी कहा कि उन्होंने 2017 में सोनिया गांधी को एक लेटर लिखकर उस शख्स के लिए उदारता दिखाने और माफी के लिए अपनी राजमंदी देने को कहा था, जो 1991 से जेल में है। उन्होंने कहा कि मुझे अपने लेटर का जवाब नहीं मिला। फैसले पर बोलते हुए थॉमस ने कहा कि गवर्नर की ओर से क्षमादान में देरी संवैधानिक रूप से सही नहीं था।
पेरारिवलन को रिहा किए जाने से उसके परिवार, रिश्तेदार और कई तमिल संगठन बेहद खुश हैं। कांग्रेस और भाजपा को छोड़कर सत्तारूढ़ द्रमुक और विपक्षी अन्नाद्रमुक सहित राजनीतिक दलों ने पूरे दिल से फैसले का स्वागत किया।
1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी सभा में लिट्टे ने आत्मघाती हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। पेरारिवलन पर गांधी की हत्या में इस्तेमाल किए गए बम के लिए बैटरी खरीदने का आरोप लगाया गया था। उसे जब गिरफ्तार किया गया तो वह उस वक्त 19 साल का था।
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