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दुनिया के 93% युवक और 62% युवतियां 18 साल से पहले देख चुके पॉर्न, जानें कारण!

Sex Education: यौन शिक्षा, पॉर्न एडिक्शन कुछ ऐसे विषय है जिन पर कोई बात करना पसंद नहीं करता। लेकिन पॉर्न एक ऐसी समस्या बन गई है जो युवाओं को सबसे ज्यादा अपनी ओर आकर्षित कर रही है। भारत समेत दुनिया भर में पॉर्न एडिक्शन एक बहुत गंभीर समस्या है।

एक नॉन-गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन ह्यूमन लाइफ इंटरनेशनल ने साल 2021 की अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि विश्व भर में 93% लड़के और 62% लड़कियां 18 साल के होने से पहले ही पॉर्न साइट्स के संपर्क में आ जाते हैं। लेकिन ऐसे कई कारण है जिनकी वजह से युवा पॉर्न की ओर आकर्षित हो रहे हैं, आईए जानते हैं ऐसे ही कुछ कारणों के बारे में:

ब्राउज़र पर बहुत आसानी से उपलब्ध:

पॉर्न कंटेंट ब्राउज़र जैसे गूगल पर बहुत ही आसानी से मिल जाता है और इसके लिए कोई ‘रॉकेट साइंस’ लगाने की आवश्यकता नहीं होती। साथ ही अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही जब कुछ चुनिंदा लोगों के पास ही स्मार्टफोन होता था।

“होती क्या है पॉर्न?”:

ये प्रश्न कई युवाओं को पॉर्न की लत लगा देता है। जब कोई युवा पॉर्न के बारे में सुनता है, तो उसके मन में जिज्ञासा जागती है इसके बारे में जानने की। इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए वह ब्राउज़र पर जाएगा और ऐसा कंटेंट मिलेगा जिससे वो चाहकर भी दूर नहीं हो पाएगा।

मैं कैसे पीछे रह जाऊं!:

जब कोई युवा अपने दोस्तों को पॉर्न देखने के बारे में बोलता हुआ सुनता है, तो उस पर भी दबाव बनता है और उसे भी लगता है कि मैं कैसे पीछे रह जाऊं, जिसके चलते वह भी इसका शिकार हो जाता है।

स्ट्रेस और एंक्साइटी:

युवा पीढ़ी में पॉर्न की लत के लिए एंक्साइटी और स्ट्रेस सबसे प्रमुख कारणों में से एक है। जब युवाओं द्वारा एंक्साइटी और स्ट्रेस महसूस करते हैं, तो उससे छुटकारे पाने के लिए वो पॉर्न देखते हैं, ये सोच के कि पॉर्न देखने से उनका एंक्साइटी और स्ट्रेस कम हो जायेगा, लेकिन होता इसका ठीक उलटा है।

कम ज्ञान:

सेक्स एजुकेशन  (sex education) की कमी पॉर्न एडिक्शन को बढ़ावा देती है, खासकर युवाओं के बीच। सेक्स एजुकेशन और पॉर्न के नुकसानों की पूरी जानकारी न होने से भी इसका एडिक्शन बढ़ता है क्योंकि उन्हें पॉर्न एडिक्शन की हानियों की भनक तक नहीं है।

माता पिता का कम ध्यान:

अपने बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी के बारे में माता-पिता की कम जानकारी युवाओं में पॉर्न की लत को बढ़ाने में योगदान करती है।

ग्लैमर ही ग्लैमर:

ग्लैमर के बहुत ज्यादा हावी होने से भी युवाओं में पॉर्न एडिक्शन बढ़ा है। कई अध्ययन में पाया गया है कि पॉर्न को ग्लैमराइज करने से पॉर्न देखना नॉर्मल हो गया है, जिससे युवाओं को पॉर्न देखने में शर्म नहीं आती और उसकी लत लग जाती है।

 

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सांवरिया सेठ सिंह

सांवरिया सेठ सिंह पत्रकारिता के क्षेत्र में 14 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ ThumbsUp Bharat से जुड़े हैं। देश के कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और डिजिटल न्यूज पोर्टल पर अपनी सेवाएं देने के बाद वे इस मंच का हिस्सा बने हैं। बिजनेस, देश-प्रदेश, धर्म और टेक्नोलॉजी समाचारों की गहरी समझ रखने वाले सांवरिया सेठ सिंह का अनुभव ThumbsUp Bharat की संपादकीय टीम को और सशक्त बनाता है।

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