New Labour Codes India: 29 पुराने कानून खत्म, अब केवल 4 नियम; मजदूरों के लिए क्या बदला? Read it later

New Labour Codes India देश के करोड़ों मजदूरों और कर्मचारियों के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत हैं। केंद्र सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को सरल बनाकर चार नए लेबर कोड लागू किए हैं, जिनका उद्देश्य समय पर वेतन, सामाजिक सुरक्षा, महिलाओं को समान अवसर और आधुनिक कार्य प्रणाली को मजबूती देना है।

Table of Contents

नए लेबर कोड से कामगारों की कामकाज दुनिया में बड़े बदलाव की शुरुआत

केंद्र सरकार ने देश के सभी मजदूरों और कर्मचारियों के हित में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए शुक्रवार से चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं। इन कोड्स का उद्देश्य श्रमिकों की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक मजबूती को सुनिश्चित करना है। पहले जहाँ 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को समझना और लागू करना जटिल था, वहीं अब सरकार ने उनकी जरूरी बातों को निकालकर उन्हें चार साफ-सुथरे और आधुनिक नियमों में बदल दिया है।

नए कोड्स का सबसे बड़ा लक्ष्य कर्मचारियों को समय पर वेतन, ओवरटाइम का उचित भुगतान, न्यूनतम मजदूरी का पालन, महिलाओं को बराबर मौका व समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा और नियमित हेल्थ चेकअप की सुविधा प्रदान करना है। इनमें एक उल्लेखनीय बदलाव यह है कि अब कर्मचारी को पाँच वर्षों की बजाय केवल एक साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा, जो पहले संभव नहीं था।

पुराने श्रम कानून क्यों हुए बेअसर? सरकार ने बताई बड़ी वजह

सरकार ने स्पष्ट किया कि पुराने श्रम कानून 1930 से 1950 के बीच बनाए गए थे—उस समय न तो इंडस्ट्री का स्वरूप वैसा था जैसा आज है, न तकनीक इस स्तर पर विकसित थी, न कामकाज की शैली इतनी विविध। समय के साथ श्रम क्षेत्र में बड़े बदलाव आए, पर कानून वैसा ही बना रहा।

नई इंडस्ट्री, स्टार्टअप्स, डिजिटल वर्क मॉडल, महिला कार्यबल में वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कामकाज की जरूरत को देखते हुए सरकार ने पुराने 29 कानूनों को अधिक प्रभावी, यूनिफाइड और प्रैक्टिकल बनाने के लिए उन्हें चार लेबर कोड में समाहित कर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा—‘ये सुधार मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करेंगे’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन लेबर कोड्स का स्वागत करते हुए कहा कि नई श्रम संहिताएँ भारत के कामगारों, खासकर युवाओं और महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा, समान और समय पर मिलने वाली मजदूरी तथा सुरक्षित कार्यस्थल की दिशा में महत्वपूर्ण नींव तैयार करेंगी।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों से रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे। आर्थिक गतिविधि में तेजी आएगी, उत्पादकता बढ़ेगी और भारत के “विकसित भारत” मिशन की रफ्तार और तेज होगी। प्रधानमंत्री का कहना है कि इन सुधारों से भारत वैश्विक निवेश और औद्योगिक विकास के लिए और अधिक आकर्षक देश बनेगा।

चार लेबर कोड क्या हैं और क्यों हैं महत्वपूर्ण?

सरकार ने 29 कानूनों को चार मुख्य कोड में बदला है—

  1. Wages Code – वेतन, बोनस, ओवरटाइम, न्यूनतम मजदूरी

  2. Industrial Relations Code – हड़ताल, नौकरी से निकालना, वर्कर-एम्प्लॉयर संबंध

  3. Occupational Safety, Health and Working Conditions Code (OSH Code) – सुरक्षा, स्वास्थ्य, कार्य परिस्थितियाँ

  4. Social Security Code – EPFO, ESIC, ग्रेच्युटी, मातृत्व लाभ आदि

इन चार कोड्स का मकसद हर मजदूर को एक समान सुरक्षा और मानवाधिकार देना है, चाहे वह किसी छोटे संस्थान में काम करता हो या बड़े उद्योग में।

नए कोड्स से कर्मचारियों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
  • समय पर वेतन का अधिकार

  • ओवरटाइम का निश्चित भुगतान

  • महिलाओं को रात की शिफ्ट में भी सुरक्षा और अवसर

  • एक साल में ग्रेच्युटी का लाभ

  • सभी कामगारों को न्यूनतम मजदूरी सुनियोजित रूप से लागू

  • हर कंपनी में सोशल सिक्योरिटी का दायरा बढ़ेगा

  • हेल्थ चेकअप की अनिवार्य व्यवस्था

  • gig workers और platform workers को भी सुरक्षा

ट्रेड यूनियनों ने किया विरोध, कहा—मजदूर विरोधी कदम

चार लेबर कोड लागू होते ही विपक्षी संगठन और मजदूर यूनियनें एकजुट होकर विरोध में उतर आईं। देश की 10 प्रमुख ट्रेड यूनियनों के संयुक्त फोरम ने इसे “मजदूर विरोधी कदम” बताते हुए कहा कि यह सुधार मालिकों को लाभ पहुंचाने वाला है।

उनका कहना है कि इससे मजदूरों की bargaining power घटेगी और कंपनियों को कामगारों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा।

