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Hormuz Tax पर ट्रम्प का यू-टर्न, 24 घंटे में इस वजह से बदला रुख

ट्रम्प ने पहले कहा था कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करता है, इसलिए वहां से गुजरने वाले कार्गो से शुल्क लिया जाना चाहिए। अब उनका कहना है कि किसी देश या संस्था को इस रास्ते से गुजरने पर टैक्स नहीं लेना चाहिए।

Hormuz Tax पर डोनाल्ड ट्रम्प ने 24 घंटे में यू-टर्न ले लिया है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20% शुल्क लगाने की घोषणा के बाद अमेरिका ने यह फैसला वापस कर दिया। ट्रम्प ने कहा कि मिडिल ईस्ट नेताओं से बातचीत के बाद अब खाड़ी देश अमेरिका में बड़े निवेश करेंगे।

24 घंटे में बड़ा यू-टर्न

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टैक्स लगाने का फैसला वापस ले लिया है। यह फैसला उन्होंने ऐलान के करीब 24 घंटे के भीतर बदल दिया। ट्रम्प ने कहा कि मिडिल ईस्ट के नेताओं से बातचीत के बाद शुल्क लगाने की योजना खत्म की जा रही है। इसकी जगह खाड़ी देशों के साथ निवेश और व्यापार समझौते आगे बढ़ेंगे।

ट्रम्प ने पहले कहा था कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करता है, इसलिए वहां से गुजरने वाले कार्गो से शुल्क लिया जाना चाहिए। अब उनका कहना है कि किसी देश या संस्था को इस रास्ते से गुजरने पर टैक्स नहीं लेना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि पूरी दुनिया के लिए इस जलमार्ग की सुरक्षा का बोझ केवल अमेरिका पर रहना उचित नहीं है।

Hormuz Tax पर ईरान का तंज

ट्रम्प के 20% टैक्स प्रस्ताव पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तंज भरे अंदाज में कहा था कि सुरक्षित समुद्री रास्ता उपलब्ध कराने वाले को भुगतान मिलना चाहिए, लेकिन 20% बहुत ज्यादा है। ईरान ने यह भी कहा कि होर्मुज की सुरक्षा की जिम्मेदारी वह लंबे समय से निभाता आया है।

यही बयान इस विवाद का सबसे तीखा राजनीतिक पल बन गया। अमेरिका सुरक्षा के बदले शुल्क की बात कर रहा था, जबकि ईरान उसी तर्क को पलटकर अपने पक्ष में इस्तेमाल कर रहा था। कुछ ही घंटों बाद ट्रम्प ने शुल्क योजना वापस ले ली और मामला निवेश समझौतों की दिशा में मुड़ गया।

निवेश समझौतों की नई बात

ट्रम्प ने कहा कि खाड़ी देशों के साथ नई बातचीत से अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा। उनके अनुसार इससे अमेरिका में कारखाने लगेंगे और लाखों रोजगार पैदा होंगे। हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि कौन से खाड़ी देश कितना निवेश करेंगे और यह निवेश किन क्षेत्रों में होगा।

यह बदलाव रणनीतिक भी है। शुल्क लगाने से वैश्विक शिपिंग, तेल बाजार और सहयोगी देशों के साथ तनाव बढ़ सकता था। निवेश समझौते की भाषा अपेक्षाकृत नरम है। इससे अमेरिका अपने आर्थिक हित भी साध सकता है और सीधे समुद्री टोल विवाद से भी बाहर निकल सकता है।

तनाव के बीच अमेरिकी कार्रवाई

होर्मुज टैक्स विवाद ऐसे समय सामने आया जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से बहुत ऊंचा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के हवाले से दावा किया गया कि अमेरिकी सेना ने ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर पांच घंटे तक हमले किए। इनमें बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनार्क, अबू मूसा और बंदर अब्बास जैसे ठिकानों का नाम सामने आया।

