Lightning Fall: यूपी, एमपी और राजस्थान में इन दिनों मॉनसून के चलते बिजली गिरने से 75 लोगों की मौत हो गई है। अब तक सबसे ज्यादा मौतें उत्तर प्रदेश में हुई हैं। ऐसे मामलों पर 2019 की रिपोर्ट कहती है, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं।
आकाशीय बिजली (Lightning Fall) आखिर क्यों गिरती है, (asmani bijli kyu girti hai) मौत का खतरा किस समय ज्यादा होता है और इससे बचने के लिए सबसे सुरक्षित जगह कौन सी होती है… जानिए सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं।
बिजली क्यों गिरती हैॽ
आसान भाषा में समझें तो आसमान में जब बादल होते हैं तो आपस में टकराते हैं। (Why does lightning fall in the rain) जब बादलों में घर्षण होता है, तो एक विद्युत आवेश उत्पन्न होता है और एक विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है। यहां बिजली (Lightning Fall) पैदा होने के बाद कंडक्टर की तलाश करते समय वह जमीन पर गिर जाती है और इंसान के लिए खतरा बढ़ जाता है।
गौरतलब है कि वर्ष 1872 में वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रेंकलिन ने पहली बार बादलों के बीच बिजली चमकने की सही वजह का कारण बताया था। उन्होंने बताया था कि बादलों में पानी के छोट-छोटे कण यानी पार्टिकल्स होते हैं, जो वायु की रगड़ के कारण से आवेशित हो जाते हैं। कुछ बादलों पर पॉजिटिव चार्ज हो जाता है, तो कुछ पर निगेटिव चार्ज होता है।
आपको बता दें कि जब आसमान में दोनों तरह के आवेशित बादल आपस में टकराते हैं तो लाखों वोल्ट की बिजली पैदा होती है। कई बार इस तरह से पैदा होने वाली बिजली इतनी ज्यादा होती है कि धरती तक पहुंच जाती है। इस घटना को बिजली गिरना कहते हैं।
अब सवाल यह है कि बादल क्यों गरजते हैं। तो इसका जवाब है कि जब इस तरह आसमान में बिजली उत्पन्न होती है तो बादलों के बीच की जगह में बिजली का करंट प्रवाहित होने लगता है। इससे भारी मात्रा में बिजली उत्पन्न होती है। जिसके कारण आसमान में बादलों के बीच चमक हमें दिखाई देती है। वहीं बिजली के प्रवाह के कारण काफी गर्मी भी उत्पन्न होती है, जिसके कारण यह हवा फैलती है और इसके कारण लाखों कण एक दूसरे से टकराते हैं। इससे बादलों के बीच गड़गड़ाहट उत्पन्न होती है, जिसकी आवाज धरती पर सुनाई देती है।
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| सांकेतिक फोटो। |
बिजली गिरने (Lightning Fall) पर किस समय कितना खतरा होता है?
- यूएस नेशनल वेदर सर्विस (NWS) के मुताबिक, बिजली कई तरह से इंसानों को नुकसान पहुंचाती है। (Lightning Fall) पहला ये कि बिजली व्यक्ति सीधे इंसान पर आकर गिरती है।
- हालांकि, ऐसे मामले दुर्लभ होते हैं, लेकिन खतरनाक होते हैं। ऐसा तब होता है जब कोई व्यक्ति खुले मैदान में होता है। मौत ज्यादातर ऐसे मामलों में ही होती है।
- दूसरे मामलों में, बिजली के कारण होने वाली गर्मी त्वचा को जला देती है। यह ऐसे ही है जैसे करंट लगने पर पूरे शरीर को झटका लगता है।
- बारिश के दौरान जो लोग किसी पेड़ या घर की आड़ लेकर रुकते हैं वे इसी तरह की आकाशीय बिजली के कहर से प्रभावित होते हैं। ऐसे ही मामले सबसे ज्यादा देखने में आते हैं।
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| सांकेतिक फोटो। |
- देश की फर्स्ट एनुअल लाइटनिंग रिपोर्ट 2019-20 के अनुसार सबसे ज्यादा बिजली गिरने की घटनाएं तब देखी गईं जब कोई व्यक्ति बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़ा था।
- भारत में 71 फीसदी मामले ऐसे ही सामन आए हैं। 25 फीसदी केस में मौत सीधी बिजली गिरने से हुई। 4% मामलों में इंसान बिजली से सीधे प्रभावित नहीं हुए।
- एनडब्ल्यूएस के अनुसार, जहां करंट फैला हो उस जगह पर बिजली गिरने (Lightning Fall) से मौत और चोट लगने का खतरा अधिक होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जमीन में करंट एक बड़े क्षेत्र में फैला होता है। इसका असर जमीन के सहारे दूर-दूर तक दिखाई दे सकता है।
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| सांकेतिक फोटो। |
जुलाई 2019 में बिजली गिरने से हुई सबसे ज्यादा मौतें
रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में 2357 और 2019 में बिजली गिरने (Lightning Fall) से 2876 मौतें हुई थीं। इससे सबसे ज्यादा मौतें बिहार (400), मध्य प्रदेश (400), झारखंड (334) और उत्तर प्रदेश (321) में हुईं। सबसे ज्यादा मौतों के मामले 25 से 31 जुलाई 2019 के बीच सामने आए। इस दौरान देश में लगभग 4 लाख बार आकाशीय बिजली गिरी।
