तालिबान की धमकी, NATO 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से सेना वापस बुलाए, फ्रांस की दो ​टुक- समय सीमा के बाद भी हम अपने लोगों को निकालना जारी रखेंगे

तालिबान की धमकी, NATO 31 अगस्त तक अफगानिस्तान से सेना वापस बुलाए

  • अंदराब में तालिबान और अफगान सेना के बीच भीषण लड़ाई, 50 तालिबानी लड़ाके मारे जाने का दावा,  20 से अधिक बंधक बनाए गए

दुनियाभर के देश अफगानिस्तान से अपने नागरिकों को निकालने में लगे हुए हैं। इधर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि काबुल से लोगों को निकालने का काम 31 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। 

इस बीच तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने एक बयान जारी कर नाटो को 31 अगस्त तक काबुल हवाई अड्डे से नियंत्रण छोड़ने और अपने देश लौटने की धमकी दे डाली है।

तालिबान की इस धमकी का फ्रांस ने जवाब दिया है। फ्रांस ने साफ तौर पर कहा कि 31 अगस्त की डेडलाइन के बाद भी हम काबुल से अपने नागरिकों को निकालने का काम जारी रखेंगे। 

अब फ्रांस का यह बयान तालिबान के लिए सीधी चुनौती बन गया है कि यदि वह बचाव अभियान में बाधा डालता है तो यह सही नहीं होगा।

वहीं तालिबान ने अमेरिका को धमकी दी है कि अगर उसने 31 अगस्त तक अफगानिस्तान नहीं छोड़ा तो उसे परिणाम भुगतने होंगे। 

तालिबान ने कहा है कि अमेरिका मिशन की समय सीमा 31 अगस्त से आगे न बढ़ाए। अगर अमेरिकी सेना 31 अगस्त के बाद भी यहां रहती है, तो अमेरिका को परिणाम भुगतने होंगे।

अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से एकमात्र उत्तरजीवी पंजशीर में लड़ाई एक खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ रही है। पंजशीर घाटी अफगानिस्तान के उन कुछ इलाकों में से एक है जहां तालिबान ने अभी तक कब्जा नहीं किया है। 

पंजशीर के करीबी सूत्रों ने दावा किया है कि अंदराब में लड़ाई में 50 से अधिक तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और 20 से अधिक लड़ाकों को बंधक बना लिया गया है।

यह भी दावा किया गया है कि इस लड़ाई में तालिबान का क्षेत्रीय कमांडर मारा गया। वहीं, पंजशीर का समर्थन करने वाले एक लड़ाके की मौत हो गई है और 6 घायल हो गए हैं। 

हालांकि तालिबान सूत्रों ने इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन तालिबान के एक लड़ाके ने मीडिया रिपोर्ट्स में कहा है, ”पंजशीर को माफ नहीं किया जाएगा.”

बीती रात तालिबान के एक सूत्र ने दावा किया कि बानू फिर से तालिबान के नियंत्रण में है। पंजशीर घाटी में विद्रोहियों का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद के लड़ाके लड़ाई के लिए तैयार हैं। उनके साथ अफगान सेना भी शामिल है। वे अफगान झंडे के साथ लड़ रहे हैं। 

नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट यानी नॉर्दन एलायंस का नेतृत्व कर रहे मसूद ने कहा कि युद्ध की तैयारी है, लेकिन अगर कोई रास्ता निकालने के लिए बातचीत होती है तो वह उसके लिए भी तैयार है।

खबर थी कि पंजशीर इलाके में लड़ाकों ने 300 तालिबानियों को मार गिराया है, लेकिन तालिबान ने दावा किया है कि ये खबर झूठी है।

तालिबान नेता मुल्ला बरादर के साथ नमाज पढ़ते दिखा ISI प्रमुख फैज हमीद

आतंकी समूहों को समर्थन नहीं देने के पाकिस्तान के झूठ का सोमवार को एक बार फिर पर्दाफाश हुआ। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने तालिबान के समर्थन में रैली निकाली है। 

दोनों संगठनों के आतंकवादियों ने हवा में फायरिंग कर अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे का जश्न मनाया। उनके नेताओं ने भड़काऊ भाषण भी दिए। 

