IT firms global expansion: पिछले कई दशकों से भारत कीIT firms अपनी कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा US market से हासिल करती रही हैं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। Visa rules की सख्ती, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव और क्लाइंट्स का सतर्क रवैया – इन सबने भारतीय आईटी दिग्गजों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
यही वजह है कि आज TCS, Infosys, HCLTech, Wipro और Tech Mahindra जैसी कंपनियां धीरे-धीरे अपना फोकस अमेरिका से हटाकर नए भूभागों की ओर मोड़ रही हैं।
भारत से यूरोप और मिडल ईस्ट तक – IT firms की एक नई दौड़
अगर आप गौर करें तो पिछले दो सालों में ही बदलाव साफ दिखने लगे हैं।
TCS ने यूरोप, भारत और मिडल ईस्ट में अपना कारोबार काफी बढ़ाया है।
Infosys की कमाई का हिस्सा भी अब US से घटकर Europe और India में बढ़ रहा है।
वहीं HCLTech और Wipro ने तो इतने बड़े फैसले लिए कि अब उनकी Middle East operations नई ऊँचाई पर पहुँच चुकी हैं।
ये कंपनियां सिर्फ अमेरिकी मार्केट पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। उनकी नज़र अब उन इलाकों पर है जहाँ तकनीक पर खर्च (technology spending) बढ़ रहा है और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन तेज़ी से हो रहा है।
स्थानीय जरूरतों के हिसाब से बन रही रणनीति
इस बदलाव के बारे में Deloitte India IT firms के टेक्नोलॉजी सेक्टर लीडर सिद्धार्थ टिपनिस ने एक अहम बात कही। उनके मुताबिक, कंपनियाँ आज दुनिया की अस्थिरता को समझ रही हैं और खुद को कई “de-risking” रास्तों के हिसाब से ढाल रही हैं।
यानी –
Europe और Middle East में localized delivery centres, ताकि क्लाइंट्स को उसी टाइम-जोन में सर्विस दी जा सके।
साथ ही, regional offices ताकि लोकल लेवल पर क्लाइंट्स से मुलाकात हो, भरोसा बढ़े और नए रिश्ते बनाए जा सकें।
सिर्फ बिजनेस नहीं – भारत खुद बन रहा बड़ा बाजार
सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि पहले भारत सिर्फ IT workforce supplier माना जाता था, लेकिन अब सिनेरियो बदल रहा है।
आज बड़े-बड़े क्लाइंट्स भारत में अपने Global Capability Centres IT firms (GCCs) खोल रहे हैं। यानी भारत न केवल सेवा प्रदाता है, बल्कि एक नया domestic IT market भी बनता जा रहा है।
HCLTech IT firms के CEO विजयकुमार ने हाल ही में कहा था –
“हम भारत, मिडल ईस्ट और कई उभरते बाजारों (emerging markets) में अपने सॉफ्टवेयर बिजनेस को तेजी से विस्तार दे रहे हैं।”
यह बयान साफ दिखाता है कि भारत अब सिर्फ आउटसोर्सिंग का ठिकाना नहीं, बल्कि खुद एक बड़ा आईटी उपभोक्ता बनकर उभर रहा है।
यूरोपियन क्लाइंट्स की वापसी
लंबे वक्त तक यूरोपियन बाजार कुछ धीमा रहा था। क्लाइंट्स लागत कम करने के मूड में थे और प्रोजेक्ट्स पर तुरंत साइन नहीं कर रहे थे। लेकिन अब हालात बदलते नज़र आ रहे हैं।
Infosys, HCLTech, LTIMindtree और Tech Mahindra IT firms चारों ने यूरोप में नए कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल किए।
L&T Technology Services (LTTS) और KPIT Technologies IT firms जैसे मिड-कैप खिलाड़ी भी अब अमेरिका के बाहर के बाजारों में सफलता पा रहे हैं।
यह संकेत देता है कि यूरोप फिर से भारतीय आईटी कंपनियों के लिए growth engine बन सकता है।
अधिग्रहण और जॉइंट वेंचर्स – भविष्य की तैयारी
वैश्विक आईटी कंपनियां सिर्फ नए सेंटर खोलकर नहीं रुक रहीं, बल्कि acquisitions और joint ventures के जरिए भी मजबूत पकड़ बना रही हैं।
Infosys ने Australia और Japan दोनों में acquisitions किए। खासकर Telstra के साथ उसका joint venture काफी बड़ा कदम माना जा रहा है।
Wipro ने अपनी मिडल ईस्ट मौजूदगी को और मजबूत बनाने के लिए Saudi Arabia में अपना मुख्यालय शिफ्ट कर दिया।
क्यों जरूरी है ये बदलाव? – AI और Cybersecurity की वजह से
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विस्तार सिर्फ क्लाइंट्स के करीब जाने का मामला नहीं है।
जैसे-जैसे AI adoption बढ़ रही है, हर देश के data laws और cybersecurity rules और कड़े होंगे।
यानी कंपनियों को यही काम local level पर करना पड़ेगा।
इसके अलावा, Agentic AI और platform-based services जैसी नई सेवाएं भी ज्यादा डिमांड में होंगी।
NelsonHall के रिसर्च एनालिस्ट गौरव परब का कहना है कि अगले कुछ सालों में Middle East, Nordics और Australia में IT activity ज़ोर पकड़ लेगी।
बड़ी तस्वीर – US अब भी सबसे बड़ा, लेकिन…
भले ही कंपनियां दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ रही हों, लेकिन US अभी भी राज करता है।
FY25 में भी 62% revenue share अमेरिका से आया। वहीं,
Europe: 11.3%
UK: 16.5%
APAC: 7.7%
RoW: 2.2%
ये आंकड़े बताते हैं कि US dependency धीरे-धीरे कम हो रही है, और बाकी दुनिया की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
नतीजा: एक नया बैलेंस बन रहा है
Indian IT firms global expansion सिर्फ बिजनेस का हिस्सा नहीं है, यह पूरे इंडस्ट्री के future survival strategy का हिस्सा है।
जहाँ एक ओर US भरोसेमंद और बड़ा बाजार है, वहीं दूसरी ओर Middle East, Europe और Asia में फैलाव भविष्य की सुरक्षा और नई ग्रोथ स्टोरी लिख रहा है।
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