बिजली तो दुनियाभर में गिरती है‚ फिर भारत में ही क्यों होती हैं बिजली गिरने से सबसे ज्यादा मौतेंॽ
- इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि अमेरिका और यूके जैसे देशों में अलर्ट सिस्टम सबसे फास्ट है, ऐसे में वहां समय से पहले ही लोगों को मौसम के बारे में सूचित कर दिया जाता है। भारत में अब यह तकनीक धीरे धीरे एडवांस हो रही है।
- वहीं जो जून से सितंबर माह में मानसूनी हवाएं पृथ्वी पर चलती हैं, ये बड़ी मात्रा में भारत तक पहुंचती हैं, इसका कारण भारत की भौगोलिक स्थिति है। क्योंकि अरब महासागर में भारत का आधा हिस्सा किसी प्रायद्वीप की तरह ही है। ऐसे में ये मानसूनी हवाएं भारत के बड़े हिस्से पर असर डालती हैं।
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| सांकेतिक फोटो। |
बिजली से आप खुद को इस तरह बचा सकते हैं
- NWS के अनुसार बिजली गिरने से बचने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है। (Lightning Fall) फिर भी इस दौरान घर के अंदर ही रहना सबसे सुरक्षित रहता है। बिजली की आवाज सुनते ही घर के अंदर चले जाएं।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार आकाश में बिजली (Lightning Fall) गिरने पर धातु, धातु के पाइप, बिजली के सिस्टम, टीवी या केबल के तार और पानी को न छुएं। ये जोखिम बढ़ाते हैं क्योंकि ये सभी कंडक्टर की तरह काम करते हैं। यानि ये बिजली के असर को और बढ़ाते हैं।
- कभी भी जमीन पर न लेटें क्योंकि करंट सतह पर तेजी से फैलता है। ऐसा होने पर बिजली गिरने का खतरा और भी बढ़ जाता है। ऐसे में आप जितना जमीन से अपनी रक्षा करेंगे, उतना ही बेहतर होगा। यदि आप खुले स्थान पर हैं तो जमीन पर लेटने के बजाय सिर्फ घुटने मोड़कर बैठ जाएं और कानों को हाथ से ढकें।
- अपने हाथों को अपने कानों पर रखें ताकि आप बादलों की आवाज से परेशान न हो। पैरों की एड़ियों को एक साथ रखें। ऐसा करने से करंट लगने का खतरा कम हो जाता है।
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| सांकेतिक फोटो। |
- यदि बादल गरजें और आपके रोंगटे खड़े हो रहे हैं तो यही इस बात का संकेत है कि बिजली गिरने (Lightning Fall) की संभावना ज्यादा है। ऐसे में नीचे दुबक कर पैरों के बल बैठ जाएँ, अपने दोनों हाथ घुटने पर रख लें और सिर को दोनों घुटनों के बीच रख ले. इस पोजिशन के कारण आपका ज़मीन से कम से कम संपर्क होगा.
- बरसात में छाते या मोबाइल का प्रयोग न करें इससे धातु के ज़रिए बिजली आपकी बॉडी में प्रवेश कर सकती है. ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में भी पब्लिश हो चुका है कि किस तरह एक 15 साल की लड़की पर बिजली गिरी (Lightning Fall)। लड़की उस दौरान मोबाइल इस्तेमाल कर रही थीं। बिजली गिरने से उसे हार्ट अटैक आ गया।
- ये मिथ है कि थंडर स्ट्रइक एक ही जगह पर दो बार नहीं होता।
बिजली किसी पर गिर जाए तो क्या करेंॽ
- यदि किसी पर बिजली गिरी है तो फ़ौरन उनकी नब्ज़ चैक करें। यदि व्यक्ति बदहवास है और आप स्वयं फर्स्ट एड देना जानते हैं तो जरूर दें। बिजली गिरने से अकसर दो जगहों पर जलने की संभावना रहती है- पहला वो जगह जहाँ से बिजली का झटका बॉडी प्रवेश करे और दूसरी जगह वो जहां से जहां से बिजली बाहर निकली यानि जैसे पैरों के तलवे।
- ये भी हो सकता है कि बिजली गिरने से इंसान की हड्डियाँ टूट जाएं या उसके कान का पर्दा फट जाए और दृष्टि भी चली जाए। ऐसा लगे तो तुरंत इसकी जांच करें।
- बिजली गिरने के बाद तुरंत बाहर न निकलें। (Lightning Fall) क्योंकि देखने में आया है कि ज्यादात मौतें तुफ़ान गुज़रने के 30 मिनट बाद तक बिजली गिरने से होती हैं।
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4 तरह के अलर्ट से समझ सकते हैं प्राकृतिक आपदा के खतरों को
मौसम विभाग (IMD) देश में केवल बारिश, बिजली गिरने और आंधी की भविष्यवाणी करता है। (Lightning Fall) तूफान कितना तेज होगा, इसके लिए अलग-अलग रंग जोड़कर अलर्ट जारी किया जाता है। जैसे- ग्रीन, येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट।
ग्रीन अलर्ट – इसका मतलब है कि कोई खतरा नहीं है।
येलो अलर्ट– इसका अर्थ है कि आपको सावधान रहने की जरूरत है, खतरा हो सकता है।
ऑरेंज अलर्ट – ये अलर्ट खतरे का संकेत देता है। इसलिए खतरे से बचने के लिए तैयार रहें।
रेड अलर्ट – इसका मतलब है कि मौसम बेहद खराब होने वाला है और इसे भारी से भारी नुकसान होगा।
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