धनतेरस 2025: क्यों है ये आरोग्य और अमृत का त्योहार, जानिए धन्वंतरि पूजा और यमराज दीपदान का धार्मिक महत्‍व Read it later

Dhanteras 2025: आज धनतेरस का पर्व है जो दिवाली (Diwali festival) की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन पूरे देश में लोग खरीदारी (Shopping) करते हैं और शाम को भगवान Dhanvantari, Kuber और Lakshmi की पूजा करते हैं।
इसके बाद यमराज (Yama Deepdan) के लिए घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाया जाता है। Skanda Purana के अनुसार, इस दिन यमराज के नाम दीपदान करने से अकाल मृत्यु (Untimely Death) का भय नहीं रहता।

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सेहत सबसे बड़ा धन, इसलिए होती है धन्वंतरि पूजा

Dhanteras को अक्सर लोग केवल धन (Wealth) से जोड़ते हैं, लेकिन असल में यह Arogya (Health Wealth) का उत्सव है। भगवान Dhanvantari, जो आयुर्वेद (Ayurveda) के देवता हैं, इसी दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।


Vishnu Purana में निरोगी शरीर को सबसे बड़ा धन कहा गया है। इसलिए धनतेरस पर अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना के लिए भगवान धन्वंतरि की पूजा (Dhanvantari Puja) की जाती है।

Dhanteras 2025 पर शुभ समय में करें खरीदारी

Dhanteras 2025 के दिन खरीदारी (Shopping Muhurat) के लिए कुल छह शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन जैसी चीज़ों की खरीद को अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसे में खरीदारी के लिए सही समय का ध्यान रखना जरूरी है।

Dhanteras 2025
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सुबह का पहला शुभ मुहूर्त – 8:00 से 9:30 बजे तक

दिन की शुरुआत ही Shubh Muhurat से हो रही है। सुबह 8:00 बजे से 9:30 बजे तक का समय धनतेरस खरीदारी के लिए अनुकूल है।

दोपहर 12:30 से 2:00 बजे तक – चंचल

यह अवधि Chanchal Yoga में आती है। यदि जरूरी हो तो इस समय छोटी-मोटी चीजों की खरीदारी की जा सकती है, लेकिन बड़े निवेश से बचें।

दोपहर 2:00 से 3:30 बजे तक – लाभ योग

यह समय Labh Yoga का है और Dhanteras Shopping के लिए बहुत अच्छा माना गया है। इस दौरान की गई खरीदारी दीर्घकालिक लाभ देती है।

दोपहर 3:30 से शाम 5:00 बजे तक – अमृत काल

इस मुहूर्त को Amrit Kaal कहा जाता है। यह समय अत्यंत शुभ और सौभाग्यदायक है। यदि आप वाहन या सोने की खरीदारी करना चाहते हैं, तो यह बेहतरीन समय है।

 शाम 5:55 से 7:25 बजे तक – लाभ (प्रदोष काल)

Pradosh Kaal के अंतर्गत आने वाला यह समय भी लाभ योग से जुड़ा है। इस दौरान खरीदी गई वस्तुएं सुख-समृद्धि बढ़ाने वाली मानी जाती हैं।

रात 8:55 से 10:25 बजे तक – शुभ

धनतेरस की रात को भी Shubh Muhurat उपलब्ध है। यह अंतिम समय उन लोगों के लिए अच्छा है जो दिन में व्यस्त रहने के कारण देर शाम को खरीदारी करते हैं।

समुद्र मंथन और अमृत कलश की कथा

Samudra Manthan के समय कार्तिक मास की द्वादशी तिथि को कामधेनु गाय प्रकट हुई थी और अगले दिन त्रयोदशी को धन्वंतरि अमृत कलश के साथ निकले। उनके हाथों में औषधियां थीं, और उन्होंने मानव जाति को Amrit (Nectar) और Ayurveda Knowledge प्रदान किया।
यही वजह है कि दिवाली की शुरुआत Dhanteras Puja से मानी जाती है, जो जीवन में स्वास्थ्य और आयु का आशीर्वाद देती है।

सोना खरीदने की परंपरा और धार्मिक महत्व

Gold Purchase on Dhanteras शुभ माना जाता है। Rigveda के Hiranyagarbha Sukta में कहा गया है कि सृष्टि स्वर्ण गर्भ से उत्पन्न हुई। सोना सूर्य (Sun) की ऊर्जा का प्रतीक भी माना गया है।
एक पौराणिक कथा के अनुसार, हेम नामक राजा के पुत्र को मृत्यु से बचाने के लिए उसकी पत्नी ने गहनों (Gold Ornaments) का ढेर लगाकर यमराज का रास्ता रोक दिया। इसलिए आज भी धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने की परंपरा है।

