Panchang Update : 59 दिन का सावन, 2 चतुर्थी, 30 अगस्त को रक्षाबंधन जानिए श्रावण मास क्यों है खास Read it later

Panchang Update  : इस साल सावन (sawan month 2023) मंगलवार 4 जुलाई से सावन शुरू हो गए हैं। इस साल अधिक मास के कारण सावन का महीना दो महीने का है। यह 4 जुलाई से 31 अगस्त की सुबह तक रहेगाा। इसके बाद फिर भाद्रपद माह शुरू होगा। रक्षाबंधन का त्‍योहार 30 अगस्त को मनाया जाएगा। मान्‍यता है कि यह माह भगवान शिव को अतिप्रिय है और इस माह में भगवान शिव का अभिषेक करने की परंपरा है। इसके लिए आप शिवलिंग पर जल चढ़ाकर ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। आज से 31 अगस्त तक 16 दिन सर्वार्थसिद्धि, अमृत सिद्धि, द्विपुष्कर जैसे शुभ संयोग रहेंगे। इन योगों में पूजा-पाठ के साथ खरीदारी करना भी शुभ रहेगा।

काशी के ज्योतिषी डॉ. तुलसी मिश्र के अनुसार (Panchang Update) इस बार सावन में 8 सोमवार आ रहे हैं। जिसमें 25 जुलाई को प्रदोष का महासंयोग बनेगा। साथ ही इस माह पांच गुरुवार भी होंगे। यह अपने आप में एक बहुत ही शुभ संयोग है और एक शुभ संकेत भी। सावन का पहला सोमवार 10 जुलाई को और आखिरी 28 अगस्त को होगा।

 

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सावन के प्रत्येक सोमवार को शुभ संयोग (Panchang Update)

19 साल बाद आया सावन में अधिक मास

साल 2023 से पहले 2004 में भी सावन माह में अधिकमास रहा था। सावन माह में दो चतुर्थी, दो एकादशियां, हरियाली अमावस्या, नाग पंचमी, रक्षाबंधन मनाया जाना है। अधिक मास 18 जुलाई से 16 अगस्त तक रहेगा और इस पूरे महीने व्रत और पूजा की जाएगी।

सावन के दूसरे सोमवार को सोमवती अमावस्या है। सातवें सोमवार को नाग पंचमी और आखिरी सोमवार को प्रदोष व्रत होगा। इस साल रक्षाबंधन (30 अगस्त) पर भद्रा के कारण राखी बांधने के लिए दिन में कोई मुहूर्त नहीं रहेगा। बता दें कि रात 9 बजे के बाद रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

 

जानिए सावन में सोमवार कब- कब (Panchang Update)

  • सावन का पहला सोमवार (First Monday of Sawan): 10 जुलाई
  • सावन का दूसरा सोमवार (Second Monday of Sawan): 17 जुलाई
  • सावन का तीसरा सोमवार (Third Monday of Sawan): 24 जुलाई
  • सावन का चौथा सोमवार (Fourth Monday of Sawan): 31 जुलाई
  • सावन का पांचवा सोमवार (Fifth Monday of Sawan): 07 अगस्त
  • सावन का छठा सोमवार (Sixth Monday of Sawan):14 अगस्त
  • सावन का सातवां सोमवार (Seventh Monday of Sawan): 21 अगस्त
  • सावन का आठवां सोमवार (Eighth Monday of Sawan): 28 अगस्त

 

श्रवण नक्षत्र के कारण महीने का नाम श्रवण 

सावन महीने (Panchang Update) को यह नाम श्रावण नक्षत्र के कारण पड़ा है। श्रावण हिंदू कैलेंडर में प्रयुक्त 27 नक्षत्रों में से 22वां नक्षत्र है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार श्रवण नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति है। श्रावण मास को हिंदू कैलेंडर का पवित्र महीना माना जाता है।

सोमवार के दिन शिव की पूजा करने वाली अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। वहीं पुरुषों को भी उनकी पसंद की लड़की मिल जाती है। इसलिए कहा जाता है कि जिनके विवाह में बाधा आ रही है, उन्हें सावन के सोमवार का व्रत अवश्य करना चाहिए।

 

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शिवजी ही लेते हैं दुनिया चलाने की जिम्मेदारी

सावन को हिंदू कैलेंडर (Panchang Update) में पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। क्योंकि शिवपुराण में कहा गया है कि सावन में भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सभी प्रकार के दोष भी दूर होते हैं।

ऐसी भी मान्यता है कि सावन के महीने में सृष्टि के रचयिता भगवान विष्णु चार महीने तक योग निद्रा में चले जाते हैं। (Panchang Update) ऐसे में शिव दुनिया को चलाने की जिम्मेदारी लेते हैं। इसलिए सावन के महीने के देवता को भगवान शिव कहा जाता है। भक्त पूरे महीने शिव की पूजा करते हैं।

 

Panchang Update | sawan month 2023

 

सावन में ही माता पार्वती ने महादेव के लिए की थी कठोर तपस्या

पौराणिक मान्यता के अनुसार सावन का महीना (Panchang Update) महादेव का महीना माना जाता है। इस संबंध में एक पौराणिक कथा बताई गई है कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर योग शक्ति के साथ अपना शरीर छोड़ा था। इससे पहले उन्होंने महादेव को हर जन्म में पति रूप में रखने का प्रण लिया था।

