Tarique Rahman returns Bangladesh: 17 साल बाद तारिक रहमान की वापसी से चुनावी माहौल गरम, रोड शो में जुटी भारी भीड़ Read it later

Tarique Rahman returns Bangladesh — बांग्लादेश की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आ गया है जिसने देश के सत्ता संतुलन, चुनावी रणनीति और जनभावना को एक साथ हिला दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान 17 साल बाद देश लौटे हैं। उनकी वापसी सिर्फ एक व्यक्तिगत यात्रा नहीं, बल्कि उस लंबे राजनीतिक इंतज़ार का अंत है जिसमें उनकी पार्टी, समर्थक और विरोधी—तीनों अपनी-अपनी उम्मीदें और रणनीतियाँ बांधकर बैठे थे। तारिक के आगमन से यह संकेत साफ़ हो गया है कि बांग्लादेश की राजनीति 2025 के आम चुनाव से ठीक पहले एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है।

Tarique Rahman
ढाका में तारिक रहमान की 17 साल बाद वापसी पर आयोजित रोड शो का एरियल व्यू। खालिदा जिया के बेटे और BNP के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान के काफिले के स्वागत में हजारों समर्थक जुटे। प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे तारिक ने लौटते ही सुरक्षा और न्याय की बहाली का वादा किया।(Photo by S M Ariful Amin / AFP )
हसीना सरकार से टकराव और 17 साल का निर्वासन

2008 वह साल था जब तारिक रहमान ने बांग्लादेश छोड़कर लंदन जाने का फैसला लिया। उस समय उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज थे और उन्हें गिरफ्तारी का डर था। यह वह दौर था जब शेख हसीना की सरकार लगातार मज़बूत हो रही थी और विपक्षी BNP राजनीतिक दबाव में थी। तारिक के देश छोड़ने के फैसले को विरोधियों ने पलायन कहा, जबकि समर्थकों ने इसे ‘‘राजनीतिक उत्पीड़न से बचने का कदम’’ माना।

17 साल का यह समय तारिक के राजनीतिक करियर के सबसे शांत लेकिन रणनीतिक वर्षों में शामिल रहा। उन्होंने विदेश में रहकर पार्टी की दिशा, रणनीति और नेतृत्व को प्रभावित किया। BNP के भीतर उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखा गया, जिनके पास पार्टी की विचारधारा और जनसमर्थन दोनों की चाबी मौजूद है।

ढाका में वापसी — 1 लाख समर्थक, 13 किलोमीटर का रोड शो और सियासी गर्मी

जैसे ही तारिक रहमान की वापसी की घोषणा हुई, BNP समर्थकों में जोश की लहर दौड़ गई। ढाका एयरपोर्ट पर हजारों की भीड़ ने उनका स्वागत किया, और 13 किलोमीटर लंबा रोड शो एक जनसमर्थन की शक्ति-परीक्षा में बदल गया।
एयरपोर्ट से प्रारंभ हुआ यह कारवां 300 फीट रोड तक बढ़ा और इस सफर को पूरा करने में तीन घंटे लगे—जो सामान्य समय से कई गुना अधिक था। समर्थकों की संख्या 1 लाख से ज्यादा आँकी गई, जिसने यह साबित कर दिया कि 17 साल के बाद भी तारिक की राजनीतिक पकड़ ढीली नहीं हुई है।

उनके काफिले पर फूलों की बारिश, बैनर, पोस्टर और नारेबाज़ी ने इस रोड शो को सिर्फ वापसी का आयोजन नहीं, बल्कि सत्ता में वापसी की संभावनाओं का मंच बना दिया।

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13 किलोमीटर लंबे रोड शो में तारिक रहमान बस की खिड़की के पास खड़े होकर समर्थकों का हाथ हिलाकर स्वागत करते हुए 300 फीट रोड तक पहुँचे।
17 मिनट का भाषण — शांति का संदेश, राजनीतिक संकेत और रणनीतिक चुप्पी

