कोरोना आफ्टर इफेक्ट: लॉकडाउन के कारण बंद हो सकती हैं 7 लाख से ज्यादा छोटी दुकानें!!! जानें क्या है मुख्य कारण.. जानें अभी….

नकदी की कमी और दुकान मालिकों के गांव लौट जाने के कारण दुकानों के दोबारा खुलने पर स्थिति साफ नहीं
डिस्ट्रीब्यूटर्स की ओर से छोटे दुकानदारों को खरीदारी पर क्रेडिट नहीं देने से भी बढ़ रही है समस्या

नई दिल्ली | लॉकडाउन के कारण पूरे देश में 7 लाख से ज्यादा दुकानें स्थायी तौर पर बंद हो सकती हैं। इसमें करीब 6 लाख किराना स्टोर और 1 लाख के करीब रिटेल स्मार्टफोन विक्रेता शामिल हैं। कंज्यूमर गुड्स कंपनीज का कहना है फिलहाल अधिकांश दुकानें नकदी की कमी और दुकान मालिकों के गांव लौट जाने के कारण बंद पड़ी हैं। कंपनीज को डर है कि ज्‍यादातर दुकानदारी का बि‍जनेस करने वाले गांवों से नहीं लौटेंगे और यह दुकानें दोबारा से नहीं खुलेंगी।

60 फीसदी रिटेल स्मार्टफोन शॉप नहीं खुलीं

दुकानों के बंद होने का यह डर मोबाइल हैंडसेट सेक्टर में भी दिख रहा है। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक गैर जरूरी सामानों की बिक्री मिलने के बाद भी रिटेल में स्मार्टफोन बेचने वाली 60 फीसदी दुकानें नहीं खुली हैं। एसोसिएशन से करीब 1.5 लाख रिटेलर्स जुड़े हैं। इस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूटर इस समय नकदी में लेन-देन कर रहे हैं और अब वह पहले की तरह रिटेलर्स को 7 से 21 दिनों का क्रेडिट नहीं दे रहे हैं। इंडस्ट्री को डर है कि इन दुकानों के बाद होने के कारण बाजार में रिकवरी में देरी हो सकती है।

बड़ी किराना दुकानें भी प्रभावित

पारेल के कैटेगिरी हेड बी कृष्णा राव के मुताबिक, पारले उत्पाद बेचने वाली 58 लाख छोटी दुकानों में से करीब 10 फीसदी अप्रैल और मई में बंद हो चुकी हैं। यह ऐसी दुकानें थीं जो चाय, पान, घर या सड़क किनारे लगती थीं। राव के मुताबिक, इन दुकानों के बंद होने के कारण डिस्ट्रीब्यूटर्स की भी बड़ी राशि डूब गई है। ईटी से बातचीत में राव ने कहा कि इनमें से अधिकांश आउटलेट स्थायी रूप से बंद हो सकते हैं। बल्कि 42 लाख बड़े किराना स्टोर्स में से भी 1-2 फीसदी स्टोर्स बंद हो सकते हैं। राव के मुताबिक, अधिकांश दुकान मालिक अपने गांवों को लौट गए हैं और ऐसे हालात 5-6 महीने तक रह सकते हैं। इनमें से कुछ स्टोर दोबारा खुल सकते हैं। लेकिन इन छोटे किराना स्टोर्स के बंद रहने तक कंपनियों की पहुंच पर असर पड़ेगा।

कोविड-19 पर काबू के बाद बदलेंगे हालात

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के सीईओ इंडिया एंड सार्क सुनील कटारिया का कहना है कि यह स्टोर बंदी अस्थायी है और हालातों के अनिश्चित रहने तक ऐसी स्थिति रह सकती है। कटारिया के मुताबिक, शहरों में कोविड-19 पर काबू जैसे कारणों पर ही इन स्टोर्स का दोबारा खुलना निर्भर करेगा। इससे सुरक्षा की भावना पैदा होगी और दुकानों को चलाने के लिए मजदूर उपलब्ध होंगे। वहीं, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के एमडी वरुण बैरी का कहना है कि इनमें से अधिकांश स्टोर अस्थायी रूप से बंद हुए हैं। लॉकडाउन में छूट के साथ यह दोबारा से खुल सकते हैं।

देश में करीब 1.2 करोड़ स्मॉल रिटेल आउटलेट

देश में करीब 1.2 करोड़ स्मॉल रिटेल आउटलेट्स हैं। यह आउटलेट्स ग्रोसरी और एफएमसीजी उत्पादों की बिक्री करते हैं। लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में रिटेल आउटलेट प्रभावित हुए हैं। अधिकांश स्टोर शहरों के आंतरिक इलाकों में स्थित हैं। 

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