अगले जन्म में, देवी सती ने हिमाचल और रानी मैना के घर बेटी के रूप में पार्वती के नाम से  जन्म लिया। पार्वती ने सावन के महीने में कठोर व्रत रखने के बाद भगवान शिव से विवाह किया। तभी से यह महीना महादेव के लिए खास बन गया है।

 

सावन माह में राशि अनुसार जातकों को क्या करना चाहिएॽ

सोलह सोमवार का व्रत इसी महीने से शुरू हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस माह में राशि के अनुसार शिव की पूजा करने का विधान बताया गया है, कुंडली के कई दोषों की शांति के लिए और शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। (Panchang Update) भगवान शिव को देवताओं का देवता महादेव कहा जाता है। राशि के अनुसार इनकी पूजा करके आप अपनी कुंडली में मौजूद ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं।

 

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मेष राशि के लोगों को शिवजी को लाल चंदन और लाल रंग के फूल चढ़ाना चाहिए। साथ ही नागेश्वराय नम:का जाप करें। उसके बाद बेलपत्र पर सफेद चंदन से श्रीराम लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं।

वृषभ राशि के लोगों को चमेली के फूल चढ़ाकर रुद्राष्टक का पाठ करने से लाभ ​मिलेगा। इसके बाद दूध से अभिषेक कर जल चढ़ाएं और सफ़ेद चंदन से तिलक करें।

मिथुन राशि के जातक शिवजी को धतूरा,भांग अर्पित करने के साथ में पंचाक्षरी मंत्र का जप करने से लाभ प्राप्त होगा। इन राशि के जातकों को शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करना चाहिए। इस उपाय को करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहेगी और आर्थिक समस्याएं दूर होंगी।

कर्क राशि वालों को शिवलिंग पर भांग मिश्रित दूध से अभिषेक करना चाहिए और रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करना चाहिए। इस राशि के महादेव भक्तों को शिवलिंग पर दूध,दही, गंगाजल व मिश्री से भी अभिषेक करना फलित रहेगा। इससे घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहेगी।

सिंह राशि के जातकों को पूरे सावन में शिवजी को कनेर के लाल रंग के फूल अर्पित करने चाहिए। वहीं देवालय या शिव मंदिर में शिव चालीसा का पाठ करने से विशेष लाभ प्राप्त होगा। इस राशि के जातक शिव की कृपा पाने के लिए शिवलिंग पर शुद्ध देसी घी से अभिषेक करें। इससे आर्थिक समस्याएं शीघ्र ही दूर होंगी।

कन्या राशि के जातकों को शिवलिंग पर बेलपत्र,धतूरा,भांग का श्रृंगार चढ़ाने के साथ पंचाक्षरी मंत्र का जप करें। वहीं दूध,घी और शहद से महादेव का अभिषेक करें।

तुला राशि के जातकों को मिश्री के दूध से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए शिव के सहस्रनाम का जप करना चाहिए। वहीं महादेव का अभिषेक दही और गन्ने के रस से भी अभिषेक करें।

वृश्चिक राशि वालों को महादेव को गुलाब के पुष्प व बिल्वपत्र की जड़ चढ़ाएं और नित्य रुद्राष्टक का पाठ करें। साथ ही शिवलिंग पर गंगाजल और दूध में चीनी मिलाकर अभिषेक भी करें। इसके बाद लाल चंदन से तिलक करें।

धनु राशि वाले जातक प्रात: स्नान के बाद शिवजी के चरणों में पीले फूल अर्पित करें और शिवाष्टक का पाठ करें। कच्चा दूध,केसर,गुड़,हल्दी मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद पीले फूल अर्पित करें।

मकर राशि वालों को महादेव को धतूरा,फूल,भांग एवं अष्टगंध चढ़ाकर पार्वती नाथाय नम:का जाप करना चाहिए। सावन मास में इस रशि के जातकों को  महादेव का घी,शहद,दही और बादाम के तेल से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद महादवे को नीले रंग के फूल अर्पित करना ​चाहिए।

कुंभ राशि के जातकों को इस माह शिवलिंग का गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए व शिवाष्टक का पाठ करना चाहिए। इस राशि के लोगों को सावन मास में घी, शहद, दही और से शिवलिंग का पूजन करना चाहिए। वहीं सरसों के तेल और रोली से शिवलिंग पर तिलक करना चाहिए।

मीन राशि के जातकों को महादेव को पंचामृत,दही,दूध व पीले फूल चढ़ाने चाहिए। वहीं चंदन की माला से 108 बार पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना चाहिए। साथ ही श्रावण मास में कच्चे दूध, केसर एवं गंगाजल से भगवान महादेव का अभिषेक कर हल्दी एवं केसर से तिलक करें।

 

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का महत्व

(Panchang Update) शिव पंचाक्षर स्तोत्र भगवान शिव की स्तुति या आराधना के लिए लिखा गया है। इसमें महादेव के स्वरूप एवं गुणों के बारे में बताया गया है, साथ ही भगवान शिव की वंदना की गई है। जब भी शिव पूजा करें तो शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ किया जा सकता हैं।

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:।।

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।

मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:।।

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।

श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:।।

वषिष्ठ कुभोदव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय।

चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै व काराय नम: शिवाय:।।

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय।

दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै य काराय नम: शिवाय:।।

पंचाक्षरमिदं पुण्यं य: पठेत शिव सन्निधौ।

शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते।।

 नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे ‘न’ काराय नमः शिवायः।।

 

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