रिपोर्ट में खुलासाः भारत में एक साल में 500 करोड़ की एंटीबायोटिक बिक गईं‚ देश में बिना प्रिस्क्रिप्शन के मेडिसिन ले रहे लोग

Indians Using Antibiotic Medicines Without Guidance
Representative Image | Getty Images

Indians Using Antibiotic Medicines Without Guidance: भारत में बिना चिकित्सक की पर्ची के बिना सोचे समझे हल्का सा बॉडी पेन पर दवा खाने का चल कोई नया नहीं हैं‚ लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में एक साल के भीतर लोगों ने 500 करोड़ की एंटीबायोटिक दवाएं खरीदी हैं। दरअसल ये खुलासा एक रिपोर्ट में हुआ है। बता दें कि कोरोना महामारी की शुरुआत से ही दवाओं का बाजार गर्मागरम हो गया था। ऐसे में खाने वाली  दवाएं खूब धड़ल्ले से बिकीं। वहीं रही सही कसर वॉट्सएप नाम के तथाकथित डॉक्टर साहब ने पूरी कर दी। 

कोरोनाकाल में वॉट्सएप पर मैसेज खूब इधर से  उधर वायरल किए गए कि फलां दवा खाने से कोरोना नहीं होगा… इसके साथ ये दवा लें…. इस तरह पांच से सात  दवाईयों के कोम्बिनेशन मैसेज वॉट्स पर आगे से आगे लोग सरकाते गए। इससे कुछ हुआ तो नहीं लेकिन दवा बाजार ने खूब मुनाफा कमाया।   

 चौंकाने वाली बात ये भी कि कई दवा को ड्रग कंट्रोलर की मंजूरी भी नहीं

बहरहाल अब हम आपको यहां बता दें कि लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया जर्नल में प्रकाशित एक हालिय हुए रिसर्च में सामने आया है कि साल 2019 में भारत में 500 करोड़ एंटीबायोटिक टैबलेट की खपत हुई। चौंकाने वाली बात तो ये है कि इनमें से कई मेडिसिंस तो ऐसी हैं, जिन्हें ड्रग कंट्रोलर से मंजूरी तक नहीं मिली है।

यूं हुआ रिसर्च

दरअसल शोधकर्ताओं ने निजी क्षेत्र के दवा बिक्री डेटाबेस फार्माट्रैक के आंकड़ों का विश्लेषण किया। ये कुल डेटा 9 हजार वेंडरों से इकट्ठा किया गया था। विशेषज्ञों ने तब कई श्रेणियों के हिसाब से एंटीबायोटिक दवाओं की प्रति व्यक्ति निजी क्षेत्र की खपत की गणना करने के लिए डिफाइन की गई डेली खुराक (DDD) मेट्रिक्स का इस्तेमाल किया। आपको बता दें कि किसी भी दवा का सेवन करने के लिए एक औसत खुराक तय की जाती है, जिसे डीडीडी कहते हैं।

एज़िथ्रोमाइसिन की बिक्री सबसे ज्यादा बिक्री

शोध के परिणाम में सामने आया  है कि 2019 में 500 करोड़ डीडीडी की खपत हुई। यह हर दिन प्रति 1,000 लोगों पर 10.4 डीडीडी के समान है। साइंस्टिस्ट्स के अनुसार देश में सबसे ज्यादा एजिथ्रोमाइसिन 500 एमजी टैबलेट की खपत होती है। एक साल में इसकी खपत 7.6 फीसदी हो गई। वहीं, Cefixime 200 mg टैबलेट 6.5% के साथ दूसरे नंबर पर है।

  

बिना सोच विचर कर कंज्यूम कर रहे मेडिसिन्स

रिपोर्ट में सामने आया है कि इंडिया में लोग बिना सोच विचार के यानी कई बार तो बिना प्रिस्क्रिप्शन के ही एंटीबायोटिक्स लेना शुरू कर देते हैं और इससे शरीर को होने वाले नुकसान को नहीं देखते। फेमस शोधकर्ता डॉ शफी के अनुसार जो एंटीबायोटिक्स मेडिसिंस अनआइडेंटिफाइड बैक्टीरिया के अगेंस्ट यूज की जाती हैं, उन्हें भी सावधान रहते हुए दवाएं यूज करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि इस तरह की दवाओं का प्रयोग तब ही करना चाहिए जब पेशेंट की जान पर बना आई हो और उसकी बॉडी में अनआइडेंटिफाइड बैक्टीरियाज होने की प्रबल संभावना हो।   

जो इस्तेमाल की जा रही उनमें से कई को तो मंजूरी भी नहीं

अनुसंधान में केवल 45.5% मेडिसिंस ही केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के मानदंडों का पालन करती हैं। डॉक्टर शफी के अनुसार कंपनियों को केंद्रीय नियामक की अनुमति के बिना राज्यों से लाइसेंस मिलता है और इस तरह की प्रक्रिया देश में एंटीबायोटिक दवाओं की उपलब्धता और बिक्री को और बेपरवाह बना देता है।

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