आतंकी बुरहान वानी के प्रिंसिपल पिता का मजहब तिरंगा: स्कूल में फहराया झंडा, ये नजीर है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और देश का सिर्फ तिरंगा

आतंकी बुरहान वानी के प्रिंसिपल पिता का मजहब तिरंगा

आजादी के जश्न के दौरान कश्मीर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने साबित कर दिया है कि आतंकी का कोई धर्म नहीं होता और, देशभक्त का सिर्फ एक ही धर्म होता है.. और वो है तिरंगा। 

कभी आतंकवाद के पोस्टर बॉय बन चुके बुरहान वानी के पिता मुजफ्फर अहमद वानी ने आज 75वें स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल में तिरंगा फहराया और सभी स्टाफ के साथ मिलकर राष्ट्रगान गाया। 

गौरतलब है कि 8 जुलाई 2016 को सुरक्षाबलों ने आतंकी संगठन हिज्बुल के कमांडर बुरहान वानी को मार गिराया था।

मुजफ्फर अहमद त्राल के एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल के पद पर हैं। रविवार को उन्होंने यहां फ्लैग होइस्टिंग की। इस दौरान शिक्षक भी मौजूद रहे। इसका वीडियो सामने आया है, जिसमें मुजफ्फर अहमद समेत पूरा स्कूल राष्ट्रगान की धुन पर तिरंगे को सलामी दे रहा है। 

#आजादी के जश्न के दौरान कश्मीर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने साबित कर दिया है कि आतंकवादी का कोई मजहब नहीं होता। और, #देशभक्त का एक ही मजहब होता है.. तिरंगा। #kashmir pic.twitter.com/tKk4OapvZT

— Thumbs Up Bharat (@thumbsupbharat) August 15, 2021

प्राचार्य पद से इस्तीफे की अफवाह फैली थी

पहले यह खबर आई थी कि मुजफ्फर अहमद ने प्राचार्य पद से इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि वह तिरंगा नहीं फहराना चाहते हैं। लेकिन, शनिवार को उन्होंने इसे अफवाह बताया। वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि मैंने इस्तीफा नहीं दिया है।

सभी स्कूलों में तिरंगा फहराने का आदेश था

75वें स्वतंत्रता दिवस पर पूरा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। इस मौके पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने सभी स्कूलों और सरकारी विभागों में तिरंगा फहराने का आदेश दिया। स्कूलों को घटना के वीडियो और तस्वीरें गूगल ड्राइव पर अपलोड करने के लिए भी कहा गया था।

आतंकी बुरहान वानी कौन था?

आतंकी बुरहान वानी कौन था?
तस्वीर 2016 की है, जब बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद कश्मीरी यूथ ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे।


  • 22 साल का बुरहान वानी 15 साल की उम्र में आतंकी बन गया था। बुरहान दक्षिण कश्मीर में काफी सक्रिय था। उसने यहां के कई पढ़े-लिखे युवाओं को धोखे से आतंकी बना दिया था।

  • कश्मीरी युवाओं को भर्ती करने के लिए वह फेसबुक-व्हाट्सएप पर वीडियो और फोटो पोस्ट करता था। इसमें वह हथियारों के साथ नजर आकर सुरक्षाबलों का मखौल उड़ाता दिखाई देता था। 

  • वानी भड़काऊ भाषण देने और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने में माहिर माना जाता था। बुरहान वानी की मौत के बाद कश्मीर में करीब 90 दिनों तक विरोध प्रदर्शन हुए थे।

वानी को सेना और इंटेलिजेंस ने प्लानिंग के तहत गांव बुला कर खात्मा किया था

8 जुलाई की शाम को आर्मी कैंप में सूचना आई थी कि बुरहान वानी कोकरनाग के पास बमदुरा गांव के एक घर में पहुंचा हुआ है. ये भी सूचना थी कि उसके पास ज्यादा हथियार नहीं हैं। 

जानकारी पुख्ता थी, क्योंकि खुफिया एजेंसी और सेना ने खुद वानी को उस गांव में लाने की योजना बनाई थी। स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) को उस गांव के पास पहले ही बुलाया जा चुका था। 

वहीं वानी को उसकी एक गर्लफ्रेंड के जरिए बुलाया गया था। वानी अपने खास साथी सरताज को साथ रखता था। सरताज का फोन खुफिया एजेंसियों की रडार पर था। उस दिन भी वानी अपने दोस्तों सरताज और परवेज के साथ ही था।

100 जवानों के साथ की थी डबल लेयर की घेराबंदी

जब सुरक्षाबलों ने सुनिश्चित किया कि वानी उसी घर में छिपा है तो सेना के 100 जवानों ने पुलिस एसओजी के 35-36 जवानों के साथ कोकरनाग इलाके में डबल लेयर घेराबंदी कर दी। 

सेना वानी को खत्म करने के इस सुनहरे मौके को गंवाना नहीं चाहती थी। बुरहान वानी जिस घर में छिपा था, उस घर में सीधे फायरिंग करने की बजाय पीछे से आग लगाई गई। आग लगते ही वानी और उसके साथी घर के सामने से बाहर की ओर भागे।

जब सेना ने एनकाउंटर किया तब बुरहान नशे में धुत था, भाग नहीं सका

उस समय वानी नशे में था। उससे भागा भी नहीं जा रहा था। परवेज और सरताज उसका हाथ पकड़े हुए थे। मौका देख जवानों ने उसे घेर लिया। इससे पहले कि वानी कुछ बोल पाता या कुछ कर पाता, उसे महज 4 फीट की दूरी से गोली मार दी गई। सैनिकों का पहला निशाना सिर्फ वानी था। 

बाकी दो आतंकियों को जिंदा पकड़ने की योजना थी, लेकिन परवेज और सरताज की तरफ से हरकत को देख जवानों को उन दोनों पर भी फायरिंग करनी पड़ी. तीनों की मौके पर मौत हो गई। तलाशी में वानी के पास केवल एक पिस्टल मिली। 

वह आमतौर पर बुलेटप्रूफ जैकेट और कॉम्बैट ड्रेस पहना करता था। उस वक्त भी जब वो अपने ठिकाने पर बैठकर सोशल मीडिया का वीडियो बना रहा हो।

बुरहान की मौत के बाद हुई हिंसा में 76 लोगों ने जान गंवाई

बुरहान के एनकाउंटर के बाद कश्मीर के 4 जिलों पुलवामा, कुलगाम, शोपियां और अनंतनाग में भारी हिंसा हुई थी. यहां 5 दिन के भीतर 2 पुलिसकर्मियों सहित 76 स्थानीय नागरिकों की मौत हुई। 

अधिकारियों ने बताया था कि इन जिलों में आतंकियों को स्थानीय जनता का समर्थन है, इसलिए तनाव बना हुआ है। पुलवामा के आसपास घने जंगल भी हैं, 

जिससे आतंकियों के लिए हमला करने के बाद छिपना आसान हो जाता है। बुरहान भी पुलवामा का ही रहने वाला था।

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