तारिक रहमान ने 17 मिनट तक बोलते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता ‘‘देश में शांति कायम करना और नया बांग्लादेश बनाना’’ है। उनके भाषण में एक बात विशेष ध्यान देने योग्य रही—उन्होंने शेख हसीना का नाम तक नहीं लिया।
यह चुप्पी साधारण नहीं थी, बल्कि एक रणनीतिक संकेत थी। BNP समर्थकों के बीच यह संदेश गया कि तारिक टकराव नहीं, बल्कि वैकल्पिक नेतृत्व की भूमिका में लौटे हैं। उन्होंने न शब्दों से हमला बोला, न प्रत्यक्ष चुनौती दी—उनका यह संतुलन बताता है कि वे सत्ता के लिए लंबे खेल की तैयारी कर रहे हैं।

खालिदा जिया की सेहत और सत्ता का उत्तराधिकार

वापसी के तुरंत बाद तारिक अपनी मां और BNP की शीर्ष नेता खालिदा जिया से मिलने एवरकेयर अस्पताल पहुँचे।
खालिदा की बिगड़ती सेहत और सक्रिय राजनीति से दूरी ने पिछले कई वर्षों से BNP को नेतृत्व के संकट में डाल रखा था। अब तारिक की मौजूदगी उस खाली जगह को भरने वाले चेहरा के रूप में देखी जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि खालिदा जिया की बीमारी और तारिक की स्वदेश वापसी ने PM पद की रेस में उन्हें मजबूती से खड़ा कर दिया है।

2025 के चुनाव और तारिक की संभावित PM दावेदारी

अगले साल 12 फरवरी को बांग्लादेश में आम चुनाव होने हैं। तारिक की वापसी ने इस चुनावी खेल में नई ऊर्जा भर दी है।
BNP समर्थक उन्हें ‘‘भविष्य का प्रधानमंत्री’’ मान रहे हैं, हालांकि तारिक ने खुद इस पर कोई सीधा दावा नहीं किया है।

क्यों माना जा रहा है कि तारिक रहमान PM रेस में हैं?

  • खालिदा जिया सक्रिय राजनीति में नहीं

  • BNP में उनका जनाधार और नियंत्रण

  • 17 साल बाद भी समर्थकों की भारी संख्या

  • वापसी के बाद चुनाव से पहले का टाइमिंग

  • रोड शो की सियासी शक्ति-प्रदर्शन

यह सब संकेत देता है कि BNP उन्हें चुनावी चेहरे के रूप में आगे लाने की तैयारी में है।
विपक्ष चाह रहा है कि तारिक की वापसी से जनता के बीच बदलाव की उम्मीद जगे, खासकर युवाओं में—जो रोजगार, आर्थिक सुधार और राजनीतिक स्थिरता चाहते हैं।

रणनीति की नई दिशा — संघर्ष नहीं, समाधान की राजनीति

तारिक के भाषण में जिस शांति और बदलाव की बात की गई, वह यह स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में BNP संघर्ष की जगह समाधान की राजनीति पर जोर देगी।
उनकी रणनीति यह लगती है कि जनता की थकान, आर्थिक दबाव और सियासी असंतोष को राजनीतिक पूंजी में बदला जाए।

यदि तारिक रहमान इस जनभावना को चुनावी शक्ति में बदलने में सफल होते हैं, तो बांग्लादेश की राजनीति में 2025 एक निर्णायक साल साबित हो सकता है।

क्या बांग्लादेश की राजनीति में नया युग शुरू हो चुका है?

तारिक रहमान की यह वापसी सिर्फ BNP की ताकत का संकेत नहीं—यह बांग्लादेश में राजनीतिक संतुलन के एक नए दौर की शुरुआत भी हो सकती है।
उनकी मौजूदगी ने विपक्ष को नया नेतृत्व दिया है, समर्थकों को आशा दी है और सत्ता पक्ष को सतर्क कर दिया है।

अब देखने वाली बात है—
क्या तारिक रहमान सिर्फ उम्मीद हैं
या वाकई आने वाले समय में सत्ता की दिशा बदलने वाला चेहरा?

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