US President: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन अफगानिस्तान के हालात पर देश को संबोधित किया है। यह 4 दिन के भीतर उनका दूसरा संबोधन है। इस दौरान बाइडेन ने कहा कि इस वक्त दुनिया के सामने बड़ी आफत खड़ी है।
हम जुलाई से अब तक 18,000 से ज्यादा और 14 अगस्त के बाद से लगभग 13,000 लोगों को काबुल से निकाल चुके हैं। यह इतिहास का सबसे मुश्किल और बड़ा एयरलिफ्ट ऑपरेशन है। तालिबान के लिए भी वहां के हालात बहुत अच्छे नहीं हैं।
उन्होंने विश्वास दिलाया कि अमेरिका के सभी लोगों के निकलने तक हमारी सेना काबुल में मौजूद रहेगी। बाइडेन ने कहा कि हमने 20 साल तक अफगानिस्तान के साथ काम किया है।
इस समय भी काबुल में हमारे 6 हजार सैनिक मौजूद हैं। अगर तालिबान अमेरिकी सेना पर हमला करता है तो इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बाइडेन की स्पीच की अहम बातें
- हमारे जवान काबुल एयरपोर्ट की सुरक्षा में जुटे हैं। इससे न सिर्फ सैन्य उड़ानें बल्कि दूसरे देशों के चार्टर प्लेन से लोगों को निकाला जा रहा है।
- ISIS के आतंकी ज्यादा बड़ा खतरा हैं। नाटो के देश अमेरिका के साथ खड़े हैं। जेल से भगाए गए आतंकी हमला कर सकते हैं।
- अफगानिस्तान में युद्ध खत्म करने का वक्त आ गया था। नाटो देश भी इस फैसले से सहमत थे। अगले हफ्ते G-7 की बैठक में हम बड़ा फैसला लेंगे।
- यह मिशन बहुत खतरनाक है। हमारे सोल्जर्स जोखिम के बावजूद मुश्किल हालात में इसे चला रहे हैं। मैं वादा नहीं कर सकता कि आखिरी नतीजा क्या होगा। ये जो भी होगा नुकसान के जोखिम के बिना होगा।
इससे पहले अफगान राष्ट्रपति को ठहराया था जिम्मेदार
अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद बाइडेन ने सोमवार-मंगलवार की रात पहली बार देश को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने वहां बने हालात कि लिए राष्ट्रपति अशरफ गनी और वहां की लीडरशिप को जिम्मेदार ठहराया था।
उन्होंने कहा था कि मैं मानता हूं कि तालिबान बहुत जल्द काबिज हो गए। अफगानी लीडरशिप ने बहुत जल्द ही हथियार डाल दिए। हमने वहां अरबों डॉलर्स खर्च किए। अफगान फोर्स को ट्रेंड किया। इतनी बड़ी फौज और हथियारों से लैस लोगों ने हार कैसे मान ली, यह सोचना होगा। यह गंभीर मुद्दा है।
इस बार मीडिया पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिए
पिछले संबोधन से शुक्रवार को दो बातें अलग रहीं। पिछली बार बाइडेन अकेले आए थे और मीडिया के सवालों का जवाब दिए बिना ही तेजी से निकल गए थे। शुक्रवार को उन्होंने सवालों के जवाब भी दिए। इस दौरान उनके पीछे उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन खड़े रहे।
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