एक अन्य अपडेट में बंदर अब्बास स्थित सबमरीन और नेवल मेंटेनेंस फैसिलिटी पर सी-ड्रोन से हमले का दावा भी किया गया। अमेरिका का लक्ष्य ईरान की नौसैनिक क्षमता को कमजोर करना बताया गया। यही सैन्य पृष्ठभूमि होर्मुज स्ट्रेट को सिर्फ समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि युद्ध और ऊर्जा राजनीति का केंद्र बना रही है।

शिपिंग ट्रैफिक पर सीधा असर

होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटने की खबरें भी सामने आई हैं। मंगलवार सुबह से केवल 4 जहाजों के गुजरने की बात कही गई। इनमें एक तेल टैंकर और तीन कंटेनर जहाज शामिल बताए गए। ये जहाज ओमान और UAE से रवाना होकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे।

मरीन ट्रैफिक से जुड़े आंकड़ों में यह भी दावा किया गया कि लौटते समय जहाजों ने अपनी अंतिम मंजिल और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की। यह संकेत बताता है कि तनाव के माहौल में शिपिंग कंपनियां भी सतर्क मोड में हैं। होर्मुज में जोखिम बढ़े तो उसका असर केवल जहाजों पर नहीं, तेल कीमतों और माल ढुलाई लागत पर भी दिख सकता है।

PGSA और अनुमति विवाद

ईरान ने दावा किया है कि पिछले कुछ हफ्तों में 200 से ज्यादा विदेशी जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए उसकी इजाजत मांगी। ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने यह दावा किया। ईरान ने इस संस्था को समुद्री निगरानी और रणनीतिक जलमार्ग पर अपने अधिकार के दावे को मजबूत करने के लिए बनाया है। ईरानी मीडिया ने हाल में 300 से अधिक ट्रांजिट अनुरोधों का भी दावा किया था।

अमेरिका पहले ही जहाज संचालकों को इस ईरानी व्यवस्था से सहयोग नहीं करने की चेतावनी दे चुका है। यही टकराव होर्मुज को और संवेदनशील बनाता है। एक तरफ ईरान अनुमति प्रणाली के जरिए नियंत्रण दिखाना चाहता है। दूसरी तरफ अमेरिका इस रास्ते को अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही के लिए खुला रखने की बात कर रहा है।

तेल संकट का बड़ा डर

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर तेल, गैस और माल ढुलाई की लागत पर पड़ता है। ग्रीनपीस इंटरनेशनल ने चेतावनी दी है कि जब तक दुनिया तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भर रहेगी, तब तक किसी एक क्षेत्र का युद्ध भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता रहेगा।

ग्रीनपीस ने इस स्थिति को फॉसिलफ्लेशन से जोड़ा है। यानी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से पैदा होने वाली महंगाई। संगठन का कहना है कि ऐसे संकट से बचने के लिए देशों को सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्थानीय नवीकरणीय स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ना होगा। ऊर्जा का स्थानीय उत्पादन जितना मजबूत होगा, बाहरी समुद्री संकटों का असर उतना कम होगा।

ईरानी संसद में नारेबाजी

ईरान के भीतर भी राजनीतिक तनाव साफ दिखा। संसद में अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ नारे लगे। सांसदों ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’, ‘बदला लेंगे’ और ‘हम तैयार हैं’ जैसे नारे लगाए। यह नारेबाजी उस समय हुई जब उपसभापति ने सांसदों से सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति निष्ठा दोहराने का आह्वान किया।

यह दृश्य बताता है कि होर्मुज विवाद सिर्फ समुद्री शुल्क या जहाजों की आवाजाही तक सीमित नहीं है। यह ईरान की अंदरूनी राजनीति, सैन्य प्रतिक्रिया और अमेरिका-विरोधी माहौल से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे माहौल में किसी भी बयान या सैन्य कार्रवाई का असर कई दिशाओं में फैल सकता है।

अहमदीनेजाद पर नया विवाद

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद सरकारी टीवी पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में दिखे। इससे पहले एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 2024 में उनकी इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद प्रमुख से मुलाकात हुई थी और उन्हें ईरान का नया नेता बनाए जाने की तैयारी की जा रही थी।

