शरद पूर्णिमा पर क्यों रखते हैं खीर? जानिए रहस्य,पूजा विधि, तिथि और परंपराएं Read it later

हिंदू पंचांग के अनुसार, Sharad Purnima 2025 इस बार विशेष संयोग लेकर आई है। आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 6 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से होगा और इसका समापन 7 अक्टूबर की सुबह 9:10 बजे होगा। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि जब रात्रि व्यापिनी होती है, तभी पर्व का आयोजन होता है। इस वर्ष 6 अक्टूबर की रात को पूर्णिमा रहेगी, इसलिए इसी दिन शरद पूर्णिमा का पर्व मान्य और श्रेष्ठ होगा।

7 अक्टूबर को स्नान और दान का महत्व

चूंकि पूर्णिमा तिथि 7 अक्टूबर की सुबह भी रहेगी, इसलिए इस दिन स्नान, दान और तर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाएगा। धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि इस दिन गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और पुण्य में वृद्धि होती है। donation, charity और holy bath इस दिन का मुख्य अंग हैं।

क्यों खास है Sharad Purnima 2025 की रात?

धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त होता है और उसकी किरणें पृथ्वी पर अमृत वर्षा करती हैं। इस रात की चांदनी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। इसलिए इस रात को आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कहा गया है। full moon, Ayurveda और healing energy शब्द इस पर्व को और भी खास बनाते हैं।

Sharad Purnima 2025
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मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का विशेष पूजन

इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। कथा है कि मां लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है (को-जाग्रति)। जो भक्त रातभर जागकर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु का ध्यान-पूजन करते हैं, उनके घर में समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है। पूजन सामग्री में सफेद वस्त्र, कमल का फूल, खीर, फल और दीपक का विशेष महत्व है।

चांदनी में खीर रखने की परंपरा

शरद पूर्णिमा की सबसे खास परंपरा है कि इस रात गाय के दूध से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे छलनी से ढककर रखा जाता है। माना जाता है कि चंद्रमा की चांदनी से खीर में अमृत के गुण समाहित हो जाते हैं। अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी मानी जाती है। Sharad Purnima kheer, Ayurvedic healing, और full moon diet इसके प्रमुख कीवर्ड्स हैं।

चंद्र देव को अर्घ्य और मंत्र जप का महत्व

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रोदय होने पर भक्त दूध, जल, चावल और सफेद फूल मिलाकर अर्घ्य अर्पित करते हैं। साथ ही “ॐ सोमाय नमः” और “ॐ श्रीं श्रीं चंद्रमसे नमः” मंत्र का जप करते हैं। यह अनुष्ठान mental peace, spiritual healing और positivity का संचार करता है।

दीपदान और दान-पुण्य का विशेष महत्व

इस दिन मंदिरों और पवित्र नदियों में दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दीपदान से न केवल मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, बल्कि पितरों का भी आशीर्वाद मिलता है। इस अवसर पर सफेद वस्तुओं जैसे दूध, दही, चावल, चीनी और वस्त्र का दान करने से चंद्र देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-शांति मिलती है।

शरद पूर्णिमा के स्वास्थ्य लाभ

आयुर्वेद के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें शरीर को ठंडक और मानसिक शांति प्रदान करती हैं। माना जाता है कि इस दिन की चांदनी में रखा भोजन digestion, immunity और mental health के लिए लाभकारी होता है। यही कारण है कि इस पर्व को धार्मिक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य दृष्टि से भी विशेष स्थान दिया गया है।

शरद पूर्णिमा पर ध्यान और व्रत

कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और पूरी रात meditation, bhajans और jaap करते हैं। इससे न केवल मानसिक संतुलन मिलता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी होती है। व्रतधारी खीर का सेवन करके व्रत का समापन करते हैं।

शरद पूर्णिमा पर किन चीजों से करें परहेज

तामसिक भोजन और शराब का सेवन न करें
शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। ऐसे में इस दिन मांसाहार और शराब जैसे तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से देवी लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और परिवार पर आर्थिक संकट आ सकता है। इसलिए भक्तों को इस दिन सात्विक भोजन ही करना चाहिए।

काले कपड़े पहनने से बचें
शरद पूर्णिमा के दिन सफेद रंग को विशेष महत्व दिया गया है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है। वहीं सफेद रंग पहनने से चंद्रमा की सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

घर में कलह और विवाद न करें
इस दिन घर में शांति बनाए रखना बेहद जरूरी है। झगड़ा, क्रोध और विवाद करने से पूजा का फल कम हो जाता है। शरद पूर्णिमा की रात को घर में सुख-शांति और समृद्धि लाने के लिए परिवार के सभी सदस्य सामूहिक रूप से पूजा करें और मां लक्ष्मी का ध्यान करें।

इस तरह शरद पूर्णिमा पर यदि भक्त तामसिक भोजन, शराब, काले कपड़े और झगड़ों से बचें तो उन्हें देवी लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद मिलता है और जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होती है।

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