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Utility News: इन उपायों पर गौर करेंगे तो बजट के अनुकूल रहेगी EMI

आपके लिए फाइनेंंशियल एडवाइज : रेपो रेट बढ़ने के बाद EMI भी बढ़ने की आशंका

Utility News: देश के अधिकांश नौकरीपेशा लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए मकान या फ्लैट पर होम लोन की मदद लेते हैं और का र के लिए वो कार लोन की मदद लेते हैं। यह सुविधा जहां आपके सपनों का पूरा करती है, वहीं एक बड़ी राशि को EMI में चुकाने की आजादी प्रदान करती है। बहुत कम लोगों को यह पता होता है कि EMI भी दो प्रकार की होती है पहली वो जो हर महीने एक निर्धारित दिन पर आपके अकाउंट से ऑटोमैटिकली कट जाती है, लेकिन, इसके लिए आपके बैंक अकाउंट में पर्याप्त बैंक बैलेंस होना जरूरी है। वहीं दूसरी ईएमआई (EMI) उन लोगों के लिए होती है, जिनकी सैलरी समय पर नहीं आ पाती, जिसके कारण ईएमआई समय पर नहीं कट पाती। ऐसे में लेट पेमेंट की पेनल्टी तो देनी ही पड़ती है साथ ही, क्रेडिट स्कोर भी खराब हो जाता है, जिससे भविष्य में दोबारा लोन लेने में दिक्कत आती है।

 

क्या हैं एडवांस और एरियर ईएमआई (Arrears EMI)

जब लोन की किश्त महीने की शुरुआत में चुकानी पड़ती है, तो उसे एडवांस ईएमआई (Advance EMI)कहा जाता है। वहीं, जब महीने के आखिर में किश्त का भुगतान किया जाता हैं, तो उसे एरियर EMI कहा जाता है।

आप बैंक से जो भी लोन लेते हैं, वह गुड या बैड होता है। वह लोन जिससे आपके नेटवर्थ में इजाफा हो उसे गुड लोन और जिसमें कर्ज पर ब्याज के अलावा पैसे चुकाने पड़े उसे बैड लोन कहा जाता है।

 

कितना लोन लेना सही (how much loan is right to take)

लोन लेते समय डेट टू इनकम रेश्यो का ध्यान रखें। डेट टू इनकम रेश्यो 40 फीसदी से ऊपर न जाने दें, डेट टू इनकम रेश्यो (Debt to Income Ratio) 30 फीसदी से नीचे तो बेहतर

 

लोन भी होते हैं गुड और बैड (Good and Bad Loans)

ये है गुड लोन

1. एजुकेशन लोन

2. बिजनेस लोन

3. होम लोन

Utility News
file photo | Pixabay

ये है बैड लोन

1. ऑटो लोन

2. पर्सनल लोन

3. क्रेडिट कार्ड पर लोन

4. कन्ज्यूमेबल लोन

 

कौन सा लोन पहले चुकाएं

पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड लोन पर ऊंचा ब्याज होता है। जरूरत पड़ने पर सबसे पहले क्रेडिट कार्ड का भुगतान करें। क्रेडिट कार्ड पर सालाना 40 फीसदी तक ब्याज होता है। पर्सनल लोन पर 20 फीसदी तक ब्याज होता है

 

एडवांस सैलरी लोन (Advance Salary Loans)

अगर आपको पैसों की जरूरत है तब भी एडवांस सैलरी लोन (Advance Salary Loan) से बचना चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं एडवांस सैलरी लोन छोटी राशि का शॉर्ट टर्म लोन है, जिसे एक निश्चित अवधि में ब्याज के साथ किस्तों में चुकाना होता है। इस लोन को लेने के लिए कागजी कार्रवाई की जरूरत तो नहीं पड़ती, लेकिन ब्याज काफी ज्यादा होता है। सैलरी लोन 24 से 30 फीसदी के ब्याजदर पर मिलता है। इसका मतलब यह है कि आपको हर महीने इएमआइ भुगतान के साथ—साथ लोन पर 1.50 से 3.50 फीसदी तक का ब्याज अतिरिक्त देना पड़ सकता है।

 

मॉर्गेज लिंक्ड इंश्योरेंस बेहद अहम (Mortgage Linked Insurance)

लोन के दौरान यदि व्यक्ति की अचानक मौत हो जाती है तो उसके परिवार पर एक बड़ा बोझ आ जाता है। इससे बचने के लिए मॉर्गेज लिंक्ड इंश्योरेंस जैसी बीमा पॉलिसी लेकर आप परिवार का बोझ घटा सकते है। बैंक लोन की बाकी रकम भी बीमा कंपनी ही चुकाएगी। इससे आपके परिवार का भविष्य सुरक्षित बन सकेगा।

 

बैंक ही निर्धारित कर देते हैं ईएमआई की डेट

अधिकतर बैंक ईएमआई के लिए एडवांस ईएमआई का विकल्प चुनकर ग्राहक की ईएमआई की तारीख निर्धारित कर देते हैं। इसके लिए महीने के पहले सप्ताह की किसी तारीख को चुना जाता है। ग्राहकों की ओर से इस पर किसी तरह का सवाल जवाब नहीं किया जाता है, उन्हें यह ध्यान नहीं होता की उनके पास हमेशा ईएमआइ चुकाने का दूसरा विकल्प यानी एरियर ईएमआइ का विकल्प मौजूद होता है। आप बैंक से इस विकल्प को चुनने की बात कर सकते हैं।

 

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सांवरिया सेठ सिंह

थम्सअप भारत न्यूज पोर्टल शासन, सामाजिक, विकासात्मक और जनता की मूलभूत समस्याओं और उनकी चिंताओं के मुद्दों पर चौबीसों घंटे निष्पक्ष और विस्तृत समाचार कवरेज प्रदान करता है।

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