अहमदीनेजाद के कार्यालय ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है। टीवी पर दिखे वीडियो में वे कमजोर नजर आए, लेकिन उन्होंने कैमरे से बाहर मौजूद किसी व्यक्ति को देखकर मुस्कुराते हुए अभिवादन किया। यह घटना ईरान के भीतर सत्ता, निगरानी और बाहरी दावों को लेकर नए सवाल खड़े करती है।

हूती और सऊदी मोर्चा

यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब का एक निगरानी ड्रोन मार गिराया। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि अल-बैदा प्रांत के ऊपर उड़ रहे विंग लूंग-2 टोही ड्रोन को निशाना बनाया गया। सऊदी अरब की ओर से इस दावे पर तत्काल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

इसी बीच सऊदी अरब ने सना एयरपोर्ट पर हमला किया। CNN के हवाले से दावा किया गया कि हमला हूती नेताओं के विमान को लैंडिंग से रोकने के लिए किया गया। यह विमान ईरान से लौट रहा था। यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने आरोप लगाया कि विमान के जरिए हथियारों की तस्करी की जा रही थी।

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क्षेत्रीय संकट की गहरी परत

होर्मुज टैक्स विवाद को अलग करके नहीं देखा जा सकता। अमेरिका-ईरान सैन्य तनाव, ईरानी संसद का रुख, हूती गतिविधियां, सऊदी कार्रवाई, शिपिंग ट्रैफिक में कमी और तेल बाजार की चिंता—ये सभी एक ही संकट की अलग परतें हैं। ट्रम्प का 20% शुल्क प्रस्ताव इसी बड़े तनाव के बीच आया और उसी तेजी से वापस भी हो गया।

यह वापसी राहत का संकेत जरूर है, लेकिन तनाव खत्म होने का नहीं। अमेरिका अभी भी ईरान से जुड़े जहाजों और कार्गो पर पाबंदियों की बात कर रहा है। ईरान भी होर्मुज पर अपने नियंत्रण का दावा छोड़ता नहीं दिख रहा। यही वजह है कि समुद्री रास्ता खुला रहते हुए भी जोखिम बना हुआ है।

आगे क्या होगा

अब नजर तीन बातों पर रहेगी। पहली, खाड़ी देशों के साथ अमेरिका के निवेश समझौतों की असली तस्वीर कब सामने आती है। दूसरी, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है या नहीं। तीसरी, ईरान और अमेरिका सैन्य टकराव को और बढ़ाते हैं या कूटनीति को जगह देते हैं।

ट्रम्प ने 24 घंटे में फैसला पलट दिया, लेकिन होर्मुज का संकट अभी पलटा नहीं है। इस जलमार्ग से गुजरने वाला हर जहाज अब केवल माल नहीं ले जा रहा, वह दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक तनाव का भार भी ढो रहा है।

  1. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल 1: ट्रम्प ने कौन सा फैसला वापस लिया?
जवाब: उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टैक्स लगाने का फैसला वापस लिया।

सवाल 2: फैसला कितने समय में वापस लिया गया?
जवाब: यह फैसला ऐलान के करीब 24 घंटे के भीतर वापस लिया गया।

सवाल 3: ट्रम्प ने फैसला क्यों बदला?
जवाब: ट्रम्प ने कहा कि मिडिल ईस्ट नेताओं से बातचीत के बाद शुल्क हटाया गया और अब खाड़ी देश अमेरिका में निवेश करेंगे।

सवाल 4: ईरान ने इस पर क्या कहा था?
जवाब: ईरान ने तंज कसते हुए कहा था कि 20% टैक्स बहुत ज्यादा है और वह इससे कम शुल्क लेगा।

सवाल 5: होर्मुज स्ट्रेट क्यों अहम है?
जवाब: यह वैश्विक ऊर्जा और शिपिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहां तनाव बढ़ने से तेल कीमतों और माल ढुलाई पर असर पड़ सकता है।

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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