अगहन शुक्ल चतुर्थी: इस कामना के लिए होता है चतुर्थी व्रत, रविवार को गणपति पूजन के साथ ही जरूर करें दान-पुण्य Read it later

अगहन शुक्ल चतुर्थी (Aghan Shukla Chaturthi) 27 नवंबर रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा और व्रत का विधान है। रविवार चतुर्थी होने के कारण इस दिन सूर्य देव की भी पूजा जरूर करें। बता दें कि एक माह में दो बार चतुर्थी आती हैं। इस तरह एक वर्ष में कुल 24 चतुर्थी पड़ती हैं, जब एक वर्ष में अधिक मास आते हैं तो दो चतुर्थी बढ़ जाती हैं। इस तिथि के स्वामी भगवान गणेश हैं, क्योंकि इसी तिथि को गणेश प्रकट हुए थे।

चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं। इस वजह से चतुर्थी पर गणेश जी के लिए व्रत-उपवास करने का विधान है। कहा गया है कि गणेश पूजा और व्रत करने से भक्त की बुद्धि तेज होती है। घर में रिद्धि-सिद्धि यानी सुख-समृद्धि का आगमन होता है। ज्योतिष में सूर्य को रविवार का कारक ग्रह माना गया है। सूर्य देव नौ ग्रहों के राजा हैं। जो लोग हर रोज सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं, उनकी कुंडली के कई दोष शांत हो जाते हैं।

 

चतुर्थी पर आप ऐसे करें पूजन

सुबह जल्दी उठ स्नान के बाद घर के मंदिर में गणेश पूजन करें। गणेश जी के सामने (Aghan Shukla Chaturthi) व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। श्री गणेशाय नम: मंत्र का जप करें। फल और मिठाई का भोग लगाएं। दूर्वा चढ़ाएं। हार-फूल से श्रृंगार करें। धूप-दीप जलाएं। आरती करें।

गणेश पूजा भगवान के 12 नाम मंत्रों का जप भी जरूर करें। गणेश जी के 12 नाम वाले मंत्र- ऊँ सुमुखाय नम:, ऊँ एकदंताय नम:, ऊँ कपिलाय नम:, ऊँ गजकर्णाय नम:, ऊँ लंबोदराय नम:, ऊँ विकटाय नम:, ऊँ विघ्ननाशाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ धूम्रकेतवे नम:, ऊँ गणाध्यक्षाय नम:, ऊँ भालचंद्राय नम:, ऊँ गजाननाय नम:।

 

ऐसे करें चतुर्थी व्रत

सुबह गणेश पूजा के बाद दिनभर निराहार रहें यानी पूरे दिन अन्न का भोजन न करें। अगर भूखे रहना मुश्किल हो तो फलाहार किया जा सकता है। दूध और फलों के रस का सेवन कर सकते हैं। दिन में गणेश जी की कथाएं पढ़ें या सुनें, मंत्र जप करें। शाम को चंद्र उदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य चढ़ाएं, पूजा करें। गणेश जी की पूजा करें। इसके बाद भोजन करें। ये चतुर्थी व्रत की सामान्य विधि है।

 

काशी के ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम शर्मा की मानें तो चतुर्थी (Aghan Shukla Chaturthi) पर किए जाने वाले व्रत और पूजा से परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन पूजा के साथ जरूरतमंद लोगों को श्रद्धानुसार दान अवश्य करना चाहिए। इस तिथि पर ठंड का समय है, इसलिए कंबल और गर्म कपड़े दान करने चाहिए। मंदिर में पूजा सामग्री चढ़ाएं। गजानन की पूजा करें।  इस दौरान ध्यान रहे कि गणपति जी को तुलसी न चढ़ाएं।

 

इसलिए गणपति को नहीं चढ़ाई जाती तुलसी

शास्त्रों में तुलसी को पूजनीय और पवित्र माना गया है और विष्णु जी व श्री कृष्ण की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है तो वहीं गणेशजी और शिवजी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है। इस सम्बन्ध में अनेक कथाओं में प्रचलित हैं।

एक कथा के अनुसार बताया गया है कि तुलसी गणेश जी से विवाह करना चाहती थी और इसके लिए तुलसी ने भगवान से प्रार्थना भी की थी। उस समय गणेशजी विवाह नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने तुलसी को मना कर दिया। इससे क्रोधित होकर तुलसी ने गणेश को दो विवाह का श्राप दे दिया। गणेश जी ने भी तुलसी को असुर से विवाह होने का श्राप दे दिया था। इस घटना के बाद गणेशजी ने अपने पूजन में तुलसी की वर्जित कर दिया। इस कारण गणपति को कभी तुलसी नहीं अर्पित की जाती है।

 

गणेश को इसलिए चढ़ाई जाती है दुर्वा

प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीन काल में गणेश ने अनलासुर नामक राक्षस को निगल लिया था। इस वजह से उनका पेट जलने लगा। तब ऋषियों ने दूर्वा की गांठ बनाकर गणेश जी को खाने के लिए दी। दूर्वा का सेवन करने से गणेश के पेट की जलन शांत हो गई। इसके बाद से भगवान गणेशजी को विशेष रूप से दूर्वा का भोग लगाया जाता है।

 

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