भारतीय मजदूर संघ का समर्थन—‘लंबे समय से प्रतीक्षित सुधार’

दूसरी तरफ, भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने इन कोड्स का स्वागत किया और कहा कि भारत में श्रम कानूनों में सरलीकरण और आधुनिकीकरण की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। BMS के अनुसार नए कोड्स से मजदूरों की सुरक्षा और अवसर दोनों में सुधार होगा।

4 नए लेबर कोड लागू…

भारत सरकार ने पुराने 29 श्रम कानूनों को सरल बनाकर कामगारों के लिए चार प्रमुख लेबर कोड बनाए हैं। ये कोड आधुनिक उद्योगों की ज़रूरतों और कामगारों के अधिकारों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

कोड ऑन वेजेज – 2019

देशभर में न्यूनतम वेतन, बोनस और वेतन से जुड़े सभी नियमों को एक ढांचे में शामिल किया गया।

इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड – 2019

नौकरी से निकाले जाने, हड़ताल और कर्मचारियों-नियोक्ताओं के संबंधों को लेकर स्पष्ट प्रावधान।

कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी – 2020

EPFO, ESIC, बीमा और ग्रेच्युटी जैसी सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एक कोड में समाहित किया गया।

ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड – 2020

सुरक्षित कार्यस्थल, स्वास्थ्य सुविधाएं और काम की स्थितियों के लिए एकीकृत नियम बनाए गए।

इन सुधारों का असर कौन-कौन से क्षेत्रों पर पड़ेगा?
  • औद्योगिक क्षेत्र – मैनेजमेंट और मजदूर संबंध अधिक पारदर्शी होंगे

  • स्टार्टअप्स – व्यवसाय आसान होगा, अनुपालन सरल

  • महिला कार्यबल – सुरक्षित कार्यस्थल और समय पर वेतन

  • गिग वर्कर्स – पहली बार कानून में शामिल

  • MSME क्षेत्र – कामकाज की जटिलता घटेगी

  • मैन्युफैक्चरिंग – उत्पादकता में वृद्धि

नए लेबर कोड्स के फायदे और संभावित चुनौतियाँ

जहाँ एक ओर इन सुधारों से श्रमिकों को अधिक सुरक्षा और कंपनियों को लचीला ढाँचा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं—

  • यूनियनों की नाराजगी

  • कुछ राज्यों में अमल की धीमी गति

  • छोटे उद्योगों में अनुपालन का बोझ

  • नाइट शिफ्ट में महिलाओं के लिए अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता

नए श्रम कानूनों से कामगारों को मिलने वाले 10 बड़े लाभ
1. समय पर न्यूनतम वेतन की गारंटी

हर मजदूर को तय समय पर न्यूनतम मजदूरी मिलेगी, किसी भी देरी पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान।

2. युवाओं को अनिवार्य जॉब लेटर (अपॉइंटमेंट लेटर)

नौकरी मिलने पर सभी युवाओं को लिखित नियुक्ति पत्र देना अब कंपनियों के लिए अनिवार्य है।

3. महिलाओं को समान वेतन और सम्मान

महिलाओं को समान काम के लिए बराबर वेतन, साथ ही नाइट शिफ्ट में भी सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जाएगा।

4. 40 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा

देश के करोड़ों असंगठित श्रमिकों को भी सोशल सिक्योरिटी का दायरा मिलेगा।

5. सिर्फ 1 साल में ग्रेच्युटी

फिक्स्ड-टर्म और अन्य कर्मचारियों को अब पाँच साल का इंतजार नहीं—सिर्फ एक साल में ग्रेच्युटी का हक।

6. 40+ उम्र वालों को मुफ्त हेल्थ चेकअप

हर साल 40 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों का एक फ्री मेडिकल परीक्षण अनिवार्य होगा।

7. ओवरटाइम का डबल पे

ओवरटाइम कार्य करने पर कर्मचारियों को दोगुना वेतन देने का स्पष्ट प्रावधान।

8. जोखिम भरे उद्योगों में 100% हेल्थ सिक्योरिटी

खतरनाक और हाई-रिस्क सेक्टर के मजदूरों को पूर्ण सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं दी जाएंगी।

9. अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित सामाजिक न्याय

नए कोड ग्लोबल लेबर स्टैंडर्ड्स को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं ताकि मजदूरों को निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल मिल सके।

10. PF, ESIC और बीमा लाभ गिग वर्कर्स तक

गिग और प्लैटफ़ॉर्म आधारित कामगारों को भी पहली बार PF, ESIC और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों का दायरा मिलेगा।

कर्मचारियों के लिए जरूरी क्या है?

हर मजदूर और कर्मचारी को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी रखनी चाहिए। वेतन, ओवरटाइम, ग्रेच्युटी, नियुक्ति-समाप्ति नियम, हड़ताल नीति, सुरक्षा मानक आदि नए कोड में विस्तार से बताए गए हैं।

नए लेबर कोड आने से भविष्य में भारत का श्रम बाजार अधिक संगठित, पारदर्शी और आधुनिक होगा।

ये भी पढ़ें :

Amazon Job Cuts 2025: अमेजन में सबसे बड़े स्तर पर कॉरपोरेट ले layoffs की शुरुआत, 30,000 की होगी छटनी

Like and follow us on :

  | Telegram | Facebook | Instagram | Twitter | PinterestLinkedin

Was This Article Helpful?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *