पंचांग अपडेट : 29 दिन का सावन,2 दिन पूर्णिमा, 11 अगस्त को रक्षाबंधन और 12 को स्नान-दान का पर्व, जानिए श्रावण मास क्यों है खास

sawan month 2022

इस साल सावन (sawan month 2022) का महीना 29 दिनों का रहेगा। सावन का महीना 14 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगा। इस बार सावन की पूर्णिमा दो दिन रहेगी। इसलिए 11 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा और 12 तारीख को स्नान और दान का पर्व होगा। श्रावण मास भगवान शिव का प्रिय माह है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने से सभी प्रकार के दोष दूर हो जाते हैं।

काशी के ज्योतिषी डॉ. तुलसी मिश्र के अनुसार इस बार सावन में चार सोमवार आ रहे हैं। जिसमें 25 जुलाई को प्रदोष का महासंयोग बनेगा। साथ ही इस माह पांच गुरुवार भी होंगे। यह अपने आप में एक बहुत ही शुभ संयोग है और एक शुभ संकेत भी। सावन का पहला सोमवार 18 जुलाई को और आखिरी 8 अगस्त को होगा।

sawan month
Photo | Getty images

सावन के प्रत्येक सोमवार को शुभ संयोग

पहली – 18 जुलाई – शोभन और रवियोग

दूसरा – 25 जुलाई – सर्वार्थसिद्धि योग और सोम प्रदोष

तीसरा – 1 अगस्त – प्रजापति और रवि योग

चौथा – 8 अगस्त – पद्म और रवि योग

श्रवण नक्षत्र के कारण महीने का नाम श्रवण 

सावन महीने को यह नाम श्रावण नक्षत्र के कारण पड़ा है। श्रावण हिंदू कैलेंडर में प्रयुक्त 27 नक्षत्रों में से 22वां नक्षत्र है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार श्रवण नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति है। श्रावण मास को हिंदू कैलेंडर का पवित्र महीना माना जाता है।

सोमवार के दिन शिव की पूजा करने वाली अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। वहीं पुरुषों को भी उनकी पसंद की लड़की मिल जाती है। इसलिए कहा जाता है कि जिनके विवाह में बाधा आ रही है, उन्हें सावन के सोमवार का व्रत अवश्य करना चाहिए।

sawan month
Photo | Getty images

शिवजी ही लेते हैं दुनिया चलाने की जिम्मेदारी

सावन को हिंदू कैलेंडर में पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। क्योंकि शिवपुराण में कहा गया है कि सावन में भगवान शिव-पार्वती की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सभी प्रकार के दोष भी दूर होते हैं। 

ऐसी भी मान्यता है कि सावन के महीने में सृष्टि के रचयिता भगवान विष्णु चार महीने तक योग निद्रा में चले जाते हैं। ऐसे में शिव दुनिया को चलाने की जिम्मेदारी लेते हैं। इसलिए सावन के महीने के देवता को भगवान शिव कहा जाता है। भक्त पूरे महीने शिव की पूजा करते हैं।

सावन में ही माता पार्वती ने महादेव के लिए की थी कठोर तपस्या

पौराणिक मान्यता के अनुसार सावन का महीना महादेव का महीना माना जाता है। इस संबंध में एक पौराणिक कथा बताई गई है कि जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर योग शक्ति के साथ अपना शरीर छोड़ा था। इससे पहले उन्होंने महादेव को हर जन्म में पति रूप में रखने का प्रण लिया था। 

अगले जन्म में, देवी सती ने हिमाचल और रानी मैना के घर बेटी के रूप में पार्वती के नाम से  जन्म लिया। पार्वती ने सावन के महीने में कठोर व्रत रखने के बाद भगवान शिव से विवाह किया। तभी से यह महीना महादेव के लिए खास बन गया है।

सावन माह में राशि अनुसार जातकों को क्या करना चाहिएॽ

सोलह सोमवार का व्रत इसी महीने से शुरू हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस माह में राशि के अनुसार शिव की पूजा करने का विधान बताया गया है, कुंडली के कई दोषों की शांति के लिए और शिव की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान शिव को देवताओं का देवता महादेव कहा जाता है। राशि के अनुसार इनकी पूजा करके आप अपनी कुंडली में मौजूद ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकते हैं।


sawan month
Photo | Getty images

मेष राशि के लोगों को शिवजी को लाल चंदन और लाल रंग के फूल चढ़ाना चाहिए। साथ ही नागेश्वराय नम:का जाप करें। उसके बाद बेलपत्र पर सफेद चंदन से श्रीराम लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। 

वृषभ राशि के लोगों को चमेली के फूल चढ़ाकर रुद्राष्टक का पाठ करने से लाभ ​मिलेगा। इसके बाद दूध से अभिषेक कर जल चढ़ाएं और सफ़ेद चंदन से तिलक करें।

मिथुन राशि के जातक शिवजी को धतूरा,भांग अर्पित करने के साथ में पंचाक्षरी मंत्र का जप करने से लाभ प्राप्त होगा। इन राशि के जातकों को शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करना चाहिए। इस उपाय को करने से शिव की कृपा सदैव बनी रहेगी और आर्थिक समस्याएं दूर होंगी।