इधर, कुछ पाकिस्तानी पत्रकारों ने तालिबान नेता मुल्ला बरादर और आईएसआई प्रमुख फैज हमीद की एक साथ नमाज अदा करते हुए तस्वीरें भी पोस्ट की हैं। इससे इमरान खान सरकार के लिए शर्मिंदगी और बढ़ गई है।

बोरिस जॉनसन जी7 की आपात बैठक कर सकते हैं

बोरिस जॉनसन जी7 की आपात बैठक कर सकते हैं


ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के मंगलवार को जी-7 की आपात बैठक करने की संभावना है। माना जा रहा है कि इसमें वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 31 अगस्त के बाद भी अफगानिस्तान में सेना को रोकने के लिए कहेंगे, ताकि काबुल हवाईअड्डे से लोगों को निकालने के लिए और समय मिल सके। 

हजारों अफगानी और विदेशी नागरिक काबुल हवाईअड्डे पर बैठे हैं और फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अफगानिस्तान छोड़ सकें।

अफगान सिखों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सिर पर बिठाया

अफगान सिखों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब को सिर पर बिठाया

हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से एक खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। कुछ भारतीय नागरिक और 46 अफगानी हिंदू और सिख हवाई अड्डे पर इंतजार कर रहे थे। 

एयरपोर्ट पर इन लोगों को भारतीय वायुसेना के विमान की तरफ ले जाया जा रहा था। उनके पास तीन अलग-अलग गुरुद्वारों से तीन गुरु ग्रंथ साहिब भी थे, जिन्हें तीन अफगान सिखों ने अपने सिर पर रखा था। इन लोगों को आज भारत लाया गया। 

सिख इस पवित्र ग्रंथ को जमीन पर नहीं रख सकते थे, इसलिए लोग इन्हें सिर पर रख कर चल रहे थे। यह जानते हुए कि काबुल हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी के माहौल के बीच उन्हें कभी भी भागना पड़ सकता है, 

उन्होंने ग्रंथ साहिब को जमीन को छूने नहीं दिया। इंडियन वर्ल्ड फोरम के अध्यक्ष पुनीत सिंह चंडोक ने अपना वीडियो शेयर किया।

#WATCH | Three Sri Guru Granth Sahib being brought to India from Afghanistan’s Kabul, along with stranded Indian nationals and 46 Afghan Hindus & Sikhs, on an Indian Air Force aircraft.

(Video Source: Puneet Singh Chandhok, President, Indian World Forum) pic.twitter.com/CUDYavSM2X

— ANI (@ANI) August 23, 2021

नई दिल्ली के वसंत विहार में UNHCR के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करते लोग।
नई दिल्ली राजधानी के वसंत विहार में UNHCR के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करते लोग।

अफगान शरणार्थियों ने यूएनएचसीआर कार्यालय पर प्रोटेस्ट कर रिफ्यूजी कार्ड की मांग की 

सैकड़ों अफगान शरणार्थियों ने नई दिल्ली के वसंत विहार में यूएनएचसीआर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। ये लोग 5-10 साल से यहां रह रहे हैं और इनकी मांग है कि इन्हें संयुक्त राष्ट्र द्वारा रिफ्यूजी कार्ड जारी किया जाए।
अफगानिस्तान के मुस्लिम शरणार्थी जो यहां रह रहे हैं या जो अभी आ रहे हैं, सीएए के कारण उन्हें भारत में नागरिकता मिलने की उम्मीद नहीं है। उनका कहना है कि अगर उन्हें यह कार्ड मिल जाता है तो इससे उन्हें किसी दूसरे देश की नागरिकता लेने में मदद मिलेगी. यह कार्ड मिलने के बाद ही वे भारत से बाहर जा सकेंगे।

अफगानिस्तान मुद्दे पर पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर से की बातचीत

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार शाम जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच अफगानिस्तान समेत कई अन्य मुद्दों पर बातचीत हुई. इसके साथ ही भारत और जर्मनी ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी जोर दिया। 

पीएमओ ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर मर्केल ने अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति और दुनिया के लिए इसके प्रभावों पर भी चर्चा की। दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान में फंसे लोगों को निकालने के बारे में भी बात की, साथ ही शांति और सुरक्षा बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया।

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