भारत सरकार ने New Income Tax Act 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद नोटिफाई कर दिया है। यह कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और 1961 के पुराने टैक्स कानून की जगह लेगा। इसका मुख्य उद्देश्य टैक्स सिस्टम को आसान और पारदर्शी बनाना है। सरकार का कहना है कि इससे टैक्स रेट्स में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन टैक्सपेयर्स को सुविधा और स्पष्टता जरूर मिलेगी।
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📝 टैक्स कानून को आसान बनाने की बड़ी कोशिश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में यह बिल पेश किया था। इसमें Income Tax Act की शब्द संख्या 50% घटाकर 5 लाख से 2.5 लाख कर दी गई है। यानी टैक्सपेयर्स के लिए अब भाषा और प्रावधान दोनों सरल होंगे। बिल को आसान बनाने और अनावश्यक प्रावधानों को हटाने के लिए हजारों सुझाव लिए गए थे।
📌 New Income Tax Act की 4 अहम बातें
1. टैक्स ईयर की नई परिभाषा
नए कानून में Assessment Year को बदलकर सिर्फ “Tax Year” कर दिया गया है। अब दस्तावेज़ 823 से घटकर 622 पन्नों का हो गया है।
2. क्रिप्टो एसेट्स पर निगरानी
Crypto assets को अब अघोषित आय (Un-disclosed income) के दायरे में शामिल किया गया है, जैसे नकद, सोना और ज्वेलरी आते हैं। इसका मकसद डिजिटल लेन-देन को कानूनी दायरे में लाना है।
3. टैक्सपेयर्स चार्टर
बिल में Taxpayers Charter शामिल है जो टैक्सपेयर्स के अधिकारों की रक्षा करेगा और टैक्स प्रशासन को पारदर्शी बनाएगा।
4. सैलरी से संबंधित कटौतियों का सरलीकरण
Standard Deduction, Gratuity, Leave Encashment जैसे प्रावधान अब एक ही जगह सूचीबद्ध होंगे। इससे टैक्सपेयर्स को आसानी होगी।
इनकम टेक्स्ट एक्ट में बदलाव से जुड़ी अन्य खबर यहां पढ़ें – Income Tax Act 2025: 63 साल बाद बदलेगा पूरा टैक्स सिस्टम, क्या होगा नया टैक्स कानून? जानें पूरी डिटेल
⏳ 60 हजार घंटे की मेहनत से बना बिल
New Income Tax Act 2025 तैयार करने में 60,000 से ज्यादा घंटे लगे। इसके लिए 150 अफसरों की कमेटी ने काम किया। 20,976 ऑनलाइन सुझाव मिले और इंटरनेशनल लेवल पर भी सलाह ली गई। Australia और UK के टैक्स रिफॉर्म मॉडल का अध्ययन किया गया।
🌍 अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुधार
भारत ने New Income Tax Act को तैयार करने में 2009 और 2019 के पुराने दस्तावेजों का अध्ययन किया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सलाहकारों और अन्य देशों की प्रैक्टिस को भी अपनाया गया ताकि टैक्स कानून विश्वस्तरीय हो सके।
🎯 टैक्सपेयर्स को सीधे लाभ
नए एक्ट से टैक्सपेयर्स को तीन बड़े लाभ मिलेंगे:
टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया आसान होगी।
डिजिटल ट्रांजैक्शन पर पारदर्शिता आएगी।
टैक्स अधिकारियों और टैक्सपेयर्स के अधिकारों की स्पष्ट परिभाषा होगी।
क्या है New Income Tax Act में खाास जानें
सैलरी क्लास के लिए
आय के स्रोत 5 से बढ़कर 6
New Income Tax Act में अब डिजिटल अर्निंग और एस्सेट्स भी आयकर में शामिल होंगे। ऑनलाइन माध्यम से होने वाली कमाई पर भी टैक्स लगेगा। पहले आयकर कानून में केवल 5 स्रोत माने जाते थे—सैलरी, हाउस-प्रॉपर्टी, बिजनेस इनकम, कैपिटल गेन और अन्य स्रोत।
फैमिली पेंशन पर राहत
कर्मचारी के निधन के बाद परिवार को मिलने वाली फैमिली पेंशन में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है। पहले यह 15,000 रुपये था।
डिजिटल ट्रांजैक्शन
डिजिटल लेन-देन को आयकर छूट और डिडक्शन के दायरे में लाया गया है।
कारोबारियों के लिए
एसेसमेंट और प्रोसेसिंग
अब बैंक अकाउंट इनकम टैक्स से लिंक होंगे। जीएसटी फाइलिंग और आईटीआर की रियल टाइम प्रोसेसिंग होगी।
CSR पर छूट खत्म
कंपनियों को अब CSR ट्रेनिंग पर होने वाले खर्च की डिडक्शन नहीं मिलेगी।
बिजनेस खर्चों पर बदलाव
फ्रॉड और इंसाइडर ट्रेडिंग से जुड़े खर्चों की टैक्स छूट नहीं मिलेगी।
बैंक और एनपीएस पर कटौती
पहले बैंक और एनपीएस से लोन डेट पर 8.5% तक की डिडक्शन मिलती थी। अब यह सीमा घटाकर 5% कर दी गई है।
TDS प्रावधान
जरूरत पड़ने पर करदाता TDS प्रावधानों में राहत मांग सकेंगे।
TDS रिटर्न पर पेनाल्टी
TDS रिटर्न देर से फाइल करने पर रोज़ाना 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। अधिकतम पेनाल्टी 1 लाख रुपये तक होगी।
स्टार्टअप और अन्य प्रावधान
स्टार्टअप और स्वसहायता समूह
अब स्टार्टअप्स, स्वसहायता समूह और डिजिटल ट्रांजैक्शन भी छूट और डिडक्शन के दायरे में आएंगे।
डिजिटल सबूत
आयकर सर्वे में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल सबूतों को मान्य माना जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक नोटिस
आयकर सर्वे और अस्सेसमेंट से जुड़े नोटिस अब इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाएंगे।
संपत्ति कर
यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति पर मालिकाना हक साबित कर देता है, तो टैक्स नहीं लगेगा।
डिजिटल टैक्स ऑडिट
सरल ऑडिट सिस्टम
डिजिटल टैक्स ऑडिट के लिए अब विभाग के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।
हवाई यात्रा पर टैक्स
शहर से गांव की दूरी तय करने पर टैक्स छूट का प्रावधान रहेगा।
चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन
हर प्रकार के दान का ऑडिट अनिवार्य होगा। एक रुपये का दान भी अगर मिला है तो उसका ऑडिट जरूरी होगा।
रियल एस्टेट
अब बिना बिके प्रॉपर्टी पर सालाना टैक्स नहीं लगेगा। पहले सालाना टैक्स देना अनिवार्य था। अब दो साल तक छूट मिलेगी।
सजा का प्रावधान
टैक्स चोरी पर कड़ी कार्रवाई
टैक्स चोरी करने पर 200% तक जुर्माना और 50 लाख रुपये से अधिक की चोरी पर जेल हो सकती है।
व्यक्तिगत आयकरदाता
6 महीने की देरी पर 25,000 रुपये तक की पेनाल्टी लगेगी।
कंपनियों के लिए
5 लाख रुपये तक की देरी पर 1.25 लाख रुपये तक की पेनाल्टी और 25,000 रुपये रोजाना का जुर्माना लग सकता है।
बड़ा कैश लोन
2 लाख रुपये से अधिक नकद लोन लेने-देने पर 100% पेनाल्टी लगेगी। 10 लाख रुपये से अधिक की रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी।
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