कर्क राशि वालों को शिवलिंग पर भांग मिश्रित दूध से अभिषेक करना चाहिए और रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करना चाहिए। इस राशि के महादेव भक्तों को शिवलिंग पर दूध,दही, गंगाजल व मिश्री से भी अभिषेक करना फलित रहेगा। इससे घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता बनी रहेगी।

सिंह राशि के जातकों को पूरे सावन में शिवजी को कनेर के लाल रंग के फूल अर्पित करने चाहिए। वहीं देवालय या शिव मंदिर में शिव चालीसा का पाठ करने से विशेष लाभ प्राप्त होगा। इस राशि के जातक शिव की कृपा पाने के लिए शिवलिंग पर शुद्ध देसी घी से अभिषेक करें। इससे आर्थिक समस्याएं शीघ्र ही दूर होंगी।

कन्या राशि के जातकों को शिवलिंग पर बेलपत्र,धतूरा,भांग का श्रृंगार चढ़ाने के साथ पंचाक्षरी मंत्र का जप करें। वहीं दूध,घी और शहद से महादेव का अभिषेक करें।

तुला राशि के जातकों को मिश्री के दूध से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए शिव के सहस्रनाम का जप करना चाहिए। वहीं महादेव का अभिषेक दही और गन्ने के रस से भी अभिषेक करें।

वृश्चिक राशि वालों को महादेव को गुलाब के पुष्प व बिल्वपत्र की जड़ चढ़ाएं और नित्य रुद्राष्टक का पाठ करें। साथ ही शिवलिंग पर गंगाजल और दूध में चीनी मिलाकर अभिषेक भी करें। इसके बाद लाल चंदन से तिलक करें।

धनु राशि वाले जातक प्रात: स्नान के बाद शिवजी के चरणों में पीले फूल अर्पित करें और शिवाष्टक का पाठ करें। कच्चा दूध,केसर,गुड़,हल्दी मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद पीले फूल अर्पित करें।

मकर राशि वालों को महादेव को धतूरा,फूल,भांग एवं अष्टगंध चढ़ाकर पार्वती नाथाय नम:का जाप करना चाहिए। सावन मास में इस रशि के जातक महादेव का घी,शहद,दही और बादाम के तेल से अभिषेक करना चाहिए। इसके बाद महादवे को नीले रंग के फूल अर्पित करना ​चाहिए।

कुंभ राशि के जातकों को इस माह शिवलिंग का गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए व शिवाष्टक का पाठ करना चाहिए। इस राशि के लोगों को सावन मास में घी, शहद, दही और से शिवलिंग का पूजन करना चाहिए। वहीं सरसों के तेल और रोली से शिवलिंग पर तिलक करना चाहिए।

मीन राशि के जातकों को महादेव को पंचामृत,दही,दूध व पीले फूल चढ़ाने चाहिए। वहीं चंदन की माला से 108 बार पंचाक्षरी मंत्र का जाप करना चाहिए। साथ ही श्रावण मास में कच्चे दूध, केसर एवं गंगाजल से भगवान महादेव का अभिषेक कर हल्दी एवं केसर से तिलक करें। 

शिव पंचाक्षर स्तोत्र का महत्व

शिव पंचाक्षर स्तोत्र भगवान शिव की स्तुति या आराधना के लिए लिखा गया है। इसमें महादेव के स्वरूप एवं गुणों के बारे में बताया गया है, साथ ही भगवान शिव की वंदना की गई है। जब भी शिव पूजा करें तो शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ किया जा सकता हैं। 

नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:।।

मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय।

मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:।।

शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।

श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:।।

वषिष्ठ कुभोदव गौतमाय मुनींद्र देवार्चित शेखराय।

चंद्रार्क वैश्वानर लोचनाय तस्मै व काराय नम: शिवाय:।।

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकस्ताय सनातनाय।

दिव्याय देवाय दिगंबराय तस्मै य काराय नम: शिवाय:।।

पंचाक्षरमिदं पुण्यं य: पठेत शिव सन्निधौ।

शिवलोकं वाप्नोति शिवेन सह मोदते।।

 नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।

नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे ‘न’ काराय नमः शिवायः।।

spiritual | puja path | Sawan 2022 | What is shiv panchakshar mantra |  shiv panchakshar stotra | shiv panchakshar stotra in Hindi | Lord Shiva | Lifestyle and Relationship | Spirituality | Sawan mas 2022 | Sawan Mahina | Sawan Mahina special |

ये भी पढ़ें –

ग्रह-नक्षत्र का शुभ-अशुभ प्रभाव: इस माह शनि के राशि परिवर्तन और अंगारक योग से राशियों पर होगा असर, जानिए कौन जातक संभलें और किसका होगा बेहतर समय

सूर्य बदल रहे राशि :15 जुलाई तक मिथुन राशि में रहेंगे सूर्य देवता, इन राशियों के लिए रहेगा शानदार समय

Hindu-Marriage 2022: आखिर असुर, राक्षस, पैशाच, ब्रह्म, देव और गंधर्व विवाह क्या होते हैं? किस तरह से विवाह करने का जीवन पर क्या असर होता हैॽ



















Was This Article Helpful?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *