Monthly Premium Health Insurance: जानिए कैसे हो सकता है आपके लिए घाटे का सौदा Read it later

Monthly Premium Health Insurance: हैल्थ इंश्योरेंस को सभी के लिए किफायती बनाने के प्रयास में बीमा कंपनियों ने मंथली और क्वाटर्ली (तिमाही) प्रीमियम पेमेंट प्लान को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। इसके अलावा बीमा कंपनियां प्रीमियम पर जीरो-कॉस्ट ईएमआइ का विकल्प भी दे रही हैं। बीमा कंपनियों की यह पेशकश युवाओं को आकर्षित कर रही है, क्योंकि एक बार मोटा प्रीमियम जमा करने के बदले वे हर माह कम राशि देकर हैल्थ इंश्योरेंस का फायदा ले सकते हैं। हालांकि, निवेश सलाहकार लोगों को मंथली और क्वाटर्ली प्रीमियम वाले प्लान से दूरी बनाने के लिए कह रहे हैं, क्योंकि इसमें कई तरह के जोखिम हैं।

प्रीमियम चूक जाने का रहता जोखिम

डिट्टो इंश्योरेंस के बीमा सलाहकार स्पनिल सतीश ने बताया कि मेरे एक क्लाइंट ने अपने पेरेंट्स के लिए मंथली पेमेंट प्रीमियम प्लान लिया। डेबिट कार्ड से भुगतान तिथि पर ऑटो-डेबिट नहीं हुआ। 25 दिन बाद पता चला और पॉलिसी लैप्स कर गई। इससे उनके पेरेंट्स ने बीमा के सभी लाभ खो दिए और उन्हें नई पॉलिसी करानी पड़ी।

क्लेम देने से मना कर सकती हैं कंपनियां

प्रीमियम के लिए दिए जाने वाले 15 दिन के ग्रेस पीरियड में पॉलिसी रिन्यू करा सकते हैं। समय खत्म होने के बाद पॉलिसी लैप्स हो जाती है। यदि ग्रेस पीरियड में बीमाधारक अस्पताल में भर्ती होते हैं तो कंपनी क्लेम देने से मना कर सकती है। मंथली पेमेंट प्लान का प्रीमियम सालाना पेमेंट वाली पॉलिसी से 3% से 4% तक अधिक होता है।

दूसरी ओर बेस कवर पर बीमा राशि बढ़ाने से प्रीमियम के रूप में अधिक पैसा देना पड़ता है। इसकी जगह अगर आप सुपर टॉपअप प्लान लेते हैं तो यह आपको सस्ता पड़ेगा। 10 लाख रुपये की बेस पॉलिसी को 50-90 लाख रुपये के सुपर टॉपअप प्लान से जोड़ना बेस प्लान पर बीमा राशि बढ़ाने की तुलना में 60 फीसदी तक सस्ता है।

मंथली प्रीमियम प्लान के नुकसान

मान लीजिए आपने 4 महीने के प्रीमियम का भुगतान किया है और चौथे महीने में अस्पताल में भर्ती होते हैं, जिसका खर्च 30,000 रुपए आता है। ऐसे में बीमा कंपनी क्लेम राशि में से बचे हुए 8 महीने का प्रीमियम काट लेती है और उसके बाद ही क्लेम का सेटलमेंट करती है। अगर क्लेम राशि बकाया प्रीमियम से कम है तब भी क्लेम सेटलमेंट के लिए बचे 8 माह के प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है।

पॉलिसीधारकों की जेब ऐसे कटती है

इसे उदाहरण से समझें

पॉलिसीधारक की उम्र: 25 साल

सम इंश्योर्ड: 10 लाख रुपए

सालाना प्रीमियम: 12,500 रुपए

मंथली प्रीमियम: 1004 रुपए

क्लेम राशि: 30,000 रु., चौथे माह में

बकाया प्रीमियम: 8*1004=8032

वास्तविक पेमेंट: 30,000-8032=21,968

क्या है शर्त

मंथली प्रीमियम हैल्थ इंश्योरेंस में पूरे साल के बकाया प्रीमियम का भुगतान करने के बाद ही क्लेम किया जा सकता है। क्लेम राशि से बकाया प्रीमियम घटाने के बाद ही वास्तविक राशि का पेमेंट होता है।

किसी भी अस्पताल में कराएं कैशलेस इलाज

‘कैशलेस एवरीवेयर’ मुहिम के तहत हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर्स देश के चालीस हजार अस्पतालों में से अपनी मर्जी के किसी भी अस्पताल में अपना इलाज कैशलेस करा सकते हैं, चाहे वह अस्पताल हैल्थ इंश्योरेंस कंपनी के नेटवर्क हॉस्पिटल में शामिल हो या नहीं हो।

किन हॉस्पिटल्स में मिलेगी सुविधा

देश के 15 से ज्यादा बेड वाले वे सभी अस्पताल जो अपने राज्य की हैल्थ अथॉरिटी से पंजीकृत हैं उनमें हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर कैशलेस इलाज का लाभ ले पाएंगे। यह सुविधा मौजूदा पॉलिसी होल्डर सहित भविष्य में स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने वालो को बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के मिलेगी।

 

हैल्‍थ इंश्‍योरेंस के अन्‍य फायदे

कई बीमा कंपनियां रेस्‍टोरेशन का बेनिफ‍िट भी देती हैं। जैसे कि मान लीजिए कि आपने 20 लाख रुपये की बीमा राशि वाली पॉलिसी ल है और केवल 10 लाख रुपये का उपयोग किया है। ऐसी स्थिति में आप बीमा राशि वापस पा सकते हैं। यानी कंपनी उसी साल दोबारा 20 लाख रुपये की बीमा राशि देगी। यह जरूरत पड़ने पर आपको अतिरिक्त कवरेज प्रदान करता है और बैकअप योजना के रूप में कार्य करता है।

 

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