धन्वंतरि पूजा मुहूर्त 2025

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा शाम 6:00 बजे से रात 8:15 बजे तक के शुभ मुहूर्त में की जाती है। इस समय की गई पूजा आरोग्य, दीर्घायु और समृद्धि प्रदान करती है।

धन्वंतरि पूजा मंत्र

“सत्यं च येन नितरां रोगं विशुद्धं अनवस्थितं।
च सर्वं आरोग्यमस्तु गृहं निगृह्य औषधयः स्वरूपं,
धन्वंतरिं च सततं प्रणमामि नित्यं॥”

यह मंत्र आरोग्य की प्राप्ति और रोगों से मुक्ति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।

घी का दीपक लगाएं

भगवान धन्वंतरि की पूजा में गाय के शुद्ध घी से दीपक जलाने की परंपरा है। यह आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होता है।

औषधियों का प्रयोग करें

पूजन सामग्री में औषधीय पौधों को शामिल करें। इन्हें प्रसाद के साथ ग्रहण करने से बीमारियां दूर होती हैं और शरीर निरोगी रहता है।

विशेष भोग अर्पित करें

धन्वंतरि पूजन में काली तुलसी, गाय का दूध और इससे बने मक्खन का भोग लगाना शुभ माना जाता है। यह मानसिक और शारीरिक शुद्धता के लिए लाभकारी होता है।

यमराज के नाम दीपदान का महत्व

धनतेरस की रात यमराज (Yama) को समर्पित दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाना शुभ माना गया है। यह दीप Yama Deepdan अकाल मृत्यु (Accidental Death Prevention) से रक्षा करता है।
स्कंद पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन यमराज के नाम दीप जलाता है, उसके घर में मृत्यु का भय नहीं रहता और आयु में वृद्धि होती है।

यमराज के लिए दीपदान का शुभ मुहूर्त

धनतेरस की शाम 6:00 बजे से 7:00 बजे तक यमराज के लिए दीपदान करने का उत्तम समय है। इसे करने से अकाल मृत्यु से बचाव होता है।

दीपदान मंत्र

“मृत्युनाः पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यजः प्रीयतामिति॥”

इस मंत्र का जाप करते हुए दीपदान करें, जिससे यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार की रक्षा करते हैं।

 दीपदान की सही विधि
  • सूर्यास्त के बाद आटे का चार मुख वाला दीपक बनाएं।

  • दीपक में सरसों या तिल का तेल डालें और इसे घर के दक्षिण दिशा में रखें।

  • दीपक लगाते समय यमराज और उनके परिवार की लंबी उम्र और कृपा की कामना करें।

जैन परंपरा में धन्य तेरस का महत्व

जैन धर्म में Dhanteras को Dhanaya Teras या Dhyan Teras भी कहते हैं। माना जाता है कि भगवान Mahavira इस दिन ध्यान में लीन हुए थे। इसी कारण यह दिन ध्यान और आत्मशुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है।
दिवाली के दिन उन्हें Nirvana प्राप्त हुआ, इसलिए धनतेरस आत्मिक विकास और मोक्ष के मार्ग की शुरुआत का दिन भी है।

धनतेरस पर क्या करें और क्या न करें
  • इस दिन घर की साफ-सफाई (Cleanliness) और पूजा अनिवार्य है।

  • सोना, चांदी या स्टील के बर्तन (Gold, Silver, Utensils) खरीदना शुभ माना गया है।

  • Dhanteras 2025
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  • कर्ज या उधारी लेने से बचें।

  • घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और दक्षिण दिशा में यम दीप रखें।

धनतेरस पर बर्तन और सोना खरीदने की परंपरा का कारण

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उनके हाथ में सोने का कलश था, इसलिए इस दिन सोना और बर्तन खरीदने की परंपरा शुरू हुई।

आर्थिक स्थिति के अनुसार बढ़ी खरीदारी की विविधता

समय के साथ लोगों ने अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार विकल्प अपनाए। अब सोने के साथ-साथ चांदी, स्टील, तांबा, और ब्रास (पीतल) के बर्तन भी खरीदे जाते हैं।

समृद्धि की कामना से जुड़ी है यह परंपरा

परिवार की समृद्धि और खुशहाली के लिए इस दिन लोग गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां, चांदी के सिक्के और ज्वेलरी खरीदते हैं। यह दिन शुभ माना जाता है और इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

धनतेरस से दीपोत्सव तक पांच दिन का पर्व

Dhanteras से शुरू होकर पांच दिन तक चलने वाले दीपोत्सव में Naraka Chaturdashi, Lakshmi Puja (Diwali), Govardhan Puja, और Bhai Dooj शामिल हैं।
यह त्योहार न केवल धन-संपदा बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और सकारात्मकता लाने वाला पर्व है।

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