इजराइल के इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट का दावा :पाकिस्तान के परमाणु साइंटिस्ट अब्दुल कदीर खान के इरादों का पता चल जाता, तो मोसाद उन्हें खत्म कर देती Read it later

पाकिस्तान के परमाणु साइंटिस्ट अब्दुल कदीर खान

इजरायल के एक खोजी पत्रकार ने सनसनीखेज दावा किया है। इजरायल के पत्रकार योसी मेलमैन ने कहा कि मोसाद पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक डॉ अब्दुल कादिर खान को मार डालता अगर उसे पहले पता चल जाता।

हारेज़ अखबार में एक आर्टिकल में, योसी मेलमैन ने लिखा है कि अब्दुल कादिर खान, जिन्होंने पाकिस्तान को परमाणु शक्ति बनाया और परमाणु बम बनाने से संबंधित गोपनीय जानकारी चुरा ली और इसे उन देशों को बेच दिया जो हमारे लिए खतरा हो सकते हैं। कादिर की मंशा के बारे में अगर इजरायली खुफिया एजेंसी को सही समय पर पता चल जाता तो मोसाद प्रमुख शबताई शावित उसे मारने के लिए तुरंत एक टीम भेज देते।

खुद मोसाद प्रमुख ने कही ये बात

खुद मोसाद प्रमुख ने कही ये बात

हाउ पाकिस्तान के ए क्यू खान, फादर ऑफ द मुस्लिम बम, एस्केप्ड मोसाद एसेसिनेशन शीर्षक वाले एक आर्टिकल में, मेलमैन ने लिखा है कि मोसाद खान की मध्य पूर्व की यात्राओं पर नज़र रखता था, लेकिन एक संदिग्ध परमाणु प्रसार नेटवर्क बनाने के उनके प्रयासों को ठीक से आइडेंटिफाइ नहीं कर पाया था। 

उन्होंने लिखा- जैसा कि शावित ने मुझे डेढ़ दशक पहले बताया था कि मोसाद और अमान (इजरायल की सैन्य खुफिया एजेंसी) को खान की मंशा ठीक तरह से नहीं समझा। शावित ने कहा कि अगर वह और उसके साथियों ने खान के इरादों का सही पता लगाया होता, तो वे पाकिस्तानी वैज्ञानिक को मारने के लिए मोसाद की एक टीम भेजने के बारे में हम जरूर सोच सकते  थे। 

डाॅ  अब्दुल कदीर खान का है भोपाल से नाता

कदीर का 1 अप्रैल 1936 को भोपाल के जहांगीराबाद में सामान्य परिवार में हुआ था। गिन्नोरी स्कूल में प्राइमरी शिक्षा ली। जहागिीरियां स्कूल से आठवीं तक पढ़े। इसके बाद 11वीं की पढ़ाई हमीदिया हायर सेकंडरी स्कूल से पूरी की थी। 

10 अक्टूबर को 85 साल  की उम्र में डॉ अब्दुल कादिर खान का निधन हो गया था

10 अक्टूबर को 85 साल  की उम्र में डॉ अब्दुल कादिर खान का निधन हो गया था

अब्दुल कादिर खान वही शख्स हैं जिन्हें इस्लामिक परमाणु बम का जनक कहा जाता है। उन पर कई देशों को परमाणु तकनीक बेचने का भी आरोप लगाया गया था। इनमें ईरान और लीबिया जैसे देश शामिल हैं। पाकिस्तान के महानतम परमाणु वैज्ञानिक डॉ. अब्दुल कादिर खान का रविवार (10 अक्टूबर) सुबह 85 साल की उम्र में सांस लेने में तकलीफ के बाद निधन हो गया।

कई देशों को परमाणु तकनीक बेचने के इल्जाम लगे थे  खान पर

1998 में, यूएस न्यूज वीक पत्रिका ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें डॉ खान पर इराक को परमाणु रहस्य बेचने का आरोप लगाया गया था। कुछ साल बाद, तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने एक खुफिया जांच की, जिसमें पता चला कि डॉ खान ने ईरान, उत्तर कोरिया, लीबिया और इराक को परमाणु तकनीक भी बेची थी। इजराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए खतरा मानता है। इजरायल ने परमाणु बम बनाने के ईरान के प्रयासों को विफल करने की कसम भी खा रखी थी। 

खान को 2002 में मुशर्रफ ने परमाणु कार्यक्रम से हटा दिया था

खान को 2002 में मुशर्रफ ने परमाणु कार्यक्रम से हटा दिया था

जब डॉ खान ने अपने ऊपर लगे आरोपों को कबूल किया तो पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने उन्हें 2002 में परमाणु कार्यक्रम से हटा दिया था। इस स्वीकारोक्ति ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हलचल मचा दी थी। यूएस टाइम मैगजीन ने उन्हें ‘मर्चेंट ऑफ मेनस’ यानी विनाश का व्यापारी नाम दिया है।

2004 में डॉ. कादिर खान बन गए थे नेशनल हीरो

उन्हें 2004 में नजरबंद कर दिया गया था। उनकी गिरफ्तारी और अमेरिकी सरकार के प्रति मुशर्रफ सरकार के झुकाव को देखकर, कई राजनीतिक दल और पाकिस्तानी नागरिक उनके समर्थन में सामने आए और उन्हें राष्ट्रीय नायक बना दिया गया। इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री युसूफ रजा गिलानी ने उनके ऊपर लगे सारे आरोप हटा दिए।

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